रविवार, दिसंबर 02, 2007

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा 67 लाख रूपये का विद्युत उपकेन्द्र मुरैना में लोकार्पित

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा 67 लाख रूपये का विद्युत उपकेन्द्र मुरैना में लोकार्पित

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा 67 लाख रूपये का विद्युत उपकेन्द्र मुरैना में लोकार्पित

 

मुरैना 2 दिसम्बर 07- प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह की अध्यक्षता में आज मुरैना जिले में आयोजित एक समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बडोखर में 67 लाख रूपये की लागत से बने 33/11 के­. वी. के विद्युत उपकेन्द्र का लोकार्पण किया । इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि मुरैना जिले में विद्युत व्यवस्थाएं सुधारने के लिए मध्यप्रदेश शासन ने 32 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की है । आने वाले दिनों में मुरैना विधान सभा क्षेत्र विजली के मामले में चकाचक हो जायेगा । श्री तोमर ने कहा कि पिछले 50 वर्षो में विद्युत का उत्पादन मात्र 2700 मेगावाट था, जिसे वर्तमान प्रदेश सरकार ने बढाकर  साढे तीन वर्षो में 6 हजार मेगावाट कर दिया है । प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान बिजली और सडक पर विशेष ध्यान दे रहे है । पेशे से किसान होने के कारण मुख्यमंत्री गांव के विकास पर भी अधिक जोर दे रहे है । उन्होंने किसानों के 5 हार्सपावर के मोटर पंपों के बिजली के बकाया की 2293 करोड की राशि मांफ की है तथा छोटे किसानों पर लंबित 510 करोड रूपये के विलों को माफ करवाया है । श्री तोमर ने कहा कि शासन विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए बहुत कुछ कर रहा है । जनता से भी इसमें सहयोग की अपेक्षा है । उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वह विद्युत तार चोरी रोकने में मदद करे तथा अपने बिजली के विलों का पूरा व समय पर भुगतान करे, ताकि भविष्य में सभी को सस्ती व आसानी से बिजली मिल सके ।

              इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने कहा कि विद्युत अधिकारियों की सक्रियता से बडोखर का यह विद्युत उपकेन्द्र अल्प समय में तैयार हुआ है । इससे मुरैना शहर के फाटक बाहर, उत्तमपुरा क्षेत्र तथा बडोखर, मुडियाखेरा, जेवराखेरा एवं काशीपुर सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की व्यवस्था में सुधार होगा तथा आसानी से अच्छे वोल्टेज में बिजली मिल सकेगी । शासन ने बडोखर उपकेन्द्र के अतिरिक्त पोरसा, थरा, देवगढ, रिठौरा एवं नूराबाद आदि स्थानों पर भी विद्युत उपकेन्द्र स्वीकृत किये है, जो जल्दी ही प्रारंभ हो जायेगें । श्री रूस्तम सिंह ने कहा कि मुरैना शहर के लिए 16 करोड रूपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे सभी खम्भे व तार नये लगाये जायेंगे । 700 नये ट्रान्सफार्मर भी लगाने की योजना है । इसी प्रकार अम्बाह में भी 6 करोड़ 70 लाख रूपये की लागत से खम्भाें एवं तारों को बदला जायेगा । मुरैना जिले में चल रही विद्युत सुधार की योजनाएं आगामी मई 2008 तक पूरी होने की संभावना है ।

              इस अवसर पर कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री अर्गल ने कहा कि इस विद्युत उपकेन्द्र के प्रारंभ हो जाने से ग्रामीण किसानों एवं शहर के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा । कार्यक्रम में एम.पी.एग्रो के चेयरमेन श्री मुन्शीलाल, केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री शिवमंगल सिंह तोमर, ग्वालियर साडा के अध्यक्ष श्री जयसिंह कुशवाह, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह, विद्युत वितरण कंपनी के सी एम डी श्री संजय शुक्ला, मुख्य अभियंता श्री जी.एस. कल्सी, अधीक्षण यंत्री श्री बी.पी. गर्ग, संभागीय अभियंता श्री आर.के.एस. राठौर सहित विद्युत कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारी,  श्री सुल्तान सिंह हर्षाना तथा पत्रकारगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे ।

शनिवार, नवंबर 24, 2007

नाकारा, लापरवाह और अक्षम अफसरों ने बेशर्मी से पहनीं मालायें : कांग्रेस की गांधीगिरी

नाकारा, लापरवाह और अक्षम अफसरों ने बेशर्मी से पहनीं मालायें : कांग्रेस की गांधीगिरी

 

भिण्‍ड 24 नवम्‍बर 2007 चम्‍बल अन्‍चल में भारी बिजली कटौती के चलते भिण्‍ड के कांग्रेसियों ने हर प्रकार के विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों से उक्‍ताकर और लाइलाज बिजली कटौती की समस्‍या पर लड़ थककर अंतत: गांधीगिरी का रास्‍ता अख्‍त्‍यार कर लिया है और बिजली कटौती की समस्‍या पैदा करने हेतु बिजली अधिकारियों को पुष्‍प मालायें पहनाकर व पुष्‍प अर्पित कर सम्‍मानित करना शुरू कर दिया है और व्‍यंगात्‍मक कटाक्ष भी किये जा रहे हैं इससे बिजली विभाग में खासा हड़कंप मच गया है अधिकारियों के बेशर्मी से मुस्‍कराते हुये मालायें पहनते अंचल के विख्‍यात समाचार पत्र दैनिक भास्‍कर द्वारा कई फोटो प्रकाशित किये गये हैं और तीखा कटाक्ष किया गया है ।

