गुरुवार, जून 28, 2007

बुध की रात चम्‍बल में कोहराम मचाया बिजली ने

बुध की रात चम्‍बल में कोहराम मचाया बिजली ने

आधे शहर में ढाया गजब

मुरैना 28 जून । चम्‍बल वासीयों को तहॉं बिजली कटौती से सोमवार और मंगलवार को राहत रही, वहीं इन दोनों दिनों की राहत का हिसाब मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी ने इकठठे ही बुधवार की रात अघोषित अन्‍धाधुन्‍ध साढ़े चार घण्‍टे का ठोस ब्‍लैक आउट करके फिर उसके बाद लगभग सारी रात लो वोल्‍टेज यानि कुल मिलाकर 100 वोल्‍टस का वोल्‍टज देकर न केवल करिश्‍मा कर डाला बल्कि बिजली दे भी दी और नहीं भी दी । वाह रे पठठो वाह , शाबास क्‍या कहने ।

समाचार लिखे जाने यानि रात 3 बजे तक लो वोल्‍टेज सप्‍लाई चल रही है । उल्‍लेखनीय है कि बुधवार की रात 9 बजे से बन्‍द हुयी बिजली रात 1:30 बजे वापस आयी । मजे की बात यह रही कि केवल आधे शहर की ही बिजली बन्‍द की गयी और ऊपर से तुर्रा ये कि कुछ खास फेज सप्‍लाई पर ही डाउन वोल्‍टेज प्रदाय हुआ ।

जय भारत । जय लोक तंत्र । जय नकारा लोक सेवक ।।

 

सोमवार, जून 25, 2007

शनिवार को तीन और रविवार को पॉंच घण्‍टे गुल रही बिजली

शनिवार को तीन और रविवार को पॉंच घण्‍टे गुल रही बिजली

मुरैना 25 जून 2007 । चम्‍बल अंचल में हो रही धुंआधार और अघोषित बिजली कटौती के चलते शनिवार को तीन घण्‍टे और रविवार को पॉंच घण्‍टे बिजली गुल रही ।

 

शनिवार, जून 23, 2007

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

मुरैना । 23 जून 2007 । जैसा सदा से होता आया है , पुराना घिसा पिटा रिकार्ड जो बजता आया है फिर बज रहा है ।  चम्‍बल घाटी में बिजली कटौती ने अपने रंग दिखाने दोबारा चालू कर दिये हैं । मजे की बात यह है कि यह अघोषित होती है, चाहे जब आती है, चाहे जब आती है । आ आ कर जाती है तो कभी जा जा कर आती है ।

जहॉं इन दिनों लोगों की उमस भरी गर्मी से हालत पतली है, वहीं दनादन हो रही बिजली कटौती उस पर ''करेला नीम चढ़ा'' वाली उक्ति सार्थक कर रही है ।

कटौती का चम्‍बल अंचल में आलम इस कदर बदतर है । कि दिन तो दिन छोडि़ये हुजूर आजकल रात में भी बिजली बन्‍द रहती है ।

जहॉं चम्‍बल में पिछले चन्‍द महीनों और दिनों में लूट , डकैती , राहजनी और गोली मारने जैसी घटनाओं की अचानक बाढ़ आयी है वहीं रात को बिजली कटौती ने मानो अपराधीयों और बदमाशों को पूरी आजादी देकर पर लगा दिये हैं ।

मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी इन दिनों चोर उचक्‍कों और खासकर बदमाशों पर खासी मेहरबां है , उनके डयूटी कार्य में विघ्‍न न पहुँचे सो रात में बिजली बन्‍द कर खिदमत और मदद दोनों ही दोनों हाथ पलक पांवड़े बिछा कर, कर रही है ।

अभी दो रोज पूर्व भारत के प्रधान मंत्री ने ताला पारेषण प्रणाली पर अपने भाषण में ऐसी बिजली कटौती और कृत्रिम कमी पर खासा रोष व्‍यक्‍त किया था । इससे पहले चन्‍द रोज पूर्व ही बिजली कटौती कमी और लाइन लॉसेज तथा चोरी जैसे मामलों पर प्रदेशों के मुखियाओं की बैठक भी ली थी । मगर हालात सुधरने के बजाय उल्‍टे और बिगड़ गये ।

