मंगलवार, अक्टूबर 12, 2010

हास्‍य- व्‍यंग्‍य : का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्‍यादा और ससुरा वोल्‍टेज कैसा डाउन है ...नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

हास्‍य- व्‍यंग्‍य

का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्‍यादा और ससुरा वोल्‍टेज कैसा डाउन है ...

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

अभी एक मित्र ने हमें मोबाइल से एक एडल्‍ट जोक भेजा .. लेकिन इस चुटकुले में कुछ ऐसी चुटकी ली गयी थी कि हम हँसे बिना न रह सके .. चुटकुला कुछ यूं था हम इसे अपनी सदाबहार स्‍टाइल में आपको सुनाते हैं - 

एक बिजली वाले अफसर रोज देर रात को आते घर ।

अद्धी पौआ औनी पौनी, संग में माल मत्‍ता जम कर।।

थके हारे नित दारू पीते, दारू पी कर दारा नियरे जाते।

न नैन से नैन मिल पाये और न लब की मदिरा पी पाते।। 

पर फोन रात में भी बज जाता, सारा मजा किरकिरा होता।

टेंशन नित का देख के अफसर, एक रिकार्डिंग वह कर लेता।।

अपने फोन में वायस भरी, लोड है ज्‍यादा , वोल्‍टेज डाउन ।

बिजली नहीं मिल पायेगी, करा तुमने हमरा सिग्‍नल डाउन ।।

रोज रात को सुनते सुनते, बिजली भौजी ने रट लीं ये लाइन ।

हमारे सनम का प्रिय भाष है, लोड है ज्‍यादा वोल्‍टेज डाउन ।।

एक दिन सुबह बोली पड़ोसन, कुछ सुनो सहेली कुछ कहो जरा ।

कैसी रोज रात है कटती , पिया से कैसे मधुर मिलन है होता ।।

माथा ठोक ठोक के बिजली भौजी, करम दण्‍ड पर रख कर हाथ ।

तड़प झड़प कर बोली सखी से का बतलाऊं जीजी, जरा बड़ी है बात।।

रोज रात को बलम जी पी कर सोते, हाई वोल्‍टेज में करते बात ।

रात बखत जब हाई वोल्‍टेज चाहिये, तब फिर ना करते ये बात ।।

रोज रात को खुद नर्राते, सोते सोते से नित उठ कर चिल्‍लाते ।

लाइन शार्ट है, लाइन फाल्‍ट है, लोड है ज्‍यादा वोल्‍टेज डाउन ।।

किस्‍मत दुखिया हमरी कुछ ऐसी है ,  तुमसे कह दें दिल की बात ।

उनके भरे बदन में दिखता पूरा पावर हाउस, लगे कटाउट पूरे सात ।।  

आते हैं सन्ना सन्‍ना सरकार, पर लोड है ज्‍यादा, है डाउन वोल्‍टेजवा ।

फूट फूट मैं फ्यूज हो कर बुझी ट्यूबलाइट सी बुझती हूं, जले करेजवा ।।

सुन कर सखी मुस्‍काई बोली, करो सस्‍पेण्‍ड डाउन ट्रान्‍सफार्मर, बिना यूज और बेमतलब का, फेंकों जो हैं बिन काज ।

नया हाई टेंशन हाई वोल्‍टेज, टा्रान्‍सफार्मर का करो प्रयोग, या फिर अपने खम्‍बे से डलवा दूं , बोलो क्‍या चाहो तुम आज।

अब जब बिजली ही क्‍या खुद सरकार का ही डाउन वोल्‍टेज और हैवी लोड चल रहा है, जनता उनका लोड झेल रही है, जिनमें वोल्‍टेज ही नहीं है, जो ऊपर चढ़े हैं जनता के, बिना वोल्‍टेज के जिन्‍दा मुर्दे । ऐसे सरकार को शत शत नमन ...  मध्‍यप्रदेश की अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती को सादर समर्पित    

शनिवार, मई 01, 2010

मुरैना : 20 घण्‍टे से अधिक बिजली बन्‍द रही 24 घण्‍टे के दरम्‍यां

मुरैना : 20 घण्‍टे से अधिक बिजली बन्‍द रही 24 घण्‍टे के दरम्‍यां

मुरैना 1 मई 10, मुरैना शहर और मुरैना जिला वासीयों के लिये अप्रेल माह का आखरी दिन कई मनहूसियतें ले कर आया । जहॉं 30 अप्रेल को ही ग्‍वालियर श्‍योपुर छोटी लाइन ट्रेन पलट गई वहीं 30 अप्रेल को सुबह 4 बजे हुयी बिजली कटौती के बाद सुबह 10:16 बजे बिजली वापस आयी यानि पूरे 6 घण्‍टे 16 मिनिट तक बिजली कटी, उसके बाद दोपहर 2 बजे कटी बिजली फिर वापस आयी ही नहीं और दूसरे दिन यानि 1 मई को सुबह 4 बजे ही वापस आयी अर्थात 24 घण्‍टे के दरम्‍यां कुल 20 घण्‍टे 16 मिनिट तक पावर शट डाउन रहा ।