        लोगों में कांग्रेस और मीडिया का यह संयुक्‍त अभियान काफी लोकप्रिय और चर्चित हो गया है । जो अधिकारी कार्यालयों में नहीं मिलते उनके टेबिलों पर पुष्‍प गुच्‍छ और महात्‍मा गांधी का एक चित्र पुष्‍प माला रखकर छोड़ दिया जाता है इसके साथ ही एक अभिनंदन पत्र भी दिया जाता है जिसमें लिखा रहता है कि '' साहब गांवों में बिजली की इतनी बेहतर व्‍यवस्‍थाऐं इससे पहले कभी नहीं रहीं न तो बिजली जा रही है और ना ही लाइनें टूट रही हैं बिजली के न आने से बिजली के बार-बार जाने की समस्‍या पूरी तरह से समाप्‍त हो गयी है और भ्रष्‍टाचारी पर तो पूरी तरह अंकुश लग गया है''!

फफककर रो पड़ा एक बिजली कर्मचारी

जहां नाकारा बिजली अफसर मुस्‍कराते हुये माला पहनकर फोटो खिंचवाते रहे वहीं बिजली कम्‍पनी के ग्रामीण कार्यालय में पदस्‍थ एक कर्मचारी की आंखों से आंसू निकल पड़े और वह फफक कर रो पड़ा ।

 

शनिवार, अक्टूबर 27, 2007

चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट

हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।

चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट

कहाँ तक बयां करें हालात ए गुलिस्तां, यहाँ हर शाख पे उल्लू बैठा है

नोट इस समाचार में पूर्व में प्रकाशित समाचारों के कतिपय अंश तारतम्‍यवश यथावत अंत में रख लिये गये हैं  

मुरैना 27 अक्‍तूबर 07 ! फर्जी दावे करने झूठी वाहवाही बटोरने में लगी म.प्र. सरकार की पीठ पिछाड़ी भारतीय जनता पार्टी भारत सरकार के परमाणु करार का विरोध कर देश को बिजली मिलने और बनाने से रोकने के लिये भले ही नंगा नाच रच रही हो, लेकिन बी.बी.सी. हिन्‍दी द्वारा विचार प्रतिक्रिया स्‍तम्‍भ में भारत की जनता ने ''परमाणु करार विरोधीयों और बिजली समस्‍या पैदा कर देश का विकास ठप्‍प कर फर्जी बातें करने वाले, परमाणु करार से देश में बिजली पैदा न होने देने और राष्‍ट्र को बिजली संकट में फंसाये रखने वाले ऐसे जनविरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों और राजनेताओं के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है, यह स्‍तम्‍भ अभी बीबीसी पर जारी है आप पढ़ सकते हैं कि भारत की जनता इनके बारे में क्‍या कहती है ।    

और दावे दर दावे तथा आश्‍वासन दर आश्‍वासन के बावजूद पूरी तरह फेल हो चुकी सरकार की नपुंसकता के चलते अंततोगत्वा पिछले 12 अक्‍टूबर से चम्बल घाटी में कहर मचा रही बिजली व्यवस्था अपने चरम पर आकर जहॉं हिन्‍दूओं के प्रमुख आस्‍था एवं भक्ति पर्व नवरात्रि आरम्‍भ वाले दिन 12 अक्‍तूबर को ही न केवल पूरे दिन ही गुल रही वहीं रात को भी हिन्‍दूवादी भाजपा सरकार ने लोगों को माता की आरती तक नहीं करने दी । जहॉं व्रत उपवास कर नवरात्रों में लोग माता की भक्ति उपासना व अर्चना पूजा के लिये साल भर से उस दिवस का इन्‍तजार करते हैं जब माता घर में विराज कर प्रत्‍येक हिन्‍दू के घर नौ दिन की मेहमानी करती हैं, लोग व्रत उपवास तो छोडि़ये नहा धो भी नहीं पाये, माता की कलश व घट स्‍थापना पवित्र जल भर कर की जाती है तथाकथित हिन्‍दूओं के हिमायती भाजपाईयों ने लोगों को इस दिन ऐन माता की प्रतिष्‍ठा व स्‍थापना के दिन यानि 12 अक्‍तूबर को ही एक एक बूंद पानी के लिये तरसा दिया । बिल्‍कुल ठीक यही हालात अष्‍टमी वाले दिन यानि अंतिम पर्व दिवस यानि 19 अक्‍टूबर को जब कि लोग इस दिन पूरे दिन अनुष्‍ठान व यज्ञ हवन आदि करते हैं को भी सुबह 6 बजे गुल हुयी बिजली रात आठ बजे आई । लो भईया कर लो पूजा और हवन । बुधवार 17 अक्‍टूबर को पूरे 17 घण्‍टों के लिये पूर्णत: ठप्प हो ही गयी ! मजे की बात यह है कि हम एक सम्‍भागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना की बात कर रहे हैं । गॉंवों और किसानों का आलम तो यह है कि अगर दिन भर में बीस मिनिट भी मिल जाये तो समझिये ''यूरेका यूरेका '' यानि मतलब समझ गये होंगे आप । समूची चम्‍बल घाटी का आलम यही है जनाब ।

उल्लेखनीय है कि विगत 12 अक्‍टूबर 07 से चम्बल घाटी की बिजली सप्लाई पूरी तरह चरमरा गयी थी और दिन में पीक वर्किंग टाइम में लगभग 6-7 घण्‍टे तथा रात में करीब 3-4 घण्टे की बेहिसाब अनाप शनाप कटौती चल रही थी, जिसका न समय तय था न कोई घोषणा ही इस मुतल्लिक जारी हुयी थी !