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने जहॉं सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में नयी सोच और नई ईजाद के जरिये न केवल अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि कई मामलों में तो इतिहास भी रचा है । और उन्‍हें ऐसे कामों के लिये याद भी रखा जायेगा । बिजली मामले में मुख्‍यमंत्री कई बार आश्‍वासन, उलाहना, और खोखला भरोसा भी देते रहते हैं, लेकिन यकीनन इस मोर्चे पर पस्‍त और परास्‍त ही रहे हैं ।

जहॉं एक जमाने में बिजली कटौती के चलते म.प्र. की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुखिया दिग्विजय सिंह कई नये व आधुनिक सोच के ऐतिहासिक काम करने के बावजूद लोगों की नजर में खलनायक बन गये थे और बिजली कटते ही प्रदेश के हर घर से आने वाली गालीयों और कोसने की बददुआओं से लिपट गये थे अंतत: उनके कई अच्‍छे और महत्‍वपूर्ण काम उनके काम नहीं आये । और न केवल सत्‍ता गंवा बैठे बल्कि आज तलक लोग नहीं चाहते कि भूल कर भी उनका नाम बतौर मुख्‍यमंत्री लिया जाये । यहॉं तक कि हालात ऐसे हैं कि अगर उन्‍हें अगले साल होने वाले चुनाव में भूल कर भी कांग्रेस मुख्‍यमंत्री प्रोजेक्‍ट करती है तो पहले से भड़की जनता और ज्‍यादा भड़क जायेगी और परिणाम क्‍या होगा किसी से छिपा नहीं है ।

इससे भी ज्‍यादा बुरा हाल उमा भारती का रहा है, जहॉं उमा ने चुनाव 2003 से पूर्व जनता को दिग्विजय सिंह का खलनायकी रूप दिखाने और गंदगी की डलिया पटकने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी वहीं दिग्विजय सिंह को ''मिस्‍टर बंटाढार'' जैसे टाइटल्‍स नवाज कर दिग्विजय का बंटाढार करने में कोई कसर बकाया नहीं रखी और पहले से ही तिलमिलाई जनता के घाव उमा ने चुनाव पूरे होने तक तरोताजा कर के रखे । नमक छिड़कते और कुरेदते रहने से जनता को लगा कि उमा डॉक्‍टर है शायद डेटॉल लगा कर अभी सफाई में लगी है और मुख्‍यमंत्री बनते ही दवाई लगा देगी और ठीक कर देगी ।

उमा ने कहा था कि मुख्‍यमंत्री बनते ही केवल एक महीने में बिजली कटौतरी बन्‍द करा दूंगी और प्रदेश कौ चौबीस घण्‍टे अबाध बिजली दूंगीं । उमा ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद इसमें थोड़ा संशोधन किया और तीन महीने की बात कह कर किसी राजनैतिक जॉंच आयोग के कार्यकाल की तरह खुद ही टाइम बढ़ा लिया । उसके बाद उन्‍होंने एक साल का एक्‍सटेंशन लिया फिर तीन साल का, वगैरह वगैरह । आखिर उमा भी लोगों की नजर से उतर गयीं ।

बाबू लाल गौर ही केवल एक ऐसे मुख्‍यमंत्री रहे जिसने करिश्‍माई तरीके से न केवल बिजली कटौती बन्‍द करवा दी बल्कि स्‍टेबल एण्‍ड एक्‍जेक्‍ट वोल्‍टेज देकर लोगों को चमत्‍कृत कर दिया था ।

हालांकि प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं , और वर्तमान हालातों में भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व शायद नहीं चाहेगा कि प्रदेश में बार बार नेतृत्‍व परिवर्तन कर छीछालेदर करवाई जाये और चालू गाड़ी की रिपेयरिंग और ठोकापीटी से ही काम लेना चाहेगा । ऐसे में बिजली एक आसन्‍न और विकट खतरा तो कम से कम है ही ।

