बुधवार, मई 23, 2007

आखिर गलत तो आखिर गलत ही है प्‍यारे...............

आखिर गलत तो आखिर गलत ही है प्‍यारे...............

हॉं तो प्‍यारे, बजट भी पेश हो गया और होली भी मन गयी । चलते चलते चुनाव भी निबटा जा रहा है । किसान तो खैर गये काम से कुछ सरकार ने मारा, कुछ बिजली ने, कुछ खाद ने निबटाये तो कुछ ओले वारिश ने बचा खुचा सूपड़ा साफ कर डाला । अब बारी स्‍टूडेण्‍टों की है, बिना बिजली और कामचोर मास्‍टरों के साये तले, भ्रष्‍ट जिला शिक्षा कार्यालय की छांव तले उनने क्‍या खोया क्‍या पाया, अब चूंकि इम्‍तहान चालू हो रहे हैं, उनकी तैयारी और मेहनत का क्‍या इनामो इकराम होगा, समय बतायेगा ।
वैसे समय बड़ा रहमदिल है, कहते हैं कि कभी कभार डॉक्‍टर का काम भी करता है । राजनीति में कहा जाता है कि, आज पाप कर लो, अगले चुनाव से एकाध साल पहले धो डालेंगें । वैसे भी मनोविज्ञान कहता है कि जो आज घटित हुआ है वह तीन दिन या पॉंच दिन बाद उतना याद नहीं रखा जाता, इसके बाद तीन मॉंह और पॉंच माह बाद फिर तीन साल और पॉंच साल बाद वह लगभग बेमानी हो जाता है ।
राजनीति में यह भी कहते हैं कि कर्ज लेकर घी पियो, फिर चुकता किसको करना है, अगली सरकार भोगेगी ।
खैर जो भी है, जनता तो जनता है, एक कामधेनु दुधारू गाय की तरह, और राजनेता एक बेलगाम सॉंड़ की तरह, जिसे दोनो हाथ से नेता दोहते भी हैं और मौका पड़े पर .....। खैर चाहे जितना नेता खर्च करें, चाहे जितने ऐश करें, चाहे जितना चुनाव में खर्च हो चाहे क्रिकेट में, भरपाई तो इसी कामधेनु गाय को ही करना है , चाहे टैक्‍स बढ़ा दो चाहे गरीब का आटा दाल उससे दूर कर दो चाहे पेट्रोल डीजल मंहगे कर दो चाहे गरीब से बीड़ी सिगरेट छीन लो, भईया तुम्‍हारे बाप का राज है, जो चाहे सो कर दो । कोई कुछ नहीं कहने वाला, वैसे भी यहॉं है कौन सुनने वाला । कहने वाले भी तुम्‍हारे और सुनने वाले भी तुम्‍हारे ।
कभी ये तो नहीं बताओगे कि आखिर हर साल टैक्‍स बढ़ाते क्‍यों हो, आखिर क्‍यों हर साल मंहगाई बढ़ा देते हो भईये, हर साल पब्लिक से पैसा खींच खींच कर इसका करते क्‍या हो । ये जाता कहॉं है, आखिर कहॉं जा रहा है बढ़े टैक्‍सों का पैसा । अब कहोगे कि जनता का पैसा जनता पर ही लग रहा है, तो प्‍यारे जनता तो वहीं की वहीं है जहॉं आज से पचास साल पहले थी, उसे तो कोई नफा नहीं हुआ । गरीब तो आज भी पेट बांध कर सोता है, जब अपने बच्‍चों की भूख नहीं देख पाता तो आत्‍महत्‍या कर