रविवार, जुलाई 22, 2007

भ्रष्‍ट सहायक यंत्री विद्युत मदान को रिश्वत के प्रकरण में कारावास

भ्रष्‍ट सहायक यंत्री विद्युत मदान को रिश्वत के प्रकरण में कारावास

ग्वालियर 19 जुलाई 2007

विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण मुरैना श्री के.पी. सिंह द्वारा मध्यप्रदेश विद्युत मंडल मुरैना के सहायक यंत्री एवं पदेन तहसीलदार श्री एन.के. मदान को कारावास की सजा सुनाई गई है । आरोपी को धारा 7 में दो वर्ष का सश्रम कारावास व एक हजार रूपये का अर्थदंड तथा धारा 13 (1) डी 13 (2) पी.सी. एक्ट में तीन वर्ष का सश्रम कारावास व दो हजार रूपये का अर्थदंड की सजा दी गई है । उक्त अर्थदण्ड जमा न करने पर आरोपी कमश: 100 दिन एवं 200 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा ।

       उल्लेखनीय है कि वि.पु. स्था. लोकायुक्त ग्वालियर की टीम द्वारा 30 जनवरी 2003 को श्री एन.के. मदान सहायक यंत्री मुरैना को एक हजार रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथ विधिवत गिरफतार किया गया था । पुलिस अधीक्षक वि.पु.स्था. लोकायुक्त ग्वालियर ने इस प्रकरण के संबंध में जानकारी दी है कि श्री रामनाथ सिंह बघेल पुत्र श्री रघुवर सिंह निवासी ग्राम घुसगंवा जिला मुरैना के द्वारा 28 जनवरी 2003 को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर को एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी । इस शिकायत में उल्लेख था कि सहायक यंत्री विद्युत श्री मदान द्वारा उनसे रिश्वत की मांग की जा रही है । आवेदक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ग्राम धुसगंवा में उसकी पत्नी के नाम से दो बीघा दस विश्वा कृषि भूमि है । जिस पर कुंआ खुदा है उस कुंए पर सिंचाई हेतु पंप लगाने हेतु उसने पुत्रवधु रिंकी देवी पत्नी मेवाराम के नाम अस्थाई विद्युत कनेक्शन लिया था । 23 जनवरी 2003 को वह कुंए पर मोटर कस रहा था कि शाम के समय श्री एन.के. मदान आये और उससे रसीद मांगी चूकि रसीद घर पर रखी थी, इस कारण तत्काल नहीं दिखाई जा सकी । रसीद घर पर रखी होने की जानकारी देने पर भी श्री मदान नहीं माने और धमकी देकर दो हजार रूपये रिश्वत राशि की मांग करने लगे और नहीं देने पर थाने में बंद करने की धमकी दी । आवेदक ने एक हजार रूपये मौके पर श्री मदान को दे दिये । बाकी के एक हजार रूपये उसने कार्यालय मुरैना में आकर देने को कहा । श्री रामनाथ सिंह बघेल ने उक्त घटना की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में की । इस पर कार्रवाई करते हुये श्री मदान को रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों पकड लिया गया । 

 

अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती पर तत्कालीन अपर कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश

योजना समिति के निर्णयों के अमल में ढिलाई बर्दाश्‍त नहीं - प्रभारी मंत्री

 

तत्कालीन अपर कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश

 

जिला योजना समिति की बैठक सम्पन्न

मुरैना 21 जुलाई 2007

       आज यहाँ जिला कार्यालय के सभाकक्ष में सम्पन्न हुई जिला योजना समिति की बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री एवं स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री पारस जैन ने कहा कि जिला योजना समिति में लिए गए निर्णयों को विभागीय अधिकारी गंभीरता से लें और उन पर अमल भी करें । इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जायेगी । प्रभारी मंत्री ने इस कड़ी में तत्कालीन अपर कलेक्टर को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं । उल्लेखनीय है कि जिला योजना समिति की पूर्व में आयोजित हुई बैठक में जिले की विद्युत संबंधी समस्याओं की वस्तुस्थिति जानने के मकसद से एक जॉच समिति गठित की गई थी। जिला योजना समिति के तीन सदस्यों को शामिल कर बनाई गई इस समिति की बैठक आयोजित करने की जिम्मेदारी तत्कालीन अपर कलेक्टर को सौंपी गई थी, परन्तु उन्होंने इस समिति की न तो बैठक आहूत की और न ही समिति को जिले में भ्रमण कराने की कार्रवाई की ।