हालांकि किसी चुनाव को कई स्‍थानीय और कई सार्वत्रिक एवं प्रादेशिक कारक प्रभावित करते हैं तथा कई और भी वजह रहतीं हैं , केवल बिजली ही प्रधान और एकमात्र कारक नहीं होती यह तो सत्‍य है लेकिन प्रधान कारकों के प्रधान तत्‍वों में से एक है , यह तथ्‍य भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

शुतुर्मुर्ग यदि रेत में सिर छिपा कर अपनी समस्‍याओं का अंत मान ले तो इसमें समस्‍याओं का क्‍या दोष है ।

फिलवक्‍त तो खबर ये है कि आज रात दो बजे तक यानि शुक्रवार और शनिवार के दरम्‍यानी रात तक चली बिजली कटौती ने अंचल को हिला दिया है ।

कटौती के पीठे बदमाशी चाहे ऊपर के स्‍तर से हो रही हो चाहे स्‍थानीय स्‍तर पर पिस तो जनता ही रही है । अभी जनता फिर सरकार । यानि खरबूजे की नियति है कटते रहना और चाकू की नियति है काटते रहना । मगर जो हाथ इस चाकू के पीछे हैं उनका जिक्रे आम कभी नहीं होता ।

 

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

बुध को पॉंच,गुरू को सात और शुक्रवार को साढ़े आठ घण्‍टे कटी बिजली

अघोषित कटौती से अंचल में मची त्राहि त्राहि , रात को भी नहीं बख्‍शा पठठों ने

मुरैना । 23 जून 2007 । जैसा सदा से होता आया है , पुराना घिसा पिटा रिकार्ड जो बजता आया है फिर बज रहा है ।  चम्‍बल घाटी में बिजली कटौती ने अपने रंग दिखाने दोबारा चालू कर दिये हैं । मजे की बात यह है कि यह अघोषित होती है, चाहे जब आती है, चाहे जब आती है । आ आ कर जाती है तो कभी जा जा कर आती है ।

जहॉं इन दिनों लोगों की उमस भरी गर्मी से हालत पतली है, वहीं दनादन हो रही बिजली कटौती उस पर ''करेला नीम चढ़ा'' वाली उक्ति सार्थक कर रही है ।

कटौती का चम्‍बल अंचल में आलम इस कदर बदतर है । कि दिन तो दिन छोडि़ये हुजूर आजकल रात में भी बिजली बन्‍द रहती है ।

जहॉं चम्‍बल में पिछले चन्‍द महीनों और दिनों में लूट , डकैती , राहजनी और गोली मारने जैसी घटनाओं की अचानक बाढ़ आयी है वहीं रात को बिजली कटौती ने मानो अपराधीयों और बदमाशों को पूरी आजादी देकर पर लगा दिये हैं ।

मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी इन दिनों चोर उचक्‍कों और खासकर बदमाशों पर खासी मेहरबां है , उनके डयूटी कार्य में विघ्‍न न पहुँचे सो रात में बिजली बन्‍द कर खिदमत और मदद दोनों ही दोनों हाथ पलक पांवड़े बिछा कर, कर रही है ।

अभी दो रोज पूर्व भारत के प्रधान मंत्री ने ताला पारेषण प्रणाली पर अपने भाषण में ऐसी बिजली कटौती और कृत्रिम कमी पर खासा रोष व्‍यक्‍त किया था । इससे पहले चन्‍द रोज पूर्व ही बिजली कटौती कमी और लाइन लॉसेज तथा चोरी जैसे मामलों पर प्रदेशों के मुखियाओं की बैठक भी ली थी । मगर हालात सुधरने के बजाय उल्‍टे और बिगड़ गये ।

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने जहॉं सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में नयी सोच और नई ईजाद के जरिये न केवल अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि कई मामलों में तो इतिहास भी रचा है । और उन्‍हें ऐसे कामों के लिये याद भी रखा जायेगा । बिजली मामले में मुख्‍यमंत्री कई बार आश्‍वासन, उलाहना, और खोखला भरोसा भी देते रहते हैं, लेकिन यकीनन इस मोर्चे पर पस्‍त और परास्‍त ही रहे हैं ।