लेता है । हजारों हर साल देश में मरते हैं, मरते भी रहेंगे उन्‍हें कफन भी नसीब नहीं होता । उनकी लाशें चील, गिद्ध और कौये आज भी खाते हैं । नेता ऐयाशी करता रहे , अफसर भ्रष्‍टाचार करता रहे, तुम्‍हारी तिजोरी छकाछक भर रहे, इसके लिये हजारों मरते हैं, मरते हैं, चले जाते हैं, किसी का क्‍या बिगाड़ते हैं, बिगाड़ भी क्‍या सकते हैं । वैसे कहा भी गया है, कि अरे हृदय को थाम , महल के लिये झोंपड़ी बलि होती है ।
टैक्‍स बढ़ा कर यदि गरीबों की जिन्‍दगी बचा देते तो कोई बात थी, किसी बेरोजगार को रोजगार दे देते तो कोई बात थी, किसी अबला की आबरू बचा देते तो कोई बात थी । किसी सिर को कोई छत मुहैया करा देते तो कोई बात थी ।
जरा गरीबों से जाकर पूछो कि कहॉं हैं तुम्‍हारी योजनायें, हमने जो पैसा तुमको भेजा था वो तुम तक पहुँचा कि नहीं, जमीन पर खोजोगे तो मायाजाल पाओगे , अर्जी फर्जी जान जाओगे , जो भ्रष्‍टा खा रहा है वहीं जॉंच कर रहा है वही रिपोर्ट बना रहा है और अपनी पीठ खुद ठोक कर खुद को शाबासी दे रहा है, गरीब बेचारा कोने में दुबका खड़ा सहमा हुआ है, आखिर वह तो कीड़ा मकोड़ा ही है ।
कहॉं है तुम्‍हारा सूचना का अधिकार, कितनी स्‍वयं सेवी संस्‍थाओं को पिछले बीस साल में तुमने कितना फण्‍ड दे डाला, वे कहॉं हैं, कहॉं है उसकी धारा 4 और कहॉं है उसका पालन । कितनी स्‍वयंसेवी संस्‍थायें इण्‍टरनेट पर जानकारी का प्रकाशन कर चुकीं हैं, जरा बताना तो भईये । खरबों रूपये के इस सालाना घोटाले की जानकारी क्‍यों जनता से छिपायी जा रही है प्‍यारे । जरा सच को सामने तो आने दो, क्‍यों रोकते है पर्दाफाश होने से, यार प्‍यारे सूचना का अधिकार 12 अक्‍टूबर 2005 को लागू हुआ तबसे अब तो बहुत दिन हो गये , अब तक कहॉं है  तुम्‍हारी स्‍वयं सेवी संस्‍थायें, दम है तो लिस्‍ट छाप दो उनके वेब पतों की । नहीं तो फर्जी फटी ढोलक बजाना बन्‍द कर दो ।
यहॉं किसान मर रहा था, उन पर कहर टूट पड़ा था, छात्र रो रहे हैं, उद्योग धन्‍धे खत्‍म और चौपट हो गये, मगर सरकार होली मना रहे हैं, सुन्‍दरियों के अ‍ालिंगन पाश में जकड़े, रंग अबीर गुलाल और कभी ढोलक तो कभी तम्‍बूरा और कभी मंजीरा लटकाये हिजड़ों की तरह खिलखिलाते खी खी करते खीसे निपोरते फोटो खिंचा रहे है । अखबारों के फ्रण्‍ट पेज की खबर बन रहे हैं । उफ शर्म है ऐसी बेशर्मी और नालायकी पर , थू है ऐसी होली पर और ऐसी खबरों पर । जय हिन्‍द ।।                            