हालांकि दोपहर 2 बजे से दूसरे दिन सुबह 4 बजे तक पावर शट डाउन के बारे में मध्‍यक्षेत्रीय विद्युत वितरण कम्‍पनी का कहना है कि हाई टेंशन ट्रान्‍समिशन लाइन टूट जाने से मेजर फाल्‍ट हो जाने से 14 घण्‍टे कन्‍टीनूअस पावर शट डाउन रहा ।

इस दरम्‍यां ट्रेन पलटने से घायल लोग मुरैना अस्‍पताल में पड़े कराहते रहे, अस्‍पताल में बिजली नहीं होने से वहॉं भी कराहें कोहराम और चीख पुकार मचा रहा ।

 

शनिवार, अप्रैल 17, 2010

मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प

मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प

मुरैना 17 अप्रेल , चम्बल में यू तो भ्रष्ट व बेईमान अधिकारीयों को पदस्थ कर जनता का लहू चूसना आम बात है, स्थानीय नेताओं के पालतू और कमाई अधिकारीयों का जुल्मो सितम इस हद तक पार कर गया है कि साल भर चलने वाली बिजली कटौती भारी भीषण गर्मी और घुआंधार मच्छरों के बीच बढ़ा कर दिन भर की बिजली क्औती के साथ पिछले दो दिनों से रात में भी शुरू कर दी गयी है ! उल्लेखनीय है स्थानीय भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारीयों और नाकारा हो चुकी नगर पालिका के सितमो आलम ये हैं कि भारी मच्छरों से त्रस्त शहर में पिछले तीन साल से मच्छरों के लिये न तो कोई दवा कभी छिड़कावायी गई और न फोगिंग ही करवाई गई ! जबकि नगरपालिका के पास फोगिंग मशीन उपलब्ध है !

ऐसे में पूरे दिन भर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक और फिर अब रात में भी इसी कदर की जाने वाली बिजली कटौती ने शहरवासीयों का जीना मुहाल कर दिया है ! जहाँ शहरवासी इस बिजली कटौती से न केवल सकते में हैं बल्कि उनमें भारी आक्रोश भी भड़क गया है ! जहाँ गर्मी की मौसमी बीमारीयों की चपेट में आकर लोगों में मजीलस,खुजली और चिकनगुनियां जैसे रोग फैल गये हैं वहीं बानमौर के एक सरकारी छात्रावास के 30 में से 29 बच्चों के एक साथ चपेट में आ जाने से सारे बच्चे छात्रावास से भगा दिये गये हैं और बिना कोई चिकित्सा कराये हरिजन दलित गरीब बच्चों से छात्रावास खाली करा लिया गया है ! अंचल में व्याप्त सरकारी लापरवाही के बदइंतजामी का शिकार होकर जहाँ बीमारीयों और मच्छरों से जनता त्रस्त हेै वहीं रात भर और दिन भर की बिजली कटौती से चारों ओर कोहराम मचा है व आक्रोश व्याप्त हो गया है !

 

शुक्रवार, जनवरी 29, 2010

कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी.......बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार.....

कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी.......बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार.....

Narendra Singh Tomar "Anand"

 

कबिरा बिजली देंख के, जब रह गये यूं दंग ।
देख तमाशा अजब सा
, ठानी रच रस रंग ।।
ठानी रच रस रंग
, पदबन्ध रचा ।
लिखा अपढ गँवार जो जन मन बीच बसा ।।
बिजली को तो जाना है
, वक्त से पहले चली गयी ।
दिन भर पूरे गोल रह
, देर रात को आयेगी ।।
टाँग पसार के दिन भर सोवो
, करो रात में काम ।
चढ जा बेटा सूली पे
, बली करेंगे राम ।।
भली करेंगे राम
, जय श्री राम जय श्री राम ।
सदी 18 का मिले
, फोकट ही आराम ।।
बच्चों के पेपर फिर आये
, लेकिन बिजली कभी न आई ।
भर्ती सारे चोर कर लिये जिनने सूंत के करी कमाई ।।
चोर एक चोरी करे
, फिर भी सीनाजोर ।
अपनी चोरी का दे दोष
, कहता जनता चोर ।।
40 साल से चल रही व्यवस्था
, तब नहीं थी जनता चोर ।
चोरों की सत्ता आते ही अब कहते जनता चोर ।।
पूरी बिजली लील गये
, पर ना लई डकार ।
कानन में है रूई ठुसी
, सोय रही सरकार ।।
करोड अरब के करे घुटाले
, फर्जीवाडे खर्च में डाले ।
दारू बीवी और संग में 56 ऐब और हैं पाले ।।
खर्च वसूली लाली लिपिस्टक औ ऊपर की माँग ।
कैसे पूरति होवे इनकी रोज रचें नित इक स्वांग ।।
कछु लुगाई की फरमाइश कछु रखैलन संग ।
जेबें काट काट जनता की
, करें प्रजा कों तंग ।।
भडिया बैठे बिजली घर में रोज करें भडियाई ।
जो कहुँ जनता करे शिकायत
, जानो सिर पे आफत आई ।।
या चोरी का केस लगावै
, या माँगें पनिहाई ।
जो जनता माई बाप कहावे
, भई अब गरीब लुगाई ।।
लोड चेक के नाम पे
, ठांसें रोज डकैत ।
सरकारी लैसन्स पे
, लूटत फिरें भडैत ।।
इन भडियन के राज में
, खूब मचा अंधेर ।
अंधकार कायम रहे
, कोडवर्ड का ये शेर ।।
अब जनता दीखे चोर
, कहें लीलै बिजली जनता ।
जब बिजली थी खूब यहाँ
, काहे चोर बजी न जनता ।।
तब भी काँटे खूब डले थे. खूब जले थे हीटर ।
जम कर बिजली खूब जलाते और नहीं थे मीटर ।।
बिन बिजली के बिल मिल रहे अब अंधाधुंध अनंत ।
अब बढी गयी आबादी
, बोलो सरकारी संत ।।
6 शहर भारत के ऐसे
, आध करोड ऊपर आबादी ।
ना बिजली का पत्ता खडके
, ना ऐसी बर्बादी ।।
काँटे कटिया वहाँ भी डलते
, ए.सी. हीटर की भरमार ।
पहले झाँको गिरेबान में गुण्डा भडियन के सरदार ।।
हालत गुण्डा राज की
, देख कें रहे कबीरा रोय ।
पब्लिक नर्राती फिरे
, राजा रहो है सोय ।।
राजा रहो है सोय. कान में डारे नौ मन तेल ।
पाछें रजिल्ट से बुरो रहे
, छात्रों यही करमन के खेल ।।