जहॉं एक जमाने में बिजली कटौती के चलते म.प्र. की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुखिया दिग्विजय सिंह कई नये व आधुनिक सोच के ऐतिहासिक काम करने के बावजूद लोगों की नजर में खलनायक बन गये थे और बिजली कटते ही प्रदेश के हर घर से आने वाली गालीयों और कोसने की बददुआओं से लिपट गये थे अंतत: उनके कई अच्‍छे और महत्‍वपूर्ण काम उनके काम नहीं आये । और न केवल सत्‍ता गंवा बैठे बल्कि आज तलक लोग नहीं चाहते कि भूल कर भी उनका नाम बतौर मुख्‍यमंत्री लिया जाये । यहॉं तक कि हालात ऐसे हैं कि अगर उन्‍हें अगले साल होने वाले चुनाव में भूल कर भी कांग्रेस मुख्‍यमंत्री प्रोजेक्‍ट करती है तो पहले से भड़की जनता और ज्‍यादा भड़क जायेगी और परिणाम क्‍या होगा किसी से छिपा नहीं है ।

इससे भी ज्‍यादा बुरा हाल उमा भारती का रहा है, जहॉं उमा ने चुनाव 2003 से पूर्व जनता को दिग्विजय सिंह का खलनायकी रूप दिखाने और गंदगी की डलिया पटकने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी वहीं दिग्विजय सिंह को ''मिस्‍टर बंटाढार'' जैसे टाइटल्‍स नवाज कर दिग्विजय का बंटाढार करने में कोई कसर बकाया नहीं रखी और पहले से ही तिलमिलाई जनता के घाव उमा ने चुनाव पूरे होने तक तरोताजा कर के रखे । नमक छिड़कते और कुरेदते रहने से जनता को लगा कि उमा डॉक्‍टर है शायद डेटॉल लगा कर अभी सफाई में लगी है और मुख्‍यमंत्री बनते ही दवाई लगा देगी और ठीक कर देगी ।

उमा ने कहा था कि मुख्‍यमंत्री बनते ही केवल एक महीने में बिजली कटौतरी बन्‍द करा दूंगी और प्रदेश कौ चौबीस घण्‍टे अबाध बिजली दूंगीं । उमा ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद इसमें थोड़ा संशोधन किया और तीन महीने की बात कह कर किसी राजनैतिक जॉंच आयोग के कार्यकाल की तरह खुद ही टाइम बढ़ा लिया । उसके बाद उन्‍होंने एक साल का एक्‍सटेंशन लिया फिर तीन साल का, वगैरह वगैरह । आखिर उमा भी लोगों की नजर से उतर गयीं ।

बाबू लाल गौर ही केवल एक ऐसे मुख्‍यमंत्री रहे जिसने करिश्‍माई तरीके से न केवल बिजली कटौती बन्‍द करवा दी बल्कि स्‍टेबल एण्‍ड एक्‍जेक्‍ट वोल्‍टेज देकर लोगों को चमत्‍कृत कर दिया था ।

हालांकि प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं , और वर्तमान हालातों में भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व शायद नहीं चाहेगा कि प्रदेश में बार बार नेतृत्‍व परिवर्तन कर छीछालेदर करवाई जाये और चालू गाड़ी की रिपेयरिंग और ठोकापीटी से ही काम लेना चाहेगा । ऐसे में बिजली एक आसन्‍न और विकट खतरा तो कम से कम है ही ।

हालांकि किसी चुनाव को कई स्‍थानीय और कई सार्वत्रिक एवं प्रादेशिक कारक प्रभावित करते हैं तथा कई और भी वजह रहतीं हैं , केवल बिजली ही प्रधान और एकमात्र कारक नहीं होती यह तो सत्‍य है लेकिन प्रधान कारकों के प्रधान तत्‍वों में से एक है , यह तथ्‍य भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

शुतुर्मुर्ग यदि रेत में सिर छिपा कर अपनी समस्‍याओं का अंत मान ले तो इसमें समस्‍याओं का क्‍या दोष है ।

फिलवक्‍त तो खबर ये है कि आज रात दो बजे तक यानि शुक्रवार और शनिवार के दरम्‍यानी रात तक चली बिजली कटौती ने अंचल को हिला दिया है ।