उधर दूसरी ओर सरकार दावा दर दावा ठोकने में लगी थी कि हम बहुत ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं और अब कोई बिजली संकट नहीं है ! जबकि सच यह है कि चम्बल में धुंआधार कटौती चल रही थी !

अभी हाल ही में राष्‍ट्रीय जनता दल के मध्‍यप्रदेश के महासचिव नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द'' ने दिनांक 29 सितम्‍बर 2007 को लिखित शिकायती आवेदन चम्‍बल सम्‍भाग के अधीक्षण यंत्री को दिया था, जिसकी पावती ग्‍वालियर टाइम्‍स के कार्यालय में सुरक्षित है, यदि इस आवेदन को ही पढ़ लिया जाता और इस पर कार्यवाही कर दी गयी होती तो चम्‍बल सम्‍भाग में मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी के शराबी अधिकारी और कर्मचारीयों की करनी व करतूतों की न केवल सच्‍चाई सामने आ जाती बल्कि चम्‍बल की बिजली कटौती की समस्‍या भी सुलझ गयी होती । ( हम इस आवेदन की फोटो प्रति स्‍कैन कर अलग से विस्‍तृत आलेख इस सम्‍बन्‍ध में शीघ्र जारी करेंगें जो कि ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह की सभी वेबसाइटों पर उपलब्‍ध होगा । आप भी इस अंधेरगर्दी, भ्रष्‍टाचार और गुण्‍डागर्दी की कहानी का ऑखों देखा हाल भुक्‍तभोगी की जुबानी मय सबूत पढ़ सकेगें ) श्री तोमर का यह आवेदन आज की तारीख तक कार्यवाही के लिये लम्बित है । 

अभी हाल ही में म.प्र. के एक मंत्री रूस्‍तम सिंह ने मुरैना जिले में की जा रही अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती पर बिजली वितरण कम्‍पनी पर ऑंखे तरेरते हुये गीदड़ भभकी दी थी, लेकिन वह बेअसर रही ।  

अभी हाल ही में दो बड़े बिजली उत्पादन के अडडे जहाँ उदघाटित हुये हैं जिसमें एक लालकृष्ण आडवाणी जी ने किया वहीं दूसरा मुरैना के ऐन निकट ही ग्वालियर जिले में केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने किया ! जिसमें दावा यह था कि म.प्र. विशेषकर चम्बल ग्वालियर की बिजली समस्या अब पूर्णत: समाप्त !

उधर भगवान की दया से प्रदेश में बरसात भी अच्छी भली चल रही है, बाढ़ आ रही है, बांधो के इमरजेन्सी गेट खोल कर जरूरत से ज्यादा इकठठा हुआ पानी निकालना पड़ रहा है !

फिर भी बिजली नहीं होना जहाँ हैरत अंगेज और गजब की जादूगिरी है वहीं कुछ चौंकाने वाले सवालों की भी जन्मदाता ! मसलन बिना बिजली मिले म.प्र. की जनता अरबों रूपया की बिल भरपाई वर्ष सनृ 2000 से करती आ रही है ! उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एवरेज बिलर्स की संख्या 70 फीसदी है, जिन्हें बिजली मिले या न मिले एक निश्चित औसत राशि बिजली विभाग को देनी ही पड़ती है ! और यह राशि प्रतिमाह करोड़ों रू में और वर्ष 2000 से अब तक अरबों रू में पहुँच चुकी है !

जहाँ सरकार बिजली चोरी और जनता को चोर ठहराने में कोई कसर बकाया नहीं रखती वही अब यह सवाल भी जोरदार है कि बिना बिजली दिये की गयी अरबों रू की यह वसूली क्या नाहक नहीं है ? और क्या सरकार चोर नहीं है ? जिसने जनता की जेब पर डाका डाला है ! सरकार में यदि भलमनसाहत है तो पहले तो उनका पैसा लौटाये जिन्होंने इतने वर्ष तक बिना बिजली मिले भी पूरा बिल भुगतान किया है, उनकी बिजली तो कटी लेकिन बिलों में कटौती या उनकी धन वापसी की बात अभी तक क्यों नहीं हुयी ! यह सवाल यक्ष प्रश्न है, जिसका उत्तर सरकार को जनता को चोर कहने से पहले अनिवार्यत: देना होगा, तभी जनता के गले बात उतरेगी, वरना जनता आपको चोर कहती रहेगी, और आप जनता को !

विगत सोमवार 6 अगस्त से 8 अगस्त जो चम्बल में बिजली सप्लाई का जो कहर हुआ वह न केवल शर्मनाक बल्कि संभवत: म.प्र. के इतिहास में पहली बार हुआ जबरदस्त बलैक आउट है ! जिसमें 6 अगस्त सुबह से लेकर सारे दिन और सारी रात फिर 7 अगस्त को सारा दिन और सारी रात फिर 8 अगस्त को दोपहर 12 बजे तक लगातार सप्लाई ठप्प यानि पूर्णत: बन्द यानि ब्लैकआउट ! फिर दोबारा 8 अगस्त को शाम 4 बजे से रात 7:45 बजे तक पुन: सप्लाई बन्द ! गजब, अदभुत, चमात्कारिक, वाह क्या कहने ! बिजली वाले हुये या अलाउददीन के चिराग के जिन्न !