       आज यहाँ सम्पन्न हुई जिला योजना समिति की बैठक में विधायक सर्व श्री गजराज सिंह सिकरवार, मेहरबान सिंह रावत , बंशी लाल व श्रीमती संध्या राय, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री रघुराज सिंह कंषाना सहित समिति के अन्य सदस्यगण, पुलिस अधीक्षक डा. हरीसिंह यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सभाजीत यादव, अपर कलेक्टर श्री आशकृत तिवारी तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे ।

                    

       प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन ने पुलिस अधीक्षक से कहा कि विद्युत तार चोरी संबंधी वारदातों को रोकने के लिए सख्त कदम उठायें । साथ ही विद्युत चोरी संबंधी प्राथमिकी भी तत्परता से दर्ज कर पुलिस कार्रवाई आरंम्भ करायेेंं, जिससे विद्युत वितरण कम्पनी प्रक्रिया का पालन करते हुए नई विद्युत लाइन  बिछाने का काम कर सके । उन्होंने निर्धारित शिडयूल के अनुसार ग्रामीण अंचल की विद्युत सप्लाई बहाल रखने के निर्देश देते हुए कार्यपालन यंत्री विद्युत से कहा कि किसानों की विद्युत बिल संबंधी शिकायतों का निदान तत्परता से करें ।

       मुरैना अम्बाह बाई पास रोड के डाम्बरीकरण में हो रही देरी पर प्रभारी मंत्री ने खासी नाराजगी व्यक्त की । उन्होंने कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिये कि संबंधित ठेकेदार को ब्लेक लिस्टेड करने की कार्रवाई के साथ उसके अन्य कार्यों की जांच की जाये और उसकी रिपोर्ट भोपाल भेजें । प्रभारी मंत्री ने जल संरक्षण व संबर्धन संबंधी कार्यों को प्रमुखता देने पर जोर देते हुए सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने- अपने क्षेत्र के नदी- नालों पर स्टॉप डेम बनाने के प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजें ताकि नाबार्ड के माध्यम से इन्हें मंजूर कराया जा सके । गौरतलब है कि उक्त कार्यों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल एजेन्सी बनाया गया है ।

       पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के दौरान विभागीय कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिये कि वे हैण्ड पम्प खनन में स्थानीय विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दें । बैठक में जल संसाधन , महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई । प्रभारी मंत्री ने जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को महिला जागृति शिविरों के आयोजन संबंधी जानकारी जन प्रतिनिधियों को भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये ।

जन प्रतिनिधियों को मिले पूरा मिले सम्मान

जन प्रतिनिधियों को पूरा सम्मान देने के निर्देश देते हुए जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन ने विभागीय अधिकारियों को ताकीद दी कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम जनता के प्रतिनिधि को जन समस्यायें सामने लाने का पूरा हक है । अत: अधिकारी जन प्रतिनिधियों द्वारा बताई गईं समस्याओं को गंभीरता  से लें और उनका निदान भी करें । प्रभारी मंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप संबंधित विधायक की अध्यक्षता में विधानसभावार विकास कार्यों की समीक्षा बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाये ।  

सड़कों से प्रभावित किसानों को 15 अगस्त तक मुआवजा दिलायें -जैन

सुमावली विधान सभा क्षेत्र में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़कों के लिए किसानों के निजी खेतों से गड्डे खोदकर ली गई मिट्टी का मुआवजा  नहीं दिये जाने की बात जिला योजना समिति की बैठक में पता चलने पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की । उन्होंने बैठक में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के जिले के महाप्रबंधक को आगाह करते हुए हिदायत दी कि वे आगामी 15 अगस्त से पूर्व संबंधित किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें । बैठक में यह मुद्दा विधायक श्री गजराज सिंह सिकरवार तथा जिला योजना समिति के अन्य सदस्यों द्वारा प्रभारी मंत्री के ध्यान में लाया गया था ।