कटौती के पीठे बदमाशी चाहे ऊपर के स्‍तर से हो रही हो चाहे स्‍थानीय स्‍तर पर पिस तो जनता ही रही है । अभी जनता फिर सरकार । यानि खरबूजे की नियति है कटते रहना और चाकू की नियति है काटते रहना । मगर जो हाथ इस चाकू के पीछे हैं उनका जिक्रे आम कभी नहीं होता ।

 

शनिवार, जून 02, 2007

बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने वाले को इनाम मिलेगा

बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने वाले को इनाम मिलेगा

असलम खान ब्‍यूरो प्रमुख मुरैना

मुरैना 1 जून07- मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा बिजली के अवैध उपयोग की रोकथाम हेतु अभियान चलाया जा रहा है । बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने वाले को पुरस्कृत किया जायेगा । ग्वालियर चम्बल क्षेत्र के अंतर्गत हो रहे बिजली के अवैध उपयोग की सूचना कंपनी के मुख्यालय के दूरभाष क्रमांक 0755-2678377 पर दी जा सकती है । सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जायेगा तथा उसे राजस्व हानि की वसूली का साढे आठ प्रतिशत अथवा अधिकतम साढे सात हजार रूपये की राशि पुरस्कार के रूप में दी जायेगी ।

बुधवार, मई 30, 2007

बिजली कम्पनी के बाद अब बी.एस.एन.एल. भी त्रस्त हुआ नगरपालिका से

बिजली कम्पनी के बाद अब बी.एस.एन.एल. भी त्रस्त हुआ नगरपालिका से

शहर की बिजली डम्प होने के बाद शहर के 600 से अधिक टेलीफोन ठप्प

सारी दुनिया से सम्पर्क कट गया आधे शहर का, इण्टरनेट सेवायें बन्द हुयीं

नरेन्द्र सिंह तोमर 'आनन्द'

मुरैना 30 मई 2007 ! अब इसे किस्मत की मार कहा जाये या प्रशासनिक चाल फरेबी, जहाँ चम्बल अंचल का जिला अन्धाधुन्ध अघोषित धुआंधार रात और दिन की बिजली कटौती से त्रस्त और परेशान है वहीं जिस आधे शहर की बिजली नहीं जाती थी उस पर कुदरत का या कहिये कि नगरपालिका का कहर मुसीबत बन कर टूट पड़ा और चकाचक बिजली से मजे मार रहे आधे वी.आई.पी बनाम बीजेपी मोहल्लों में भी नगरपालिका की धींगामस्ती और लापरवाही के चलते ब्लैक आउट पूरे तीन दिनों के लिये छा गया !

हुआ यूं कि मुरैना की नगर पालिका भ्रष्टाचार और गैर प्लानिंग व गैर तकनीकी कुशलता व विशेषज्ञ हीनता के चलते रोजाना ही शहर की सड़के खुदवाती रहती है ! गोया आलम ये है कि शहर की कोई गली या मोहल्ला ऐसा नहीं मिलेगा जिसमें साल में सत्रह बार सड़के न खुदीं हों ! और तो और मुरैना शहर की मुख्य सड़क जिसे एम.एस. रोड कहकर पुकारा जाता है , और रिकाण्डों द्वारा एक समय भारी भरकम रकम लेकर इसे बनाया साल भर खुदती रहने से इसकी ऐसी दुर्दशा हुयी है कि यह अब सड़क नहीं किसी गांव की तीस साल पहले वाली गली नजर आती है ! यह वही सड़क है जो राष्टीय राजमार्ग क्रमांक 3 को क्रास करती है, अंग्रेजी हुकूमत द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक सड़क का आलम ए दुर्दशा यह हो चुकी है कि इसे चम्बल के सीने का बदनुमा धब्बा कहें तो बेहतर है !

इस सड़क के भी कभी सुनहरे दिन थे, अरविन्द जोशी से लेकर राधेश्याम जुलानियां तक कई कलेक्टरों का इस सड़क से गहरा नाता बना रहा है, और यही सड़क उन्हें मशहूरियत दिलाकर नामवर बना गई और आज हालत कुछ ऐसी है कि साल भर रोजाना इसकी खुदाई कहीं न कहीं चलती रहती है !