अब इसमें लोग कह रहे थे कि भईया आरक्षण की भर्ती है, आरक्षण का स्टाफ है तो यह तो होना ही है , अब ऐसी अवस्था में यदि लोग ऐसा कहते हैं तो हम पूछते हैं कि क्या गलत कहते हैं ! आरक्षण के नाम पर अयोग्य लोगों या कम योग्य लोगों के सहारे ऐसे संवेदलशील टैक्नीकल काम छोड़े जायेंगे तो यह तो होगा ही ! अव्वल तो वे कुछ जानते ही नहीं, दूसरे हराम की चाट पंजीरी का ऐसा स्वाद उनके मुँह लगा है कि, सरकार बाद में बिजली बेच पायेगी वे यहीं फैक्ट्रयों और इण्डस्ट्रियों में जम कर बिजली बेच देते हैं, उनके बैंक बैलेन्स और कोठीयों की लम्बाई चौड़ाई तो लगभग यही कहानी कहती है ! वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि बजली वालों को चोर और डकैतों से हफ्ता वसूली मिलती है, और कब कब कहाँ की बिजली गुल की जायेगी इसकी खबर चोरों डकैतों को रहती है और बिजली विभाग के गुप्त शिडयूल के अनुसार ही उनका गुप्त शिडयूल चलता है ! अगर लोग ऐसा कहते हैं, तो अब लोग क्या गलत कहते हैं ? 

उल्लेखनीय है कि मुरैना और भिण्ड दोनों ही जिलों में बिजली को लेकर अभी हाल ही पिछले दस पन्द्रह दिनों में भारी जनआक्रोश और उपद्रव हुआ जहाँ महिलाओं ने जगह जगह कई आन्दोलन किये और पुतले फूंके, बिजली वालों की धुनाई पिटाई कर डाली वहीं लगता है सारी चम्बल घाटी में महिलाओं की फौज मानो कमर कसकर विद्रोह और विरोध पर उतारू है और प्रदर्शन, धरना, विरोध से लेकर धुनाई पिटाई भी उनके आन्दोलन का हिस्सा है, मजे की बात ये है कि उनके साथ कोई राजनीतिक दल नहीं हैं, जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है !

पिछले सप्ताह म.प्र. शासन के पूर्व कांग्रेस मंत्री राकेश चौधरी को जरूर भिण्ड में बिजली समस्या को लेकर न केवल सड़कों पर आना पड़ा बल्कि भिण्ड कलेक्ट्रेट की तालाबन्दी करना पड़ी, उनके तालाबन्दी आन्दोलन को जनता का इतना व्यापक समर्थन मिला कि भिण्ड की सडृकों पर जनता समाये नहीं बन रही थी, उन्होंने न केवल कुशलता और सफलतापूर्वक कलेक्ट्रेट भिण्ड की तालाबन्दी कर दी बल्कि जनता के हीरो भी बन गये ! यह भी स्मरणीय है कि भिण्ड के वर्तमान भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह भी बिल्कुल ठीक इसी तरह विधायक बने ! बस फर्क यह था कि उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इसी बिजली के लिये आन्दोलन नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने इसी तरह जनता को साथ लेकर किया था ! और कई बिजली वालों की पिटाई धुनाई की थी, और पहले वे अखबारों की सुर्खियां बनें, फिर भिण्ड के विधायक ! तब राकेश चौधरी भिण्ड के विधायक और बाद में सरकार के मंत्री थे ! अब बिल्कुल वही सिचुएशन एकदम उल्टी है ! यानि आप समझ ही गये होंगे कि इसका अर्थ क्या है !

मुरैना की स्थिति थोड़ी भिन्न है, विशुध्द रूप से आरक्षित सीट रहने और भाजपा का अखण्ड गढ़ रहने से यहाँ जननेतृत्व का अभाव है, यहाँ के विधायक, सांसद जननेता की परिभाषा से परे हैं , चाटुकारिता और कृपालुता के भरोसे राजनीति करने वाले नेताओं के साये में मुरैना जिला की जनता को अपनी लड़ाई खुद लड़ना पड़ती है, लड़ती आयी है, और लड़ भी रही है ! नेता, विधायक, मंत्री, सांसद सब अपनी अपनी पीठ खुद ही थपथपाते रहते हैं, थपथपा रहे हैं, उनका हमेशा ही खैरियत अलार्म और ''जी सर'' ''यस सर'' तकिया कलाम चालू रहता है !      

जनता चोर और वे साहूकार, वाह भई वाह उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे ! लोकतंत्र में जनता कोतवाल होती है, और सरकार चोर, लोकतंत्र का मतलब तो यही है भईया ! जनता अधिकारी होती है, और सरकारी लोग उसके नौकर यानि सेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट ! मगर यहाँ तो उल्टी ही गंगा बह रही है ! 

क्या कहता है बिजली विभाग  ?

आज के दैनिक भास्कर में बिजली विभाग का स्पष्टीकरण यानि पक्ष प्रकाशित है, हम दैनिक भास्कर से साभार इसे यहाँ दे रहे हैं - महकमे के बिजली के तार चार पाँच जगह पर टूट गये थे, रात का समय होने की वजह से तारों को जोड़ा नहीं जा सके, हालांकि बुधवार की दोपहर को शहर की आपूर्ति को सामान्य बना लिया गया है- पी.के.सिंह, एस.ई. विद्युत मण्डल मुरैना !