 

गुरुवार, जून 28, 2007

बुध की रात चम्‍बल में कोहराम मचाया बिजली ने

बुध की रात चम्‍बल में कोहराम मचाया बिजली ने

आधे शहर में ढाया गजब

मुरैना 28 जून । चम्‍बल वासीयों को तहॉं बिजली कटौती से सोमवार और मंगलवार को राहत रही, वहीं इन दोनों दिनों की राहत का हिसाब मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी ने इकठठे ही बुधवार की रात अघोषित अन्‍धाधुन्‍ध साढ़े चार घण्‍टे का ठोस ब्‍लैक आउट करके फिर उसके बाद लगभग सारी रात लो वोल्‍टेज यानि कुल मिलाकर 100 वोल्‍टस का वोल्‍टज देकर न केवल करिश्‍मा कर डाला बल्कि बिजली दे भी दी और नहीं भी दी । वाह रे पठठो वाह , शाबास क्‍या कहने ।

समाचार लिखे जाने यानि रात 3 बजे तक लो वोल्‍टेज सप्‍लाई चल रही है । उल्‍लेखनीय है कि बुधवार की रात 9 बजे से बन्‍द हुयी बिजली रात 1:30 बजे वापस आयी । मजे की बात यह रही कि केवल आधे शहर की ही बिजली बन्‍द की गयी और ऊपर से तुर्रा ये कि कुछ खास फेज सप्‍लाई पर ही डाउन वोल्‍टेज प्रदाय हुआ ।

जय भारत । जय लोक तंत्र । जय नकारा लोक सेवक ।।

 

सोमवार, जून 25, 2007

शनिवार को तीन और रविवार को पॉंच घण्‍टे गुल रही बिजली

शनिवार को तीन और रविवार को पॉंच घण्‍टे गुल रही बिजली

मुरैना 25 जून 2007 । चम्‍बल अंचल में हो रही धुंआधार और अघोषित बिजली कटौती के चलते शनिवार को तीन घण्‍टे और रविवार को पॉंच घण्‍टे बिजली गुल रही ।

 

शनिवार, जून 23, 2007

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

मुरैना । 23 जून 2007 । जैसा सदा से होता आया है , पुराना घिसा पिटा रिकार्ड जो बजता आया है फिर बज रहा है ।  चम्‍बल घाटी में बिजली कटौती ने अपने रंग दिखाने दोबारा चालू कर दिये हैं । मजे की बात यह है कि यह अघोषित होती है, चाहे जब आती है, चाहे जब आती है । आ आ कर जाती है तो कभी जा जा कर आती है ।

जहॉं इन दिनों लोगों की उमस भरी गर्मी से हालत पतली है, वहीं दनादन हो रही बिजली कटौती उस पर ''करेला नीम चढ़ा'' वाली उक्ति सार्थक कर रही है ।

कटौती का चम्‍बल अंचल में आलम इस कदर बदतर है । कि दिन तो दिन छोडि़ये हुजूर आजकल रात में भी बिजली बन्‍द रहती है ।

जहॉं चम्‍बल में पिछले चन्‍द महीनों और दिनों में लूट , डकैती , राहजनी और गोली मारने जैसी घटनाओं की अचानक बाढ़ आयी है वहीं रात को बिजली कटौती ने मानो अपराधीयों और बदमाशों को पूरी आजादी देकर पर लगा दिये हैं ।

मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी इन दिनों चोर उचक्‍कों और खासकर बदमाशों पर खासी मेहरबां है , उनके डयूटी कार्य में विघ्‍न न पहुँचे सो रात में बिजली बन्‍द कर खिदमत और मदद दोनों ही दोनों हाथ पलक पांवड़े बिछा कर, कर रही है ।

अभी दो रोज पूर्व भारत के प्रधान मंत्री ने ताला पारेषण प्रणाली पर अपने भाषण में ऐसी बिजली कटौती और कृत्रिम कमी पर खासा रोष व्‍यक्‍त किया था । इससे पहले चन्‍द रोज पूर्व ही बिजली कटौती कमी और लाइन लॉसेज तथा चोरी जैसे मामलों पर प्रदेशों के मुखियाओं की बैठक भी ली थी । मगर हालात सुधरने के बजाय उल्‍टे और बिगड़ गये ।