 

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''
........क्रमश: जारी रहेगा अगले अंक में

 

शनिवार, जनवरी 09, 2010

बदलाव की लहर : स्वतंत्र बिजली निर्माताओं के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से प्रोत्साहन -प्रभावती आकाशी

बदलाव की लहर : स्वतंत्र बिजली निर्माताओं के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से प्रोत्साहन
-प्रभावती आकाशी

लेखिका निदेशक (एम एवं सी), पसूका (प्रेस इन्‍फारमेशन ब्‍यूरो, भारत सरकार ), दिल्ली हैं

दुनियाभर में पवन का इस्तेमाल  ऊर्जा के लिए सदियों से किया जा रहा है । भारत में भी, लाखों घरों और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए वायु से बिजली पैदा करने की असीम क्षमता है । पवन ऊर्जा तेजी से बढता अक्षय ऊर्जा स्रोत है जो कुल संस्थापित अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता के 70 प्रतिशत से अधिक है । अब तक करीब 11,000 मेगावाट की संचयी क्षमता स्थापित की जा चुकी है तथा 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए 14,000 मेगावाट में से अक्षय ऊर्जा के लिए 10,500 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।

 

प्रोत्साहन

 

       मंत्रालय व्यावसायिक पवन बिजली परियोजनाओं को अनेक वित्तीय प्रोत्साहनों के जरिए 1993-94 से बढावा दे रहा है जिनमें त्वरित मूल्यह्रास शामिल है । पवन बिजली क्षेत्र के विकास के लिये मूल्य मुख्य प्रेरकबल और वास्तविक प्रोत्साहन 80 प्रतिशत त्वरित मूल्यह्रास का प्रावधान किया गया है तथा कई अन्य क्षेत्रों के लिए छूट या प्रोत्साहन भी उपलब्ध है । इस प्रावधान से लाभ कमाने वाली बड़ी कंपनियां, छोटे निवेशक और विमोहित उपयोक्ता क्षेत्र में भागीदारी करने में समर्थ हुए हैं। तथापि, स्वतंत्र बिजली निर्माता और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश त्वरित मुल्यह्रास प्रावधान का फायदा उठाने में समर्थ नहीं थे । निवेशक आधार बढाने के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने 62,00 लाख रूपए प्रति मेगावाट के विषयाधीन पवन बिजली परियोजनाओं से ग्रिड में 50 पैसे प्रति यूनिट बिजली के निर्माण आधारित प्रोत्साहन के लिए स्कीम की घोषणा की है ।

 

        इस स्कीम का उद्देश्य पवन ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना और ग्रिड इंटरएक्टिव अक्षय ऊर्जा की मात्रा बढाना है ।

 

पवन बिजली परियोजनाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन नीति ढांचा

 

·        परस्पर विशिष्ट ढंग में त्वरित मूल्यह्रास सहित मौजूदा वित्तीय प्रोत्साहन के समानान्तर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन लागू करना ।

·        कंपनियां त्वरित मूल्यह्रास या उत्पादन आधारित प्रोत्साहन में से एक ही ले सकती हैं दोनों नहीं ।

·        उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम 11वीं योजना की बाकी अवधि के दौरान 4000 मेगावाट की अधिकतम सीम  ्षमता के लिए लागू होगी ।

·        उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के समानान्तर त्वरित मूल्यह्रास का प्रावधान 11वीं योजना अवधि तक या प्रत्यक्ष कर संहिता शुरू होने तक (जो भी पहले हो) जारी रहेगा ।