क्या उक्त पक्ष स्पष्टीकरण से कुछ जाहिर नहीं होता - 1. ये लोग 24 घण्टे के पूर्णकालिक कर्मचारी यानि लोकसेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट नहीं हैं 2. बिजली के तार टूटना एक सामान्य और आम बात है जो सनृ 2000 से आज तक रोजाना हो रही है 3. ट्रान्सफार्मर फुंकना आम बात है जो सन 2000 से रोजाना फुंक रहे हैं 4. रात के वक्त बिजली महकमा काम नहीं करता 5. चार पाँच जगह के बिजली के तार तीन दिनों में जोड़ पाते हैं बेचारे 6. दारू पीकर होश में आने में कर्मचारीयों को तीन दिन से ज्यादा भी लग जाते हैं !

 

शुक्रवार, अक्टूबर 26, 2007

हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।

चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट

कहाँ तक बयां करें हालात ए गुलिस्तां, यहाँ हर शाख पे उल्लू बैठा है

नोट इस समाचार में पूर्व में प्रकाशित समाचारों के कतिपय अंश तारतम्‍यवश यथावत अंत में रख लिये गये हैं  

मुरैना 20 अक्‍तूबर 07 ! फर्जी दावे करने झूठी वाहवाही बटोरने में लगी म.प्र. सरकार की पीठ पिछाड़ी भारतीय जनता पार्टी भारत सरकार के परमाणु करार का विरोध कर देश को बिजली मिलने और बनाने से रोकने के लिये भले ही नंगा नाच रच रही हो, लेकिन बी.बी.सी. हिन्‍दी द्वारा विचार प्रतिक्रिया स्‍तम्‍भ में भारत की जनता ने ''परमाणु करार विरोधीयों और बिजली समस्‍या पैदा कर देश का विकास ठप्‍प कर फर्जी बातें करने वाले, परमाणु करार से देश में बिजली पैदा न होने देने और राष्‍ट्र को बिजली संकट में फंसाये रखने वाले ऐसे जनविरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों और राजनेताओं के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है, यह स्‍तम्‍भ अभी बीबीसी पर जारी है आप पढ़ सकते हैं कि भारत की जनता इनके बारे में क्‍या कहती है ।    

और दावे दर दावे तथा आश्‍वासन दर आश्‍वासन के बावजूद पूरी तरह फेल हो चुकी सरकार की नपुंसकता के चलते अंततोगत्वा पिछले 12 अक्‍टूबर से चम्बल घाटी में कहर मचा रही बिजली व्यवस्था अपने चरम पर आकर जहॉं हिन्‍दूओं के प्रमुख आस्‍था एवं भक्ति पर्व नवरात्रि आरम्‍भ वाले दिन 12 अक्‍तूबर को ही न केवल पूरे दिन ही गुल रही वहीं रात को भी हिन्‍दूवादी भाजपा सरकार ने लोगों को माता की आरती तक नहीं करने दी । जहॉं व्रत उपवास कर नवरात्रों में लोग माता की भक्ति उपासना व अर्चना पूजा के लिये साल भर से उस दिवस का इन्‍तजार करते हैं जब माता घर में विराज कर प्रत्‍येक हिन्‍दू के घर नौ दिन की मेहमानी करती हैं, लोग व्रत उपवास तो छोडि़ये नहा धो भी नहीं पाये, माता की कलश व घट स्‍थापना पवित्र जल भर कर की जाती है तथाकथित हिन्‍दूओं के हिमायती भाजपाईयों ने लोगों को इस दिन ऐन माता की प्रतिष्‍ठा व स्‍थापना के दिन यानि 12 अक्‍तूबर को ही एक एक बूंद पानी के लिये तरसा दिया । बिल्‍कुल ठीक यही हालात अष्‍टमी वाले दिन यानि अंतिम पर्व दिवस यानि 19 अक्‍टूबर को जब कि लोग इस दिन पूरे दिन अनुष्‍ठान व यज्ञ हवन आदि करते हैं को भी सुबह 6 बजे गुल हुयी बिजली रात आठ बजे आई । लो भईया कर लो पूजा और हवन । बुधवार 17 अक्‍टूबर को पूरे 17 घण्‍टों के लिये पूर्णत: ठप्प हो ही गयी ! मजे की बात यह है कि हम एक सम्‍भागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना की बात कर रहे हैं । गॉंवों और किसानों का आलम तो यह है कि अगर दिन भर में बीस मिनिट भी मिल जाये तो समझिये ''यूरेका यूरेका '' यानि मतलब समझ गये होंगे आप । समूची चम्‍बल घाटी का आलम यही है जनाब ।

उल्लेखनीय है कि विगत 12 अक्‍टूबर 07 से चम्बल घाटी की बिजली सप्लाई पूरी तरह चरमरा गयी थी और दिन में पीक वर्किंग टाइम में लगभग 6-7 घण्‍टे तथा रात में करीब 3-4 घण्टे की बेहिसाब अनाप शनाप कटौती चल रही थी, जिसका न समय तय था न कोई घोषणा ही इस मुतल्लिक जारी हुयी थी !

उधर दूसरी ओर सरकार दावा दर दावा ठोकने में लगी थी कि हम बहुत ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं और अब कोई बिजली संकट नहीं है ! जबकि सच यह है कि चम्बल में धुंआधार कटौती चल रही थी !