 

फिर फैल हुआ शिवराज का बिजलीघर, अघोषित अन्धाधुन्ध विद्युत कटौती चालू आहे

फिर फैल हुआ शिवराज का बिजलीघर, अघोषित अन्धाधुन्ध विद्युत कटौती चालू आहे

 

मुरैना ! ग्वालियर टाइम्स ! 25 सितम्बर भादों का महीना जाते जाते चालू हुयी विद्युत कटौती न केवल बदस्तूर जारी है, बल्कि दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है !  

क्वार कनागत लगते ही, दोनो टाइम की जा रही अघोषित विद्युत कटौती शुरू में दो घण्टे कुल जमा चालू की गयी और कनागत गुजरते गुजरते यह जुल्म बढ़ता ही गया ! और अब आधा क्वार का महीना गुजरने के बाद राजनीतिक तौर पर अभिशप्त चम्बल को नवदुर्गा यानि नवरातों में छह से लेकर आठ घण्टे की अनाप शनाप बिजली कटौती झेलना पड़ रही है !  

हालात ये हैं कि बिजली न जाने कब चली जाये और न जाने कब वापस आये कोई ठिया ठौर नहीं ! लोग दुआ कर रहे हैं प्रभु जल्दी से जल्दी बदल जाये सरकार और मिले अंधेर नगरी से राहत ! हालत इतनी खस्ता है कि अपनी वेबसाइट के लिये एक एक समाचार लिखने और तैयार करने के लिये हमें घण्टों इंतजार करना पड़ता है, कभी कभी तो कई दिन तक एक ही लेख बार बार अनेक बार लिख कर भी पूरा नहीं हो पाता ! और बार बार जाती बिजली खासा संदेश दे जाती है कि भईया लौट चलो लालटेन की ओर, ये आई. टी. की तेज रफ्तार का जमाना नहीं बल्कि अठारहवीं सदी का नक्कारखाना है, जहाँ न शिकायत न फरियाद सुनी जाती है बल्कि हुजूर के फेवर में चार लाइनें छापते रहिये, यदि सच बोला तो फिर न कहिये कि सरकार बेकार !  

अगर प्रोफेसर सभरवाल के बेटे ने कहा कि ''मेरा मुंसिफ ही मेरा कातिल है'' इंसाफ क्या खाक करेगा ? तो भईया क्या गलत कहा ?  

सच्चाई तो प्यारे यही है ! वैसे दीपावली तक हमारी वेबसाइट दिल्ली दफ्तर में पहुंच ही जायेगी ! तब शायद बात बन पायेगी !

 

रात्रिकालीन विद्युत कटौती बंद - ऊर्जा मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय

रात्रिकालीन विद्युत कटौती बंद - ऊर्जा मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय

28 सितम्‍बर 2006 । ऊर्जा, लोकनिर्माण एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने त्यौहारों के मद्देनजर रात्रिकालीन विद्युत कटौती बंद करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रदेश में शाम साढ़े 6 बजे से रात 11 बजे तक विद्युत कटौती नहीं होगी। इस सम्बन्ध में प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों को निर्देशित किया गया है।  

ऊर्जा मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि इंदिरा सागर परियोजना की दो विद्युत इकाईयों ने गत दिवस से विद्युत उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। रविवार को इन इकाईयों से 250 मेगावाट विद्युत उत्पादन हुआ। इसे बढ़ाकर दशहरे तक लगभग 800 मैगावाट विद्युत उत्पादन किया जायेगा।  

श्री विजयवर्गीय ने बताया कि अभी हाल ही में मड़ीखेड़ा की दो इकाईयों से 40 मेगावाट और बाणसागर परियोजना की दो इकाईयों से 20 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। इस अधिक विद्युत उत्पादन के कारण त्यौहारों के अवसर पर प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।  

 