 

स्कीम की मुख्य विशेषताएं

 

·        प्रोत्साहन ऋ रूपये 62 लाख प्रतिमेगावाट की सीमा के साथ रूपये 0.50 प्रति इकाई ।

·        अवधि-4 वर्ष से कम नहीं और 10 वर्ष से अधिक नहीं ।

·        मंत्रालय की ओर से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम की अधिसूचना के बाद पवन टरबाइन 31.03.1012 को या उससे पहले चालू ।

·        अधिसूचना के बाद सभी पवन टरबाइनपरियोजनाएं पंजीकृत की जानी हैं ।

·         प्रोत्साहन राज्य विद्युत विनियामक आयोग से अनुमोदित शुल्क के अतिरिक्त होता है।

·        ग्रिड के लिए बिजली की उपलब्धता बढाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है तथा एसईआरसी के जरिए शुल्क निर्धारित करते समय इस पर विचार नहीं किया जाएगा ।

 

स्कीम के कार्यान्वयन के लिए भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी

 

       भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम को कायान्वित करेगी । प्रशुल्क वितरण के उद्देश्य से बिजली उत्पादन के डाटा संग्रह के लिए विभिन्न राज्य जनोपयोगी सुविधाओं में अपनाई जाने वाली मौजूदा प्रणाली को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के वितरण के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ पालन किया जाएगा । भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के साथ-साथ त्वरित मूल्यह्रास के लिए उपयोगी सभी पवन टरबाइनों का व्यापक डाटाबेस बनाएगी । सभी पवन टरबाइनों की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की जाएगी जो उक्त प्रोत्साहन के लिए दावा करने हेतु अनिवार्य जरूरत होगी । उत्पादन आधारित प्रोत्साहन और त्वरित मूल्यह्रास दोनों तरह की परियाजनाओं के लिए पंजीकरण जरूरी है जो परियोजना वार किया जाएगा । प्रत्येक मशीन के लिए विशिष्ट पहचान संख्या होगी ।

 

स्कीम के लिए कौन योग्य है ?

 

·        ऐसे उत्पादक जो त्वरित मूल्यह्रास का लाभ नहीं लेते हैं ।

·        एसईआरसी प्रशुल्क पर ग्रिड के लिए बिजली की बिक्री के लिए स्थापित पवन बिजली परियोजनाओं से जुड़ी ग्रिड ।

·        विमोहित पवन बिजली परियोजनाएं ।

 

कौन योग्य नहीं है ?

 

·        तीसरे पक्ष को बिजली बेचने वाली परियोजनाएं

 

       उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के लिए दावा छमाही आधार (अप्रैल-सितंबर और अक्तूबर-मार्च) पर जारी किया जा सकता है । आयकर विवरणी दाखिल करने के बाद पहला दावा अगस्त-सितम्बर, 2010 तक जारी होने की संभावना है ।

 

       11वीं योजना के अंतिम वर्ष के दौरान स्कीम का मूल्यांकन किया जाएगा । अगर स्कीम को उम्मीद से अधिक समर्थन मिला तो इसकी सीमा बढाने पर विचार किया जाएगा ।

 

       11वीं योजना की बाकी अवधि के दौरान उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के जरिए 4000 मेगावाट की क्षमता प्राप्त होने का अंदाजा है, इसलिए यह उम्मीद है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम देश में पवन बिजली विकास को नई बुलंदी तक ले जाएगी ।

 

       केन्द्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री डा0 फारूख अब्दुल्ला ने ठीक ही अवलोकन किया है कि भारत में क्षमता, तकनीकी सहायता सुविधाएं, नीति ढांचा तथा विनियामक माहौल, निर्माण आधार में तेजी तथा निवेशकों के भरोसे संबंधी दशाएं विशेष रूप से पवन ऊर्जा क्षेत्र में, अक्षय ऊर्जा में त्वरित वृध्दि के अनुकूल हैं । डा0 अब्दुल्ला को यह उम्मीद भी है कि भारत की सामान्य वायु प्रणाली के लिए उपयुक्त बेहतरीन और प्रभावी पवन टरबाइनों की उपलब्धता और बिजली के लिए बुनियादी ढांचे में वृध्दि से देश की पवन ऊर्जा क्षमता वर्तमान अनुमान के अनुसार 45000 मेगावाट से अधिक हो जाएगी ।

 

       अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढाने तथा अपने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश की बढती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद के लिए बिजली पैदा करने के वास्ते इस प्रचुर घरेलू संसाधन से फायदा उठाने का यह उपयुक्त समय है ।

 

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# निदेशक (एम एवं सी), पसूका, दिल्ली ।

 

गुरुवार, नवंबर 12, 2009

म.प्र. में बिजली के लिये त्राहि –त्राहि मची, गॉंवों में किसानों को दो दिन बाद दो घण्‍टे और शहरों में सिर्फ 3 घण्‍टे मिलती है बिजली