अभी हाल ही में राष्‍ट्रीय जनता दल के मध्‍यप्रदेश के महासचिव नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द'' ने दिनांक 29 सितम्‍बर 2007 को लिखित शिकायती आवेदन चम्‍बल सम्‍भाग के अधीक्षण यंत्री को दिया था, जिसकी पावती ग्‍वालियर टाइम्‍स के कार्यालय में सुरक्षित है, यदि इस आवेदन को ही पढ़ लिया जाता और इस पर कार्यवाही कर दी गयी होती तो चम्‍बल सम्‍भाग में मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी के शराबी अधिकारी और कर्मचारीयों की करनी व करतूतों की न केवल सच्‍चाई सामने आ जाती बल्कि चम्‍बल की बिजली कटौती की समस्‍या भी सुलझ गयी होती । ( हम इस आवेदन की फोटो प्रति स्‍कैन कर अलग से विस्‍तृत आलेख इस सम्‍बन्‍ध में शीघ्र जारी करेंगें जो कि ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह की सभी वेबसाइटों पर उपलब्‍ध होगा । आप भी इस अंधेरगर्दी, भ्रष्‍टाचार और गुण्‍डागर्दी की कहानी का ऑखों देखा हाल भुक्‍तभोगी की जुबानी मय सबूत पढ़ सकेगें ) श्री तोमर का यह आवेदन आज की तारीख तक कार्यवाही के लिये लम्बित है । 

अभी हाल ही में म.प्र. के एक मंत्री रूस्‍तम सिंह ने मुरैना जिले में की जा रही अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती पर बिजली वितरण कम्‍पनी पर ऑंखे तरेरते हुये गीदड़ भभकी दी थी, लेकिन वह बेअसर रही ।  

अभी हाल ही में दो बड़े बिजली उत्पादन के अडडे जहाँ उदघाटित हुये हैं जिसमें एक लालकृष्ण आडवाणी जी ने किया वहीं दूसरा मुरैना के ऐन निकट ही ग्वालियर जिले में केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने किया ! जिसमें दावा यह था कि म.प्र. विशेषकर चम्बल ग्वालियर की बिजली समस्या अब पूर्णत: समाप्त !

उधर भगवान की दया से प्रदेश में बरसात भी अच्छी भली चल रही है, बाढ़ आ रही है, बांधो के इमरजेन्सी गेट खोल कर जरूरत से ज्यादा इकठठा हुआ पानी निकालना पड़ रहा है !

फिर भी बिजली नहीं होना जहाँ हैरत अंगेज और गजब की जादूगिरी है वहीं कुछ चौंकाने वाले सवालों की भी जन्मदाता ! मसलन बिना बिजली मिले म.प्र. की जनता अरबों रूपया की बिल भरपाई वर्ष सनृ 2000 से करती आ रही है ! उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एवरेज बिलर्स की संख्या 70 फीसदी है, जिन्हें बिजली मिले या न मिले एक निश्चित औसत राशि बिजली विभाग को देनी ही पड़ती है ! और यह राशि प्रतिमाह करोड़ों रू में और वर्ष 2000 से अब तक अरबों रू में पहुँच चुकी है !

जहाँ सरकार बिजली चोरी और जनता को चोर ठहराने में कोई कसर बकाया नहीं रखती वही अब यह सवाल भी जोरदार है कि बिना बिजली दिये की गयी अरबों रू की यह वसूली क्या नाहक नहीं है ? और क्या सरकार चोर नहीं है ? जिसने जनता की जेब पर डाका डाला है ! सरकार में यदि भलमनसाहत है तो पहले तो उनका पैसा लौटाये जिन्होंने इतने वर्ष तक बिना बिजली मिले भी पूरा बिल भुगतान किया है, उनकी बिजली तो कटी लेकिन बिलों में कटौती या उनकी धन वापसी की बात अभी तक क्यों नहीं हुयी ! यह सवाल यक्ष प्रश्न है, जिसका उत्तर सरकार को जनता को चोर कहने से पहले अनिवार्यत: देना होगा, तभी जनता के गले बात उतरेगी, वरना जनता आपको चोर कहती रहेगी, और आप जनता को !

विगत सोमवार 6 अगस्त से 8 अगस्त जो चम्बल में बिजली सप्लाई का जो कहर हुआ वह न केवल शर्मनाक बल्कि संभवत: म.प्र. के इतिहास में पहली बार हुआ जबरदस्त बलैक आउट है ! जिसमें 6 अगस्त सुबह से लेकर सारे दिन और सारी रात फिर 7 अगस्त को सारा दिन और सारी रात फिर 8 अगस्त को दोपहर 12 बजे तक लगातार सप्लाई ठप्प यानि पूर्णत: बन्द यानि ब्लैकआउट ! फिर दोबारा 8 अगस्त को शाम 4 बजे से रात 7:45 बजे तक पुन: सप्लाई बन्द ! गजब, अदभुत, चमात्कारिक, वाह क्या कहने ! बिजली वाले हुये या अलाउददीन के चिराग के जिन्न !

अब इसमें लोग कह रहे थे कि भईया आरक्षण की भर्ती है, आरक्षण का स्टाफ है तो यह तो होना ही है , अब ऐसी अवस्था में यदि लोग ऐसा कहते हैं तो हम पूछते हैं कि क्या गलत कहते हैं ! आरक्षण के नाम पर अयोग्य लोगों या कम योग्य लोगों के सहारे ऐसे संवेदलशील टैक्नीकल काम छोड़े जायेंगे तो यह तो होगा ही ! अव्वल तो वे कुछ जानते ही नहीं, दूसरे हराम की चाट पंजीरी का ऐसा स्वाद उनके मुँह लगा है कि, सरकार बाद में बिजली बेच पायेगी वे यहीं फैक्ट्रयों और इण्डस्ट्रियों में जम कर बिजली बेच देते हैं, उनके बैंक बैलेन्स और कोठीयों की लम्बाई चौड़ाई तो लगभग यही कहानी कहती है ! वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि बजली वालों को चोर और डकैतों से हफ्ता वसूली मिलती है, और कब कब कहाँ की बिजली गुल की जायेगी इसकी खबर चोरों डकैतों को रहती है और बिजली विभाग के गुप्त शिडयूल के अनुसार ही उनका गुप्त शिडयूल चलता है ! अगर लोग ऐसा कहते हैं, तो अब लोग क्या गलत कहते हैं ? 