अघोषित अन्धाधुन्ध विद्युत कटौती से ग्रामीण जन जीवन अस्त व्यस्त

अघोषित अन्धाधुन्ध विद्युत कटौती से ग्रामीण जन जीवन अस्त व्यस्त

मुरैना (दिमनी) 12 जून 2006 ! भयानक गर्मी और मौसम जनित रोगों के प्रकोप से त्रस्त मुरैना जिला के ग्रामीण अंचल पर विद्युत वितरण कम्पनी के कहर का साया भी आतंक बन कर टूटा है ! स्थानीय दिमनी कस्बे के हालात और आसपास के गांवों की हालत उससे भी ज्यादा खस्ता है !
यहाँ पदस्थ स्थानीय विद्युत सुपरवायजर की तानाशाही और धींगामश्ती के चलते ग्रामीणों को काफी संकट से गुजरना पड़ रहा है ! जहाँ जिले का तापमान भयानक गर्मी के चलते 42-43 डिग्री पर चलकर धरती और अम्बर को दहला रहा है वहीं इस विकट गर्मी में समस्याओं और असुविधाओं के चलते सूचना प्रौद्योगिकी क्रान्ति के इस दौर में चन्द टुकड़े बिजली के लिये मोहताज रहकर, अठारहवीं सदी के विकट दिनों में जीना पड़ रहा है !
चिलचिलाती धूप और तपती जमीन में थमती हवाओं की मार के बीच बिलबिलाते लोग और बिलखते बच्चे, हाथों को पंखा बनाकर झलते बूढ़े हाथ बस यही कहानी है दिमनी और उसके आसपास के गाँवों की ! सरकार के दावों की पोल खोलती कहानियाँ यहाँ हर गली चौराहे पर आम तौर पर दृष्टव्य हैं !
यू ंतो यहाँ नल जल योजना भी है, मगर बिना बिजली यह योजना भी सूखे नलों से आशा लगाये लोगों को महज मुँह चिढ़ाती नजर आती है !
न पानी, न बिजली, न सुनवाई, न रहमत बस कष्ट से सही लोग जी रहे हैं !
बताया जाता है कि यहाँ पदस्थ विद्युत सुपरवायजर सहित विद्युत वितरण कम्पनी का सारा अमला शहर मुरैना में निवास करता है और अव्वल तो वे यहाँ आते ही नहीं और आये भी तो जनता की सुनते नहीं ! जनता को डाँट डपट की घुटटी पिला कर छुटटी !
स्थिति इतनी बदतर है कि दिन में कभी एक घण्टे के लिये तो कभी दो धण्टे के लिये बिजली आती है , रात के भी हालात यहीं हैं, रात में बिजली न जाने कब आ जाये और न जाने कब चली जाये कोई पता नहीं ! अक्सर लोग यहाँ भरी गर्मी में तड़पते हुये रातें गुजारतें हैं !
भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले दिमनी और तथाकथित किसान सरकार के चलते किसानों का आलम देखना है तो दिमनी से बेहतर नजारा कहीं देखने को न मिलेगा !
उल्लेखनीय है कि , भाजपा के पूर्व केबिनेट मंत्री और वर्तमान एग्रो चेयरमेन मुंशीलाल का गढ़ यही क्षेत्र है ! गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारीयों से जूझते लोंगों को बिना बिजली अनेक भीषण बीमारीयों का भी शिकार होना पड़ रहा है !

 

आखिर ठप्‍प हुआ शिवराज का बिजलीघर, चम्‍बल में पॉंच दिन कहर के, बिजली सप्‍लाई पूर्णत: ठप्‍प

आखिर ठप्‍प हुआ शिवराज का बिजलीघर, चम्‍बल में पॉंच दिन कहर के, बिजली सप्‍लाई पूर्णत: ठप्‍प

