गुरुवार, मई 15, 2008

विद्युत चोरी करने पर एक वर्ष की सजा एवं 20 हजार रूपये का अर्थदण्ड

विद्युत चोरी करने पर एक वर्ष की सजा एवं 20 हजार रूपये का अर्थदण्ड

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पन्ना 14 मई- विद्युत चोरी की रोकथाम हेतु चलाए गए विशेष अभियानान्तर्गत कार्यपालन यंत्री सतर्कता श्री डी0के0 गौतम द्वारा ग्रामीण क्षेत्र पन्ना के ग्राम मनौर में संचालित यादव ढावा का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण्ा के दौरान यादव ढावा में श्रीमती राजकुमार यादव पत्नी श्री रतनसिंह को ढावा परिसर के पीछे से जा रही एल0टी0 लाईन से सीधे तार जोडकर विद्युत चोरी करते पाया गया, जिसके विरूद्व परिपत्र तैयार कर परिवाद पत्र विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा अभियुक्त श्रीमती राजकुमारी यादव को विद्युत चोरी करने का दोषी पाते हुए एक वर्ष की सजा एवं 20 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किए जाने का आदेश पारित किया गया।

 

शीघ्र बहाल होगी अम्बाह की विद्युत व्यवस्था ऑधी तूफान ने ढाया कहर, चोरों ने चुराये ऐंगल्‍स, कलपुर्जे और तार

शीघ्र बहाल होगी अम्बाह की विद्युत व्यवस्था

ऑधी तूफान ने ढाया कहर, चोरों ने चुराये ऐंगल्‍स, कलपुर्जे और तार

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कम्पनी के कार्यपालन यंत्री मुरैना जे.के.एस. राठौर के अनुसार  आंधी और तूफान के कारण ध्वस्त अम्बाह की विद्युत व्यवस्था की शीघ्र बहाली के लिए द्रुत गति से कार्य कराया जा रहा है । नागरिक इस संकट की कड़ी में धैर्य से काम लें और शांति का परिचय दें ।

कार्यपालन यंत्री ने बताया कि सोमबार को रात आये आंधी तूफान के कारण अम्बाह के पाय का पुरा और अजुद्दी का पुरा के पास स्थापित तीन टॉवर ध्वस्त हो गये । विद्युत अधिकारियों द्वारा कराये गये सर्वे में पाया गया कि अकेले आंधी - तूफान के कारण ही ये टॉवर नहीं गिरे हैं, बल्कि इनके ऐंगिल और कल पुर्जो की चोरी हो जाने के कारण कमजोर हो जाने से ये हवा का बेग नहीं सह सकें । इनके गिर जाने से सात विद्युत उपकेन्द्र बंद हो गये हैं और अम्बाह क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति ठप्प हो गई हे । नागरिकों को पानी आदि की पूर्ति के लिए पोरसा से विद्युत आपूर्ति की बैकल्पिक व्यवस्था की गई है । ध्वस्त तीनों टॉवरों को सुधारने का कार्य द्रुत गति से जारी है और आशा है कि चार दिन में ये टॉवर कार्य करना शुरू कर देंगे ।

 

बुधवार, अप्रैल 30, 2008

राज्‍य सरकार का तर्कशास्‍त्र - प्रदेश में कम बिजली की वजह केन्द्र को बताई हकीकत

राज्‍य सरकार का तर्कशास्‍त्र - प्रदेश में कम बिजली की वजह केन्द्र को बताई हकीकत

योगेश शर्मा

राज्य सरकार अपनी हरसंभव कोशिश से प्रदेश में बिजली के इंतजाम को लेकर मुस्तैद है। हर जरूरी उपाय करने में कोई ढिलाई नहीं की गई है, लेकिन बावजूद इसके बिजली की मौजूदा कमी के पीछे ऐसे कारण हैं जिनकी अनदेखी नहीं हो सकती। केन्द्र के समक्ष ऐसी ही वास्तविकताओं को उजागर कर बिजली मुहैया कराने की लगातार पैरवी की जा रही है।

ऊर्जा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्र का ध्यान 210 मेगावॉट क्षमता की अमरकंटक ताप विद्युत विस्तार इकाई के शुरू होने में देरी की ओर आकृष्ट किया गया है। यह सच्चाई बताई गई है कि मैसर्स बी.एच.ई.एल. के जरिए किए जाने वाले इस काम को 28 फरवरी 2007 तक पूरा हो जाना था। इसकी धीमी रफ्तार के चलते यह इकाई अब तक काम शुरू नहीं कर सकी है। अब आयल फायरिंग के जरिए इसके मई 2008 के अंत तक शुरू करने की संभावना बताई गई है। सच्चाई यह है कि अब तक इस इकाई में हुए काम की रफ्तार के मद्देनज़र इसका मई तक पूरा होना संभव नहीं जान पड़ता और ऐसे में यह अपनी पूरी क्षमता में सितंबर-अक्टूबर, 2008 के पूर्व शायद ही काम कर सके।