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने जहॉं सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में नयी सोच और नई ईजाद के जरिये न केवल अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि कई मामलों में तो इतिहास भी रचा है । और उन्‍हें ऐसे कामों के लिये याद भी रखा जायेगा । बिजली मामले में मुख्‍यमंत्री कई बार आश्‍वासन, उलाहना, और खोखला भरोसा भी देते रहते हैं, लेकिन यकीनन इस मोर्चे पर पस्‍त और परास्‍त ही रहे हैं ।

जहॉं एक जमाने में बिजली कटौती के चलते म.प्र. की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुखिया दिग्विजय सिंह कई नये व आधुनिक सोच के ऐतिहासिक काम करने के बावजूद लोगों की नजर में खलनायक बन गये थे और बिजली कटते ही प्रदेश के हर घर से आने वाली गालीयों और कोसने की बददुआओं से लिपट गये थे अंतत: उनके कई अच्‍छे और महत्‍वपूर्ण काम उनके काम नहीं आये । और न केवल सत्‍ता गंवा बैठे बल्कि आज तलक लोग नहीं चाहते कि भूल कर भी उनका नाम बतौर मुख्‍यमंत्री लिया जाये । यहॉं तक कि हालात ऐसे हैं कि अगर उन्‍हें अगले साल होने वाले चुनाव में भूल कर भी कांग्रेस मुख्‍यमंत्री प्रोजेक्‍ट करती है तो पहले से भड़की जनता और ज्‍यादा भड़क जायेगी और परिणाम क्‍या होगा किसी से छिपा नहीं है ।

इससे भी ज्‍यादा बुरा हाल उमा भारती का रहा है, जहॉं उमा ने चुनाव 2003 से पूर्व जनता को दिग्विजय सिंह का खलनायकी रूप दिखाने और गंदगी की डलिया पटकने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी वहीं दिग्विजय सिंह को ''मिस्‍टर बंटाढार'' जैसे टाइटल्‍स नवाज कर दिग्विजय का बंटाढार करने में कोई कसर बकाया नहीं रखी और पहले से ही तिलमिलाई जनता के घाव उमा ने चुनाव पूरे होने तक तरोताजा कर के रखे । नमक छिड़कते और कुरेदते रहने से जनता को लगा कि उमा डॉक्‍टर है शायद डेटॉल लगा कर अभी सफाई में लगी है और मुख्‍यमंत्री बनते ही दवाई लगा देगी और ठीक कर देगी ।

उमा ने कहा था कि मुख्‍यमंत्री बनते ही केवल एक महीने में बिजली कटौतरी बन्‍द करा दूंगी और प्रदेश कौ चौबीस घण्‍टे अबाध बिजली दूंगीं । उमा ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद इसमें थोड़ा संशोधन किया और तीन महीने की बात कह कर किसी राजनैतिक जॉंच आयोग के कार्यकाल की तरह खुद ही टाइम बढ़ा लिया । उसके बाद उन्‍होंने एक साल का एक्‍सटेंशन लिया फिर तीन साल का, वगैरह वगैरह । आखिर उमा भी लोगों की नजर से उतर गयीं ।

बाबू लाल गौर ही केवल एक ऐसे मुख्‍यमंत्री रहे जिसने करिश्‍माई तरीके से न केवल बिजली कटौती बन्‍द करवा दी बल्कि स्‍टेबल एण्‍ड एक्‍जेक्‍ट वोल्‍टेज देकर लोगों को चमत्‍कृत कर दिया था ।

हालांकि प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं , और वर्तमान हालातों में भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व शायद नहीं चाहेगा कि प्रदेश में बार बार नेतृत्‍व परिवर्तन कर छीछालेदर करवाई जाये और चालू गाड़ी की रिपेयरिंग और ठोकापीटी से ही काम लेना चाहेगा । ऐसे में बिजली एक आसन्‍न और विकट खतरा तो कम से कम है ही ।