उल्लेखनीय है कि मुरैना और भिण्ड दोनों ही जिलों में बिजली को लेकर अभी हाल ही पिछले दस पन्द्रह दिनों में भारी जनआक्रोश और उपद्रव हुआ जहाँ महिलाओं ने जगह जगह कई आन्दोलन किये और पुतले फूंके, बिजली वालों की धुनाई पिटाई कर डाली वहीं लगता है सारी चम्बल घाटी में महिलाओं की फौज मानो कमर कसकर विद्रोह और विरोध पर उतारू है और प्रदर्शन, धरना, विरोध से लेकर धुनाई पिटाई भी उनके आन्दोलन का हिस्सा है, मजे की बात ये है कि उनके साथ कोई राजनीतिक दल नहीं हैं, जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है !

पिछले सप्ताह म.प्र. शासन के पूर्व कांग्रेस मंत्री राकेश चौधरी को जरूर भिण्ड में बिजली समस्या को लेकर न केवल सड़कों पर आना पड़ा बल्कि भिण्ड कलेक्ट्रेट की तालाबन्दी करना पड़ी, उनके तालाबन्दी आन्दोलन को जनता का इतना व्यापक समर्थन मिला कि भिण्ड की सडृकों पर जनता समाये नहीं बन रही थी, उन्होंने न केवल कुशलता और सफलतापूर्वक कलेक्ट्रेट भिण्ड की तालाबन्दी कर दी बल्कि जनता के हीरो भी बन गये ! यह भी स्मरणीय है कि भिण्ड के वर्तमान भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह भी बिल्कुल ठीक इसी तरह विधायक बने ! बस फर्क यह था कि उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इसी बिजली के लिये आन्दोलन नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने इसी तरह जनता को साथ लेकर किया था ! और कई बिजली वालों की पिटाई धुनाई की थी, और पहले वे अखबारों की सुर्खियां बनें, फिर भिण्ड के विधायक ! तब राकेश चौधरी भिण्ड के विधायक और बाद में सरकार के मंत्री थे ! अब बिल्कुल वही सिचुएशन एकदम उल्टी है ! यानि आप समझ ही गये होंगे कि इसका अर्थ क्या है !

मुरैना की स्थिति थोड़ी भिन्न है, विशुध्द रूप से आरक्षित सीट रहने और भाजपा का अखण्ड गढ़ रहने से यहाँ जननेतृत्व का अभाव है, यहाँ के विधायक, सांसद जननेता की परिभाषा से परे हैं , चाटुकारिता और कृपालुता के भरोसे राजनीति करने वाले नेताओं के साये में मुरैना जिला की जनता को अपनी लड़ाई खुद लड़ना पड़ती है, लड़ती आयी है, और लड़ भी रही है ! नेता, विधायक, मंत्री, सांसद सब अपनी अपनी पीठ खुद ही थपथपाते रहते हैं, थपथपा रहे हैं, उनका हमेशा ही खैरियत अलार्म और ''जी सर'' ''यस सर'' तकिया कलाम चालू रहता है !      

जनता चोर और वे साहूकार, वाह भई वाह उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे ! लोकतंत्र में जनता कोतवाल होती है, और सरकार चोर, लोकतंत्र का मतलब तो यही है भईया ! जनता अधिकारी होती है, और सरकारी लोग उसके नौकर यानि सेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट ! मगर यहाँ तो उल्टी ही गंगा बह रही है ! 

क्या कहता है बिजली विभाग  ?

आज के दैनिक भास्कर में बिजली विभाग का स्पष्टीकरण यानि पक्ष प्रकाशित है, हम दैनिक भास्कर से साभार इसे यहाँ दे रहे हैं - महकमे के बिजली के तार चार पाँच जगह पर टूट गये थे, रात का समय होने की वजह से तारों को जोड़ा नहीं जा सके, हालांकि बुधवार की दोपहर को शहर की आपूर्ति को सामान्य बना लिया गया है- पी.के.सिंह, एस.ई. विद्युत मण्डल मुरैना !

क्या उक्त पक्ष स्पष्टीकरण से कुछ जाहिर नहीं होता - 1. ये लोग 24 घण्टे के पूर्णकालिक कर्मचारी यानि लोकसेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट नहीं हैं 2. बिजली के तार टूटना एक सामान्य और आम बात है जो सनृ 2000 से आज तक रोजाना हो रही है 3. ट्रान्सफार्मर फुंकना आम बात है जो सन 2000 से रोजाना फुंक रहे हैं 4. रात के वक्त बिजली महकमा काम नहीं करता 5. चार पाँच जगह के बिजली के तार तीन दिनों में जोड़ पाते हैं बेचारे 6. दारू पीकर होश में आने में कर्मचारीयों को तीन दिन से ज्यादा भी लग जाते हैं !