केन्द्र के समक्ष यह तथ्य भी उजागर किया गया है कि बी.एच.ई.एल. द्वारा 500 मेगावॉट क्षमता वाली बिरसिंहपुर ताप विद्युत विस्तार इकाई क्रमांक-5 के काम में भी देरी की गई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि 10वीं पंचवर्षीय योजना के तहत कायम होने वाली इस इकाई को तो सितंबर 2006 तक काम शुरू कर देना था। बेवजह की देरी के चलते यह इकाई 2007 में क्रियाशील तो हुई, लेकिन इसमें ई.एस.पी., फेन्स और अन्य तकनीकी कार्यों को अधूरा छोड़ दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ है कि वर्तमान में इससे 500 की बजाय केवल 300 मेगावॉट उत्पादन ही हो पा रहा है। इसी इकाई की दूसरी सच्चाई यह भी है कि इसमें इस्तेमाल किये गये कम गुणवत्ता के सामान की वजह से यह बार-बार बंद हो रही है। भीषण गर्मी में विद्युत कटौती करना इन हालात में मजबूरी है।

केन्द्र को इस सच्चाई से भी रूबरू कराया गया है कि वर्ष 2004 में प्रदेश को पूर्वी क्षेत्र के अनावंटित कोटे से 350 मेगावॉट बिजली आवंटित की गई थी। बाद में इसे क्रमश: कम करते हुए केवल 46 मेगावॉट कर दिया गया। दिसंबर 2007 में तो केन्द्रीय बिजली मंत्रालय ने हद करते हुए इस कोटे को और घटाकर केवल 31 मेगावॉट कर दिया। दु:खद पहलू यह है कि पूर्व के आवंटन को बहाल करने के लिये केन्द्र से लगातार आग्रह किया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई वहां से नहीं की जा सकी है।

 

सोमवार, अप्रैल 07, 2008

विद्युत राक्षस का माता के भक्‍तों पर हमला, लाखों चपेट में, राज्‍य संकट में

न नहाना ना धोना, मगन रहना, पूजो माता, बिजली पानी बिना, हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को राज्‍य सरकार का तोहफा

विद्युत राक्षस का माता के भक्‍तों पर हमला, लाखों चपेट में, राज्‍य संकट में या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

मुरैना 7 अप्रेल 08, राज्‍य सरकार ने चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को तोहफा देते हुये सोमवार को सबेरे बिजली काट कर न केवल हिन्‍दूओं को ही उपकृत कर दिया बल्कि माता के भक्‍तों को बिना नहाये धोये और बिना जल भरे खाली कलशों के साथ माता की पूजा के लिये भी विवश कर दिया ।

उल्‍लेखनीय है कि कल रविवार से नवरात्र महोत्‍सव प्रारंभ हो चुका है और माता की प्रतिष्‍ठा स्‍थापना के साथ ही जवारे बो कर तथा जल घट स्‍थापना आदि करके, नियमित रूप से स्‍नान आदि से निवृत्‍त हो माला को जल स्‍नान, जल अर्पण एवं तर्पण आदि कर्म करते हैं । इसके साथ ही नौ रात्रि तक माता का निरन्‍तर जप अनुष्‍ठान, भजन पूजन आदि नियमित रूप से किया जाता है ।

अधिकांश लोगों द्वारा रविवार को ही माता की प्रतिष्‍ठा कर अर्चना अनुष्‍ठान प्रारंभ कर दिया गया था, कुछ लोग कतिपय समाचारपत्रीय भ्रम स्‍थापना के कारण इसका प्रारंभ आज सोमवार से कर रहे थे ।

खैर जो भी हो आज की बिजली दुर्गत सुबह सात बज कार 17 मिनिट से शुरू हुयी यानि सबेरे कटी बिजली ने अभी समाचार लिखे जाने के वक्‍त तक कुछ ऐसा कोहराम मचाया कि अब इसे ''विद्युत राक्षस'' की संज्ञा दी जाये तो कुछ भी अनुचित नहीं होगा ।

कुल मिला कर समाचार लिखे जाने और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त तक बिजली बन्‍द थी, हॉं हर एक या दो घण्‍टे बाद जरूर महज 3 या 4 मिनिट के लिये अपनी झलक दिखलाती रही । यानि यूजलेस बिजली, बट बिजली वाज अवेलेबल, अब 3 या 4 मिनिट को आने वाली बिजली का कब कैसा कितना इस्‍तेमाल कर सकते हो कर लो बेटा, पूज लो माता, दे दिया राज्‍य सरकार ने नवसंवत्‍सर को तोहफा । यानि पहले ही दिन मस्‍त व शुभ आरम्‍भ । जय माता की ।।

''दुर्गा दुर्गत दूर कर '' यह पुराना भजन है, बत्‍तीस नाम माला में भी यह उल्‍लेखित है । केवल सिद्ध कुंजिका में संशोधन कर लिया जायेगा तो बात कुछ यूं बनेगी कि ''देवी के लिये ''विद्युत राक्षस'' का संहार परम अनिवार्य हो जायेगा ।