नगरपालिका के पास कुशल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं और नकलची तथा दिमाग से पैदल तथाकथित विशेषज्ञों की फौज भरी पड़ी है यह तो सर्वज्ञात और सामान्य बात थी, चाहे इसकी वजह जुगाड़ लगाकर पैसा देकर या राजनीतिक या प्रशासनिक गुन्ताड़े लगा कर अपात्रों द्वारा नौकरी हथियाना रहा हो चाहे सोर्स सिप्‍पे के कारण अपात्रों को भर्ती करना हो ! यह तो तय है कि शहर का हुलिया चौपट हो चुका है !

नगरपालिका पिछले तीस साल से शहर का सौन्दर्यीकरण कार्यक्रम चला रही है ! शहर का सौन्दर्यीकरण तो खैर न होना था न हुआ और न हो सकेगा ! हाँ सौन्दर्यीकरण के नाम पर शहर को उजाड़ कर वीरान और बेतरतीब जरूर कर दिया ! दरअसल कोई स्थायी प्लानिंग न होने और कुशलता व विशेषज्ञता के अभाव वश जहाँ हर साल एक नई प्लानिंग नगरपालिका लागू करती है, फिर पुरानी को मिटा कर फिर एक नई रीति से शहर की दोबारा तोड़ फोड़ शुरू कर दी जाती है !

पिछले 20 साल में हुयी शहर की तोड़ फोड़ और खुदाई का आकलन किया जाये तो शहर जहाँ आर्थिक तौर पर नुकसान उठा कर करोड़ों रूपयों का खामियाजा उठा चुका है वहीं शहर का दिहाड़ी व्यवसाय लगभग समाप्तप्राय हो चुका है वहीं व्यापारी और रहवासी भी करोड़ों का व्यक्तिगत नुकसान अलग से झेल चुके हैं !

जहाँ शहर के निर्माण कार्य रोज बनाओ रोज मिटाओ की नीति के तहत चलकर भ्रष्टों के लिये कामधेनु बन गये हैं वहीं मरम्मत और तथाकथित सौन्दर्यीकरण बनाम उजाड़ीकरण का धन्धा भी भ्रष्टाचार में आकण्ठ लिप्त नगरपालिका के लिये दोनों हाथ दुहने जैसा बन गया है !

मैंने कई प्रशासनिक और नगरपालिका अधिकारीयों के कामकाज को गहराई से अध्ययन किया, मुझे लगता है कि शहर की बर्बादी और भ्रष्टों के पालन का स्त्रोत बनकर मात्र मुरैना नगरपालिका रह गयी है !

मजे की बात यह है कि जहाँ सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत सम्पूर्ण अभिलेख अब तक नगरपालिका का इण्टरनेट पर आ जाना चाहिये था वहाँ अभी तक नगरपालिका की 17 बिन्दुओं के तहत भी जानकारी अभी तक इण्टरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं ! यदि कोई सूचना का अधिकार के तहत नगरपालिका से जानकारी मांगे तो जिस प्रकार के उल्टे सीधे पत्र आपको मिलेंगे आपका सिर चकरा कर रह जायेगा मसलन 'आपके द्वारा चाही जानकारी अधिक होने से आपको नहीं दी जा सकती' या 'आपके द्वारा चाही जानकारी इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है अत: आपको नहीं दी जा सकती' मेरे पास कुछ मजेदार ऐसे उत्तर रखे हैं, जो कानून का पायजामा बना कर नगरपालिका ने दिये हैं ! गोया कुल मिला कर कानून क्या है नियम क्या है यह सब नगरपालिका से परे की बातें हैं !

अब और एक नया तमाशा भी सुनिये - आपको यह जानकर हैरत होगी कि नगरपालिका मुरैना में फोन नहीं है, यानि आप टेलीफोन से अपनी शिकायत नगरपालिका में आमद कराना चाहें तो वहाँ न फोन है, न ई मेल और न फैक्स ! गोया झक मार कर सी.एम.ओ. के मोबाइल पर फोन लगाओ, उसके नम्बर पर फोन लगाओ तो आपका नम्बर नया हुआ तो वह उठायेगा ही नहीं !