म.प्र. में बिजली के लिये त्राहि त्राहि मची, गॉंवों में किसानों को दो दिन बाद दो घण्‍टे और शहरों में सिर्फ 3 घण्‍टे मिलती है बिजली

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

यूं जर्रा जर्रा महताब हुआ, मेरा सजन तो आफताब हुआ, उनकी इस अदा का क्‍या कहिये कि जो बचा खुचा था वो भी सूपड़ा साफ हुआ ।

       बदले बदले से सरकार नजर आते हैं, जिनके कन्‍धों पर पग रख के पहुँचे एक ऊँचाई तलक, आज कहते हैं कि मैं आसमान हुआ ।

आसमां पे उड़ने वाले तेरी पतंग की डोर जिन हाथों में, जरा खौफ खा वरना मत कहना कि ये क्‍या कमाल हुआ ।

ये जर्रा धूल का, फांकोगे तो ऑंतें फुंक जायेगी, फेफडे चलनी हो जायेंगे, ठोकर मारोगे तो न कहना कि सिर पे सवार हुआ ।

कल तक जिस मिट्टी ने तुझे पुतला बना कर एक भगवान बना दिया, उस मिट्टी को ललकारेगा तो न कहना कि क्‍या सब्‍जबाग हुआ ।

तू भूल गया उपने जानो जॉं पर खेल खून के कतरे बहाने वालों को, मत कहना कि ये कतरा तो अब दरिया हुआ ।

ओ कान में तेल औ ऊंगली फंसा के सोने वाले, जिनकी नींद हराम हुयी फिर न कहना कि ये क्‍या कोहराम हुआ ।

जिद तेरी है इस वतन की मिट्टी को मिटाने की, तो इक जिद मेरी भी है इसे बचाने की, जब दो जिद टकरायें तो न कहना कि व्‍यर्थ संग्राम हुआ ।

हम तो खिलाड़ी हैं घर फूंक तमाशे वाले, तेरा चमन गर उजड़ा तो न कहना कि ये क्‍या वीरान हुआ ।

चम्‍बल के बेटों को शौक है मौत से टकराने का, तेरी वो बिसात कहॉं, गर मौत बन कर हम टूटें तो न कहना कि ये क्‍या जंजाल हुआ ।

कितना भी उँचा तू उठा अभी मेरे मुकाबिल नहीं पहुँचा, तुझसे छिनने लुटने को काफी है मैं नंगा ही सही, फिर न कहना कि ये क्‍या किस किस को बचाऊं क्‍या ये बवाल हुआ ।

दौलत और शोहरत के भ्रष्‍ट समन्‍दर में तैरने वाले, हम जो तूफां बन के तेरी किश्‍ती डुबोये तो न कहना कि ये क्‍या मंझधार हुआ ।

हसरत है गर तेरी दो दो हाथ की, मन मेरा भी है अब तुझये टकराने का , लगा जोर तू पूरा फिर न कहना कि तुझे कह कर नहीं मारा ।

यूं अब आही जा मुकाबिल मेरे, मैं हिन्‍दुस्‍तान तो तू पाकिस्‍तान सही, तेरी हसरत और मेरा मन भर जायेगा फिर न कहना कि मुकाबला ही कहॉं हुआ ।

क्‍या जरूरत कंस की रावण की औ किसी अन्‍य शैतान की, तू तो सबका नया अवतार हुआ ।

उस्‍ताद समझता है तो आ सामने, हो दो दो हाथ तुझसे यूं छुप छुप के लड़ता है तो भरम दोस्‍ती का होता है, आ दुश्‍मन की तरह टकरायें वरना फिर न कहना कि तेरा  तो कत्‍लेआम हुआ ।

 

कहने को संभागीय मुख्‍यालय है शहर मुरैना लेकिन बिजली कटोती के हाल इतने बदतर कि महज तीन घण्‍टे ही शहरवासीयों को 24 घण्‍टे के दरम्‍यां मिलती है बिजली, न कोई सुनने वाला न कोई निराकरण करने वाला यहॉं वम्‍बल संभाग का कमिश्‍नर और मुरैना जिला का कलेक्‍टर दोनो ही बैठते हैं लेकिन जनता की समस्‍याओं से पूरी तरह नावाकिफ ये दोनो अधिकारी अपनी अपनी धींगामस्‍ती में मस्‍त हैं । गॉंवों के हाल तो और भी बदतर हैं गॉंवों में रबी की फसल जब सिंचाई के लिये तरस रही है तब उन्‍हें दो दिन में एक बार यानि 60 घण्‍टे में महज दो घण्‍टे बिजली आपूर्ति की जा रही है, अब फर्जी सरकारी दावों की पोल खोलती नीचे किसानों के साथ गुजारी एक रात की दास्‍तां हम यथावत यहॉं दे रहे हैं हालांकि इसमें चम्‍बल की ठेठ देहाती भाषा में बातें कहीं गईं हैं और कुछ गाली गलौज की भाषा भी किसानों द्वारा प्रयोग की गयी है लेकिन बात तो थी उसे साहित्यिक और परिष्कृत रूप देकर हम नहीं चाहते थे कि बात की तासीर या ग्रामीणों के आक्रोश का इजहार कमतर हो जाये । सो लिहाजा जो सच है हम बेबाक यहॉं दे रहे हैं, हमने ग्राम और ग्रामीणों के नाम यहॉं जानबूझ कर प्रकाशित नहीं किये हैं हम नहीं चाहते कि वे किसी भी राजनीतिक या सरकारी या अफसरी कोपभाजन के वे भोले भाले निर्दोष लोग शिकार हों । वक्‍त पड़ने पर हम सारी वार्ता साबित करने में सक्षम व समर्थ हैं ।