हालांकि किसी चुनाव को कई स्‍थानीय और कई सार्वत्रिक एवं प्रादेशिक कारक प्रभावित करते हैं तथा कई और भी वजह रहतीं हैं , केवल बिजली ही प्रधान और एकमात्र कारक नहीं होती यह तो सत्‍य है लेकिन प्रधान कारकों के प्रधान तत्‍वों में से एक है , यह तथ्‍य भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

शुतुर्मुर्ग यदि रेत में सिर छिपा कर अपनी समस्‍याओं का अंत मान ले तो इसमें समस्‍याओं का क्‍या दोष है ।

फिलवक्‍त तो खबर ये है कि आज रात दो बजे तक यानि शुक्रवार और शनिवार के दरम्‍यानी रात तक चली बिजली कटौती ने अंचल को हिला दिया है ।

कटौती के पीठे बदमाशी चाहे ऊपर के स्‍तर से हो रही हो चाहे स्‍थानीय स्‍तर पर पिस तो जनता ही रही है । अभी जनता फिर सरकार । यानि खरबूजे की नियति है कटते रहना और चाकू की नियति है काटते रहना । मगर जो हाथ इस चाकू के पीछे हैं उनका जिक्रे आम कभी नहीं होता ।

 

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

मुरैना । 23 जून 2007 । जैसा सदा से होता आया है , पुराना घिसा पिटा रिकार्ड जो बजता आया है फिर बज रहा है ।  चम्‍बल घाटी में बिजली कटौती ने अपने रंग दिखाने दोबारा चालू कर दिये हैं । मजे की बात यह है कि यह अघोषित होती है, चाहे जब आती है, चाहे जब आती है । आ आ कर जाती है तो कभी जा जा कर आती है ।

जहॉं इन दिनों लोगों की उमस भरी गर्मी से हालत पतली है, वहीं दनादन हो रही बिजली कटौती उस पर ''करेला नीम चढ़ा'' वाली उक्ति सार्थक कर रही है ।

कटौती का चम्‍बल अंचल में आलम इस कदर बदतर है । कि दिन तो दिन छोडि़ये हुजूर आजकल रात में भी बिजली बन्‍द रहती है ।

जहॉं चम्‍बल में पिछले चन्‍द महीनों और दिनों में लूट , डकैती , राहजनी और गोली मारने जैसी घटनाओं की अचानक बाढ़ आयी है वहीं रात को बिजली कटौती ने मानो अपराधीयों और बदमाशों को पूरी आजादी देकर पर लगा दिये हैं ।

मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी इन दिनों चोर उचक्‍कों और खासकर बदमाशों पर खासी मेहरबां है , उनके डयूटी कार्य में विघ्‍न न पहुँचे सो रात में बिजली बन्‍द कर खिदमत और मदद दोनों ही दोनों हाथ पलक पांवड़े बिछा कर, कर रही है ।

अभी दो रोज पूर्व भारत के प्रधान मंत्री ने ताला पारेषण प्रणाली पर अपने भाषण में ऐसी बिजली कटौती और कृत्रिम कमी पर खासा रोष व्‍यक्‍त किया था । इससे पहले चन्‍द रोज पूर्व ही बिजली कटौती कमी और लाइन लॉसेज तथा चोरी जैसे मामलों पर प्रदेशों के मुखियाओं की बैठक भी ली थी । मगर हालात सुधरने के बजाय उल्‍टे और बिगड़ गये ।

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने जहॉं सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में नयी सोच और नई ईजाद के जरिये न केवल अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि कई मामलों में तो इतिहास भी रचा है । और उन्‍हें ऐसे कामों के लिये याद भी रखा जायेगा । बिजली मामले में मुख्‍यमंत्री कई बार आश्‍वासन, उलाहना, और खोखला भरोसा भी देते रहते हैं, लेकिन यकीनन इस मोर्चे पर पस्‍त और परास्‍त ही रहे हैं ।