चम्‍बल में पॉंच दिन कहर के, बिजली सप्‍लाई पूर्णत: ठप्‍प
लाम्‍बा की लम्‍बी कटौती ,अखबारों में खबर छापने के गुनाह का दण्‍ड भुगत रही है जनता
मुरैना 21 जून 2006 । ग्‍वालियर टाइम्‍स समाचार सेवा । चम्‍बल पर पिछले पॉंच दिन कोहराम बन कर टूटे हैं, समूचे ग्रामीण अंचल सहित जिला एवं तहसील मुख्‍यालयों सहित संभागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना में विगत पॉंच दिनों से विद्युत सप्‍लाई एकदम ठप्‍प हो गयी है ।
आखिर ठप्‍प हुआ शिवराज का बिजलीघर
भिण्‍ड, मुरैना जिलों की विद्युत सप्‍लाई एकदम बन्‍द होकर चम्‍बल अंचल में कहर का सा आलम छा कर हाहाकार मच गया है ।
शहर मुरैना संभागीय मुख्‍यालय होने के साथ जहॉं आयुक्‍त कार्यालय भी है , की दशा इतनी अधिक दयनीय हो गयी है कि शहर के आधे से ज्‍यादा भाग में विद्युत सप्‍लाई पिछले पॉंच दिनों से एकदम बन्‍द है । सारे दिन और रात मिला कर महज छ: घण्‍टे की बिजली के सहारे पिछले पॉंच दिनों से आधे से ज्‍यादा शहर की जनता भीषण गर्मी और मच्‍छरों से जूझ रही है ।
विद्युत वितरण कम्‍पनी के अधिकारी लाम्‍बा जी की इस लम्‍बी अघोषित अनियंत्रित,अन्‍धाधुन्‍ध कटौती के सम्‍बन्‍ध में चर्चा ग्‍वालियर टाइम्‍स से हुयी तो 17 तारीख को लाम्‍बा बोले परमिट है सो सुबह छ बजे की गुल हुयी बिजली शाम छ बजे आयी और शम साढे सात बजे फिर जो गयी तो रात बारह बजे आयी, 18 तारीख को विद्युत कम्‍पनी ने दैनिक भास्‍कर में विज्ञापन देकर कहती है कि आज से फलां फलां मोहल्‍ले में फलां फलां तारीख को सुबह छ बजे से चार बजे तक बिजली नहीं रहा करेगी ,गोया चार जुलाई तक सीजनल मेण्‍टीनेन्‍स होना है । अब भईया लाम्‍बा यार आज की तारीख में जिन मोहल्‍लों के नाम तुमने अखबार में नहीं छपवाये उनमें सुबह छ बजे गयी बिजली रात एक बजे वापस आई है हुजूर इसे घोषित मानें कि अघोषित । यार इतनी तो न पिया करो कि मोहल्‍ले ही भूल जाओ कि कहॉं काटनी है , अरे अपने विज्ञापन का पेपर ही उठा कर देख लेते , प्‍यारे अफसर बंटाढार, जहॉं काटने की बात थी वहीं काट लेते, आध्‍ो से ज्‍यादा शहर की क्‍यों तीन दिन से काट रखी है । और कटौती भी इतनी बुरी कि सुबह छ बजे से रात बारह और एक बजे तक । धन्‍य हो महाराज । हो गयी जय राम जी की । अरे भईया सारी चम्‍बल में बिजली का कोहराम मचा है , अब अखबार तुम्‍हारे खिलाफ लिख छाप रहे हैं तो उनका क्‍या कसूर, भईया जनता चिल्‍लाती है यार लाम्‍बा सो उन्‍हें लिखना पड.ता है । अब ये तुम्‍हारी बदकिस्‍मती है दोस्‍त कि हर गांव हर तहसील से आपके खिलाफ आवाज आ रही है । विज्ञापनों के लालच दो या मोबाइल सेट का जनता की आवाज कब तक कुचलवाई जा सकती है ।
अब हर जगह एक ही खबर है कि फलां जगह बिजली की आफत , तुम्‍हारी सरकार का ही वायदा था कि चुनाव जीत कर केवल तीन महीने में बिजली ही बिजली कर देंगें । अब तुम नहीं कर पाये तो इसमें जनता का या अखबारों का क्‍या दोष ।
बिजली काट कर जो संदेश आप पहुंचाना चाहते हैं , हमने पहुंचा दिया है । खुश रहो और काटो , काटो फिर पता नहीं मौका मिले न मिले । जय राम जी की ।
धन्‍य हैं प्रभु आप और आपकी सरकार । जनता करती हाहाकार ।।
और बढाओ अत्‍याचार, मार काट का रहे न पार ।।
गौर की याद आयी जनता को
बिजली के मामले में अब तक केवल एक ही मुख्‍यमंत्री बाबूलाल गौर ऐसे हुये जिनके कार्यकाल में बिजली व्‍यवस्‍था चकाचक रही और जनता को परेशानी का अहसास नहीं हुआ । आजकल लोग बाबूलाल गौर की याद में कशीदे बॉंच रहे हैं । और उमा भारती के कारण मुख्‍यमंत्री धोखे से बन बैठे शिवराज और उमा दोनों को ही कोस रहे हैं । अब गालियॉं कितनी पड् रही हैं ये तो कहीं भी किसी भी गली में घुस कर बिजली न रहने पर ही सुना और देखा जा सकता है । लोग कहते हैं शिवराज को एक पुराने मुख्‍यमंत्री का दूसरा अवतार । जिस बिजली ने सरकार बदल थी, आज फिर उसी मोड् पर वरन उससे भी ज्‍यादा संक्रमण काल में शिवराज सरकार आ पहुँची है ।