अभी लगे हाथ बताता चलूं कि मुझे चम्‍बल के कई गॉंवो का एक साथ दौरा करने को मिला , मेरे बचपन के कुछ ग्रामीण मित्रों ने मुझसे रात को एक गॉंव में हुये चौपाल पर चौगोला (यह काव्‍य की ग्रामीण लोक विधा है ) सम्‍मेलन में बैठने का आग्रह किया और अपने विचार उन्‍हे बताने तथा उनके विचार जानने की विनयपूर्ण आमंत्रण दिया । मैं हालांकि काफी थकावट महसूस कर रहा था लेकिन ग्रामीण दोस्‍तों (भई मैं स्‍वयं भी ग्रामीण परिवेश का हूँ मेरा जन्‍म चम्‍बल के गॉंव में हुआ, वही पला बढ़ा और थोड़ी बहुत पढ़ाई लिखाई भी गॉंव में की, गाय भैंस चराने से लेकर, हल जोतने और सभी किसानी कार्यों का मुझे लम्‍बा मैंदानी अनुभव है ये दीगर बात है कि बाद में उच्‍च स्‍तर तथा प्रायमरी माध्‍यमिक और अन्‍य शिक्षा दीक्षा ग्‍वालियर, भिण्‍ड और भिलाई दुर्ग, मुरैना आदि जगहों पर हुयी ) पर मेरे गॉंव का नाता अभी तक कायम है, मेरी पैतृक जमीन जायदाद खेती बाड़ी अभी कायम है सो गॉंव से नाता भी बदस्‍तूर कायम है तथा पुरानी रजवाड़ी, फिर जागीरदारी, जमीन्‍दारी भी रही है सो सारे रिश्‍ते अभी तक मुकम्‍मल कायम हैं)

अब अगर इन सब ऐतिहासिक बातों के कायम रहते तोमर राजपूत इस देश के अभिन्‍न अंग होकर न्‍यायप्रिय, क्रोधवान एवं मर मिटने की कूबत से संपन्‍न होकर अन्‍याय व अत्‍याचार के खिलाफ आवाज बुलन्‍द करने में सबसे आगे हैं और बगावत कर बागी बनते हैं तो इसमें न तो तोमरों का दोष है और न मेरा, यह इस वंश का स्‍वाभाविक लक्षण है, वंशगत तेज है, वाणी में ओजस्विता वंशगत है तो अपनी ऑंख के सामने अत्‍याचार देख कर ऑंखे बन्‍द करना तो किसी भी राजपूत के स्‍वभाव में नहीं होता किन्‍तु तोमरों को यह गुण विशिष्‍ट व प्रचुर रूप से मिला है, यही एक वजह है कि चम्‍बल में बगावत होती आयी है और बागी पैदा होते आये हैं , जब तलक अत्‍याचार, अन्‍याय और सरकार का अनसुनापन जारी रहेगा तब तक चम्‍बल में बागी पैदा होते रहेंगे इसमें कोई संशय नहीं है ।

अब अगर

सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी है

यदा यदा हि धर्मस्‍य, तदात्‍मानं सृजाम्‍यहम् परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्‍कृताम, धर्म संस्‍थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ।।

(इसके अलावा देखें श्‍लोक संख्‍या 31 अध्‍याय 2, 38 अध्‍याय 2 तथा 43 अध्‍याय 18 श्रीमद्भगवद्गीता)  

गॉंव के किसानों के बीच रात को जब चौपाल पर चौगोला मण्‍डली जमी तो कई किस्‍से भोले भाले ग्रामीणों ने अपने ग्रामीण अंदाज में बता डाले मुझे कई चीजें जानकर हैरत हुयी और विचार करने पर मजबूर हो गया मसलन सुनिये उस रात की बातों के चन्‍द अंश, ऊपर लिखी शेर और मुक्‍तक नामक कविता भी मुझे एक ग्रामीण कवि ने सुनाई उनका नाम दिनकर सिंह तोमर था और वे सिंहोनयां के प्रतिष्ठित जमीन्‍दार परिवार (पूर्व सरपंच परिवार ) से ताल्‍लुक रखते हैं ।

'' काये आजकल्लि तिहाई सरकार का रहि है'' कछु फायदा तो दीख नाने रहो उल्‍टी मंहगाई बढि़ति जाय रही है''