शहर में नगरपालिका के लिये क्या शिकायत समाधान की क्या प्रणाली है, इसकी पड़ताल जब हमने की तो ये सब राजफाश हुये ! आज जहाँ जमाना नये युग में प्रवेश कर रहा है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्रान्तिजगत में समाविष्ट हो रहा है वहाँ मुरैना की नगरपालिका आज भी बैलगाड़ी की सवारी कर रही है ! गोया सीधे दिये जाने वाले लिखित आवेदनों की हालत ये है कि मैंने उन पर कभी कोई कार्यवाही होते नहीं देखी, मेरे पास कई आवेदनों की पावतीयां मौजूद है जिन पर कभी नगरपालिका न कोई कार्यवाही नहीं की !

अभी एक तथाकथित सीवर लाइन के निर्माण के लिये शहर के नाला नंबर दो और यत्र तत्र सर्वत्र खुदायी चल रही है, अब यह खुदायी कैसी है, पहले बिजली के खम्बे मय टान्सफार्मरों के नाले में गिर कर डूब गये फिर खम्बे गिरे बिजली गुल हुयी, ब्लैकआउट हुआ उसके बाद भारत संचार निगम लिमिटेड की टेलीफोन लाइन्स केबलें थोक के भाव काट दीं ! अंजाम ये हुआ कि उधर शहर की बिजली गुल इधर संचार सम्पर्क समाप्त, लो बेटा करो क्या करोगे ! इण्टरनेट, टेलीनेट,मीडिया, बिजली सब बन्द ! जै राम जी की ! जय हो प्रभु ! गोया मुरैना शहर में नहीं किसी जंगल में आ बसे हों ! ऐसा दुर्लभ नजारा बीच शहर का देखना चाहते हैं , तो प्यारे आ जाओ मुरैना ! इससे बढ़िया होली डे प्लेस या पिकनिक स्पॉट पूरे हिन्दुस्तान में कहीं नहीं मिलेगा ! गोया हमने अपने शहर का सौन्दर्यीकरण कुछ ऐसा किया है कि सत्रहवीं और अठारहवीं सदी के जंगली गांव में इसे बदल दिया है ! अब जब सारी दुनियां सूचना क्रान्ति के क्षेत्र में घुस रही है तो आने वाली पीढ़ी इतिहास को न भूले सो हमने बतौर ए म्यूजियम मुरैना का विकास उल्ट कर पिछली सदियों की ओर मोड़ दिया है !

भईया जब आगे बढ़ जाओ और पुराने जमाने की झलक देखना हो तो जाना मुरैना ! इस सदियो पुराने शहर को हम रोजाना फुट और मीटरों पीछे धकेल कर संरक्षित करते जा रहे हैं !

हम आपको शहर में जंगल की सैर करायेंगें, जहाँ विकट बड़े बड़े मच्छर भी मिलेंगें, जंगल का घनघोर घुप्प अन्धकार भी और जानवरों जैसे ना समझने वाले और ना सुनने वाले स्वेच्छाचारी अफसर भी हमारे इस अजायबघर में मिलेंगे !

गीदड़ भभकी देकर गुर्राने वाले अफसरों के चमचे भी हम दिखायेंगें और अठारहवीं सदी की रिश्वतखोरी भी सरे आम चौराहों पर दिखायेंगे ! हम आपको यहाँ जंगल में व्याप्त गली गी गंदगी भी दिखा देंगे और सड़कों से बहकर घरों में घुसता नाले का सीवर भी दिखायेंगे ! छोटे छोटे प्रमाणपत्रों और आवेदन के लिये मशक्कत करते गरीब बेरोजगारों और लाचारों की फौज के साथ कर्मचारीयों को रिश्वत अधिकारपूर्वक मांगते 'धर जा या मर जा' तर्ज पर वसूलते दिखायेंगे ! आ जाओ प्यारे गर्मीयों की छुटिटयों का आनन्द जरा भारत के इस टूरिस्ट प्लेस में भी ले जाओ!