 

कृषि उपभोक्ताओं के लिए उर्जा संरक्षण उपाय


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

कृषि उपभोक्ताओं के लिए उर्जा संरक्षण उपाय

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कृषि पंप उपभोक्ताओं को उर्जा संरक्षण के उपाय बताये हैं। कंपनी ने कहा कि ऊर्जा घटक और वोल्टेज में सुधार के लिए मोटर के साथ सही क्षमता वाले आई.एस.आई. मार्क शन्ट कैपेसिटर का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे बिजली की बचत होती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्य क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे दिन में कुएं की बत्ती (पायलेट लेम्प) बंद रखें।

कंपनी ने कहा है कि घटिया मोटर-पंप सैट वास्तव में बिजली की ज्यादा खपत करते हैं और भविष्य में ज्यादा खर्चीले साबित होते हैं। इसलिए पंप खरीदते समय इनर्जी इफिशियन्ट पंप ही खरीदना चाहिए। कृषि उपभोक्ताओं को पाइप की ऊंचाई और क्षमता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त पंप सेट्स का प्रयोग करना चाहिए। बिजली की खपत को कम करने के लिए टयूब वेल में कम प्रतिरोधी (घर्षण) वाले फुटवाल्व लगाना चाहिए। ऊर्जा संरक्षण के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पी.वी.सी. सक्शन पाइप का प्रयोग करना चाहिए। इससे 20 प्रतिशत तक बिजली बच सकती है।

इसी तरह यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी के तल से मोटर पंप तीन मीटर से अधिक ऊपर नहीं हो। पानी का निकास भूमि-तल के निकटतम होना चाहिए। सिंचाई पंप की बियरिंग्स को नुकसान से बचाने के लिए मोटर और पंप को एक सीध में ही रखना चाहिए। यह ऊर्जा को बेकार होने से बचाता है। सिंचाई पंपों को नियमित रूप से पंप निर्माता कंपनी के बताए तरीके के अनुसार तेल एवं ग्रीस देते रहना चाहिए।

 

शुक्रवार, सितंबर 28, 2007

मध्यप्रदेश को पॉवर इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड

मध्यप्रदेश को पॉवर इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड

प्रदेश में ऊर्जा के क्षेत्र में विगत तीन वर्षों से की जा रही सतत सुधार की कोशिशें अब रंग लाने लगी हैं। हाल ही में इंडिया टेक फाउंडेशन द्वारा मध्यप्रदेश को विद्युत क्षेत्र सुधार एवं पहल विषयक अध्ययन (केस स्टडी) के लिए अखिल भारतीय पॉवर इंडिया एक्सीलेंस द्वितीय पुरस्कर दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

इस पुरस्कार के चयन के लिये उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस श्री ए.एम. एहमदी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। केस स्टडीज को प्रदेश के ऊर्जा सचिव श्री संजय बंदोपाध्याय और एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य प्रबंध संचालक श्री आर.के. वर्मा ने प्रस्तुत किया था। यह पुरस्कार नई दिल्ली में प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय तौर पर पुरस्कार के लिए चयनित सभी केस स्टडीज को आगामी 25 अक्टूबर को होने वाली पॉवर इंडिया 2007 इंटरनेशनल कान्फ्रेंस में भी प्रस्तुत किया जाएगा।

मध्यप्रदेश को नौवें पॉवर इंडिया सम्मिट एण्ड एक्सपो के मौके पर सूचना पण्डाल लगाने का न्यौता दिया गया है ताकि राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा विकास और सुधार की दिशा में किए गए उपायों से प्रतिनिधियों को अवगत कराया जा सके और इसे आदर्श निवेश राज्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। यह सम्मेलन मुंबई में 25 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होगा।

 

सोमवार, सितंबर 24, 2007

महामहिम किल्विष का अंधेरा कायम, किल्विष की राजधानी बनी चम्‍बल


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

मुरैना में बिजली कटौती का धुऑंधार धमैया, रविवार को 7 और सोमवार को 8 घण्‍टे का शटडाउन

महामहिम किल्विष का अंधेरा कायम, किल्विष की राजधानी बनी चम्‍बल

मुरैना । विगत 8 रोज पूर्व कॉंग्रेस नेता सोवरन सिंह मावई के बिजली समस्‍या पर बुलाये गये जंगी प्रदर्शन और विरोध दर्शन के बाद चन्‍द रोज के लिये मुरैना जिले में बिजली सप्‍लाई में अचानक सुधार आ गया था । श्री मावई का जंगी विरोध प्रदर्शन भी हो गया । उनके विरोध प्रदर्शन के खत्‍म होते ही चम्‍बल अंचल की बिजली सप्‍लाई फिर से पूर्ण रूपेण चरमरा गई है ।

रविवार 16 सितम्‍बर और सोमवार 17 सितम्‍बर को बिजली का अन्‍धाधुन्‍ध धुँआधार शटडाउन जारी रहा और इसके चलते रविवार को अंचल में 7 घण्‍टे का किल्‍िवष वाला अंधेरा कायम रहा और सोमवार को 8 घण्‍टे तक चम्‍बल पर किल्विष का राज कायम होकर अंधेरा कायम रहा ।

उल्‍लेखनीय है लोकप्रिय टी.वी.धारावाहिक शक्तिमान में किल्विष नामक एक राक्षस था जिसे अंधेरे का साम्राज्‍य स्‍थापित और संचालित करने में असीम सुख प्राप्‍त होता था ।

चम्‍बल घाटी इन दिनों महामहिम किल्विष के साम्राज्‍य का ही अंग बन गई है । या किल्विष की राजधानी बन गई है ,जहॉं हमेशा ही अंधेरा कायम रहता है ।