दूसरे ने कहा कि सरकार का करेगी , चुनाव में खच्‍च करो है एक एक नेता कूं चुनाव लड़ायवे दो दो करोड़ रूपया पार्टीयन ने अपने अपने प्रत्‍याशीयन को दये हते, अब वा पैसा ए निकार रही है, शक्‍कर मंहगी, दार (दाल) मंहगी, साग (सब्‍जी) मंहगी जे सब पैसा वापस काढ़वे (निकालने) के इंतजाम हैं ।

वे फिर बोले तो ''काये तो जि सिबराजु काये ना कछ़ु कर रहो''

दूसरे ने कहा कर तो रहो है, बनियन की शक्‍कर पकरि लई, जब पकरी तब बातें पहले तऊ सस्‍ती हती बाने तब ते पकरी है तईं और जादा मंहगी करवाय दई । पकरीयई जईं के लईं हती ताते दाम और जादा बढि़ जाये और बनिया कछू कमाय लें, बनियन ने बऊये तो चन्‍दा दओ होगो सो कढ़वावेगो के नहीं । और फिर जा नरिन्‍दा कोऊं तों बनियन ने वोट दये हते सूनी है कि बनियन को भारी कर्रो चेला है, कमाई करवे वारे सिग कमाऊ पूत अधिकारी वाके चेला हैं, वाये जनता फनता ते कछु मतलब फतलब नानें , जब आवतु है तो नौटंकी सी करिकें चलो जातु है ।

बीच में एक और ग्रामीण टिप्‍पणी करता है कि हओ जोईं है सारो बातन ते करदे खुसी, मोंह (मुंह से) सो नहीं लगन दे भुसी (भूसा)

पहले वाले सज्‍जन फिर बोले पनहियन लायक है, सारे की जमान्‍त जप्‍त होगी, देखिये ये किस्‍सा उस जगह का है जो भाजपा के बरसों पुराने गढ़ रहे हैं और तोमर राजपूतों के दबदबे वाले ठीये हैं ।

चर्चा आगे बढ़ती है तब तक एक सज्‍जन हुक्‍का सुलगा लाते हैं, एक अन्‍य किसान बोलता है मार डारे सारेन ने, बिजली हति नानें , नहर आय नाने रही, खेत सूखि चले, अबकी में तो गेहूँ सरसो को कोऊ हिल्‍लो नानें । वो तो वोट ले कें दुबक के भजि गयो , अब गामन तन कों आवतु ऊ नानें । भई ते भजि जागो कभऊं कहेगो स्‍टेडियम बनवावेगो कभऊं कहेगो के अण्‍डरब्रिज बनवावेगो । जा मूसरसेटी ये जे पूछो के अम्‍बाह में ठौर कहॉं धरो है सो बनवावेगो स्‍टेडियम ।

दूसरा किसान तुरूप का पत्‍ता फेंकता है, बनवावेगो तिहाये हमाये खेत लेकें, बाने सिग ठाकुर नेता तो जिले ते खतम कर दये, कछू ठाकुर एनकाउण्‍टरनि में मरवाय डारे, अब बचे खुचेन के खेतन (खेतों को) लीलें (लीलना) चाहतु है ।

दूसरा किसान तड़ाक से बोलता है आवन देओ सारे ऐ घाट उड़ाय देंगे, आवेगो तो झईं अबकी औंधी सीधी दे तो डार लेओ सारें कों । और इतेक देओ के गैल भूल जाये ।

एक और नौजवान बीच में बोलता है जा सारे में तो दस दे और एक गिने ।

पर‍ि जे केन्‍द्र की सरकार का करि रई है जा सारे के झां तो छापो परनो चहीयें, एक वा मिसरा के झां जे सारे दोऊ बदमास हैं, एक तो पानी पी गयो पूरो फिर बिजली लील गयो, हमनि सुनी है कि इंजीनियर कालेज सोऊ चलाय रहो है, बड़ भारी कमाई करी है, दोऊ जने अरबन रूपय्यन के मालिक हैं गये हैं । छापो डरवाय दे केन्‍द्र वारें सोईं नप जागें दोऊ फीता लगाय के , के लला ला बताया कितेक कितेक कमाये हैं तैंने सारेन के लाकर होगें, करोड़न के माल कढ़ेंगे ।

दूसरा किसान बोलता है अये जिनके तो बिदेसन में खाते होंगे । अफसर बन गये जिनके राज में, चपरासीन के बंगला तन गये मोबाइल ने बतराउठे, कार ले ले कें चलाय रहे हैं ।

अब एकदम सब मुझसे मुखातिब होते हैं काय रे तू कैसो चुप्‍प बैठो है, कछू बोल्‍तु काये ना ।

मैंने कहा अब तुमई सिग कछु कहिवे चिपटे हो अब हम का कहें । हम तो जे कहि रहे हैं चुप्‍प रहू, पुरानी कहावत है कि ''रहिमन चुप है बैठिये देखि दिनन को फेर'' सो भईया हम तो चुप्‍प है , पर तुम जे सब बातें कहि रहे हो जे सब गैर कानूनी हैं अगर काऊये पतो लग गईं तो सिगते पहले तिहाओ एनकाउण्‍टर करवाय डारेगो ।