केन्‍द्र सरकार ने हिन्‍दू नव संवत्‍सर पर, सिंधिया जी को अंचल में मंत्री के रूप में जहॉं एक तोहफा दिया वहीं राज्‍य सरकार का तोहफा भी अंचल में खूब सराहा गया ।

जय भवानी, या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

न नहाना ना धोना, मगन रहना, पूजो माता, बिजली पानी बिना, हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को राज्‍य सरकार का तोहफा

न नहाना ना धोना, मगन रहना, पूजो माता, बिजली पानी बिना, हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को राज्‍य सरकार का तोहफा

विद्युत राक्षस का माता के भक्‍तों पर हमला, लाखों चपेट में, राज्‍य संकट में या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

मुरैना 7 अप्रेल 08, राज्‍य सरकार ने चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को तोहफा देते हुये सोमवार को सबेरे बिजली काट कर न केवल हिन्‍दूओं को ही उपकृत कर दिया बल्कि माता के भक्‍तों को बिना नहाये धोये और बिना जल भरे खाली कलशों के साथ माता की पूजा के लिये भी विवश कर दिया ।

उल्‍लेखनीय है कि कल रविवार से नवरात्र महोत्‍सव प्रारंभ हो चुका है और माता की प्रतिष्‍ठा स्‍थापना के साथ ही जवारे बो कर तथा जल घट स्‍थापना आदि करके, नियमित रूप से स्‍नान आदि से निवृत्‍त हो माला को जल स्‍नान, जल अर्पण एवं तर्पण आदि कर्म करते हैं । इसके साथ ही नौ रात्रि तक माता का निरन्‍तर जप अनुष्‍ठान, भजन पूजन आदि नियमित रूप से किया जाता है ।

अधिकांश लोगों द्वारा रविवार को ही माता की प्रतिष्‍ठा कर अर्चना अनुष्‍ठान प्रारंभ कर दिया गया था, कुछ लोग कतिपय समाचारपत्रीय भ्रम स्‍थापना के कारण इसका प्रारंभ आज सोमवार से कर रहे थे ।

खैर जो भी हो आज की बिजली दुर्गत सुबह सात बज कार 17 मिनिट से शुरू हुयी यानि सबेरे कटी बिजली ने अभी समाचार लिखे जाने के वक्‍त तक कुछ ऐसा कोहराम मचाया कि अब इसे ''विद्युत राक्षस'' की संज्ञा दी जाये तो कुछ भी अनुचित नहीं होगा ।

कुल मिला कर समाचार लिखे जाने और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त तक बिजली बन्‍द थी, हॉं हर एक या दो घण्‍टे बाद जरूर महज 3 या 4 मिनिट के लिये अपनी झलक दिखलाती रही । यानि यूजलेस बिजली, बट बिजली वाज अवेलेबल, अब 3 या 4 मिनिट को आने वाली बिजली का कब कैसा कितना इस्‍तेमाल कर सकते हो कर लो बेटा, पूज लो माता, दे दिया राज्‍य सरकार ने नवसंवत्‍सर को तोहफा । यानि पहले ही दिन मस्‍त व शुभ आरम्‍भ । जय माता की ।।

''दुर्गा दुर्गत दूर कर '' यह पुराना भजन है, बत्‍तीस नाम माला में भी यह उल्‍लेखित है । केवल सिद्ध कुंजिका में संशोधन कर लिया जायेगा तो बात कुछ यूं बनेगी कि ''देवी के लिये ''विद्युत राक्षस'' का संहार परम अनिवार्य हो जायेगा ।

केन्‍द्र सरकार ने हिन्‍दू नव संवत्‍सर पर, सिंधिया जी को अंचल में मंत्री के रूप में जहॉं एक तोहफा दिया वहीं राज्‍य सरकार का तोहफा भी अंचल में खूब सराहा गया ।

जय भवानी, या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

सोमवार, मार्च 31, 2008

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

अतर सिंह डण्‍डोतिया (तहसील संवाददाता)

मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्‍या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्‍होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्‍ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्‍थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्‍टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्‍टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्‍छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है ।   

दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्‍स पता होते थे, और लोगों को अच्‍छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्‍ा गर्मी व मच्‍छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्‍द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्‍हें अपदस्‍थ कर दिया था ।

आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्‍यादा है ।

वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्‍टलों मच्‍छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्‍ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्‍यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्‍द करने के वायदे और सत्‍ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्‍टे अबाध सप्‍लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।            

 

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

अतर सिंह डण्‍डोतिया (तहसील संवाददाता)

मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्‍या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्‍होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्‍ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्‍थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्‍टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्‍टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्‍छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है ।   

दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्‍स पता होते थे, और लोगों को अच्‍छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्‍ा गर्मी व मच्‍छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्‍द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्‍हें अपदस्‍थ कर दिया था ।

आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्‍यादा है ।

वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्‍टलों मच्‍छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्‍ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्‍यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्‍द करने के वायदे और सत्‍ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्‍टे अबाध सप्‍लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।