जहॉं एक जमाने में बिजली कटौती के चलते म.प्र. की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुखिया दिग्विजय सिंह कई नये व आधुनिक सोच के ऐतिहासिक काम करने के बावजूद लोगों की नजर में खलनायक बन गये थे और बिजली कटते ही प्रदेश के हर घर से आने वाली गालीयों और कोसने की बददुआओं से लिपट गये थे अंतत: उनके कई अच्‍छे और महत्‍वपूर्ण काम उनके काम नहीं आये । और न केवल सत्‍ता गंवा बैठे बल्कि आज तलक लोग नहीं चाहते कि भूल कर भी उनका नाम बतौर मुख्‍यमंत्री लिया जाये । यहॉं तक कि हालात ऐसे हैं कि अगर उन्‍हें अगले साल होने वाले चुनाव में भूल कर भी कांग्रेस मुख्‍यमंत्री प्रोजेक्‍ट करती है तो पहले से भड़की जनता और ज्‍यादा भड़क जायेगी और परिणाम क्‍या होगा किसी से छिपा नहीं है ।

इससे भी ज्‍यादा बुरा हाल उमा भारती का रहा है, जहॉं उमा ने चुनाव 2003 से पूर्व जनता को दिग्विजय सिंह का खलनायकी रूप दिखाने और गंदगी की डलिया पटकने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी वहीं दिग्विजय सिंह को ''मिस्‍टर बंटाढार'' जैसे टाइटल्‍स नवाज कर दिग्विजय का बंटाढार करने में कोई कसर बकाया नहीं रखी और पहले से ही तिलमिलाई जनता के घाव उमा ने चुनाव पूरे होने तक तरोताजा कर के रखे । नमक छिड़कते और कुरेदते रहने से जनता को लगा कि उमा डॉक्‍टर है शायद डेटॉल लगा कर अभी सफाई में लगी है और मुख्‍यमंत्री बनते ही दवाई लगा देगी और ठीक कर देगी ।

उमा ने कहा था कि मुख्‍यमंत्री बनते ही केवल एक महीने में बिजली कटौतरी बन्‍द करा दूंगी और प्रदेश कौ चौबीस घण्‍टे अबाध बिजली दूंगीं । उमा ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद इसमें थोड़ा संशोधन किया और तीन महीने की बात कह कर किसी राजनैतिक जॉंच आयोग के कार्यकाल की तरह खुद ही टाइम बढ़ा लिया । उसके बाद उन्‍होंने एक साल का एक्‍सटेंशन लिया फिर तीन साल का, वगैरह वगैरह । आखिर उमा भी लोगों की नजर से उतर गयीं ।

बाबू लाल गौर ही केवल एक ऐसे मुख्‍यमंत्री रहे जिसने करिश्‍माई तरीके से न केवल बिजली कटौती बन्‍द करवा दी बल्कि स्‍टेबल एण्‍ड एक्‍जेक्‍ट वोल्‍टेज देकर लोगों को चमत्‍कृत कर दिया था ।

हालांकि प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं , और वर्तमान हालातों में भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व शायद नहीं चाहेगा कि प्रदेश में बार बार नेतृत्‍व परिवर्तन कर छीछालेदर करवाई जाये और चालू गाड़ी की रिपेयरिंग और ठोकापीटी से ही काम लेना चाहेगा । ऐसे में बिजली एक आसन्‍न और विकट खतरा तो कम से कम है ही ।

हालांकि किसी चुनाव को कई स्‍थानीय और कई सार्वत्रिक एवं प्रादेशिक कारक प्रभावित करते हैं तथा कई और भी वजह रहतीं हैं , केवल बिजली ही प्रधान और एकमात्र कारक नहीं होती यह तो सत्‍य है लेकिन प्रधान कारकों के प्रधान तत्‍वों में से एक है , यह तथ्‍य भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

शुतुर्मुर्ग यदि रेत में सिर छिपा कर अपनी समस्‍याओं का अंत मान ले तो इसमें समस्‍याओं का क्‍या दोष है ।

फिलवक्‍त तो खबर ये है कि आज रात दो बजे तक यानि शुक्रवार और शनिवार के दरम्‍यानी रात तक चली बिजली कटौती ने अंचल को हिला दिया है ।

कटौती के पीठे बदमाशी चाहे ऊपर के स्‍तर से हो रही हो चाहे स्‍थानीय स्‍तर पर पिस तो जनता ही रही है । अभी जनता फिर सरकार । यानि खरबूजे की नियति है कटते रहना और चाकू की नियति है काटते रहना । मगर जो हाथ इस चाकू के पीछे हैं उनका जिक्रे आम कभी नहीं होता ।