एक किसान गुस्‍से में खौल जाता है, अये तू तो कहेगो ही, तैंनेंई वाये वोट देवेके लईं कही हती सो अब रोय रहे हैं, दो दिना बाद बिजली आय रही है दो घण्‍टा के काजें हमनि पूछि हमनि पे का बीत रही हैं । जा जाय के कहि दीयो वाते हमाओ करवाय दे एनकाउण्‍टर, कटवाय दे मूसर । जाते तो रूस्‍तम तऊ ठीक हतो, भलेऊं गूजर हतो, सुनि तऊ लेतो भलेऊं कछू करतु नहीं हतो । जा तू हमनि फांसी चढ़वाय दीयो । बई बरेह के पीपरा पे ।

मैंने बात संभालते हुये कहा कि भई जे सब बातें गुस्‍से से नहीं ठण्‍डे दिमाग से भी तो हल हो सकतीं हैं, अब जो बिगड़ गया सो बिगड़ गया, आगे ठीक कर लेओ, आगें सो वाय वोट मत दीओ ।

दूसरा किसान और ज्‍यादा आक्राशित हो जाता है , का वोट मत दीओ बुआ वो कलेक्‍टर भ्रष्‍ट बैठो है, काऊये वोट दे अईयो पेटी खुलेगी तो बई के ई वोट कढ़वावेगो । सारे ने ठाकुरनि की तो सिगई सीट रिजरब कर दईं हैं, लेउ सारे हो कैसे लरोगे चुनाव । मैंने कहा कि भई अभी तो नगरपालिका के आरक्षण की प्रक्रिया हुयी है, ग्राम पंचायत की तो बाद में होगी, अभी कैसे कह सकते हो कि ठाकुरों की सीटें रिजर्व कर दी जायेंगी........

लगे हाथ मेरी बात पूरी होने से पहले ही किसान उखड़ता हुआ बोला कि अये लला हमनि सिग पतो है हमऊं नेकाध राजनीति जान्त हैं । नगरपालिका में तहॉं हरिजन हतई नाने ते सीटें हरिजन कर दई हैं , सारे ठाकुर बामन तो अब पारसद अध्‍यक्ष कितऊं बनई नानें सकतई, वो अपईं गैल के काटें झार रहो है । वाने सिग ठाकुर बामननि की गैल बन्‍द कर दईं हैं और देखि लीयो हमऊं चैलेन्‍ज ते कहि रहे हैं, सारो पंचायतिन में ऊ जिई करेगो । सिग ठाकुर बामननि ए घर बैठारेगो । और तऊ एकाध कितऊं ते लरेगो तो सरकार बाई की है लबरई ते मशीनन में तो और पेटीन में तो बई के वोट कढ़ेंगे ।

मैंने आगे बहस उचित नहीं समझी और नहंद आने का बहाना करके खिसक कर अपने पलंग पर जा लेटा ।

लेकिन ग्रामीणों की उन बातों ने मुझे झिझोड़ कर रख दिया । उनकी समझ और तर्कों के आगे मैं खुद को काफी बौना महसूस कर रहा था । 

शनिवार, अक्टूबर 17, 2009

मुरैना के बिजली अधिकारीयों के खिलाफ जालसाजी और कूटरचित बिल बनाने के और मामले दर्ज

मुरैना के बिजली अधिकारीयों के खिलाफ जालसाजी और कूटरचित बिल बनाने के और मामले दर्ज

मुरैना 14 अक्‍टूबर 09, मुरैना विद्युत वितरण कम्‍पनी के और भी कई आला अधिकारीयों के खिलाफ जालसाजी कर कूट रचित विद्युत बिल दिये जाने के और भी कई गंभीर मामले भारत सरकार के उपभोक्‍ता मंत्रालय के तहत कार्यरत कोर सेण्‍टर एवं पुलिस को दर्ज कराने हेतु प्राप्‍त हुये हैं , प्रकरण प्रथम दृष्‍टया सही पाये जाने से इन्‍हें दर्ज करने की कार्यवाही की जा रही है फिलहाल इनका इन्‍वेस्‍टीगेशन भी एडवोकेट नरेन्‍द्र सिंह तोमर द्वारा तैयार करके रिपोर्ट तैयार की गयी है । यह रिपोर्ट भी सी.बी.आई. एवं आर्थिक अन्‍वेषण ब्‍यूरो की ओर वरिष्‍ठ अभिभाषक पदम चन्‍द गुप्‍ता के प्रकरण के साथ भेजी जा रही है । प्रकरण की शिकायत ऑनलाइन महामहिम राष्‍ट्रपति एवं प्रशासनिक सुधार मंत्रालय को भी की जा रही है ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स द्वारा खबर लिखे जाने तक मुरैना विद्युत वितरण कम्‍पनी के एस.ई. एस.के.सचदेवा, डी.ई. आर.के.गुप्‍ता, ए.ई. पी.के.शर्मा के कार्यालयीन फोनों पर तथा मोबाइल फोनों पर कई फोन लगाये गये लेकिन अधिकारीयों के फोन नाट रिस्‍पाण्डिंग आ रहे थे ।