बुधवार, मई 23, 2007

चम्‍बल में तीन दिन कहर के, बिजली सप्‍लाई पूर्णत: ठप्‍प

चम्‍बल में तीन दिन कहर के, बिजली सप्‍लाई पूर्णत: ठप्‍प
लाम्‍बा की लम्‍बी कटौती ,अखबारों में खबर छापने के गुनाह का दण्‍ड भुगत रही है जनता  
मुरैना 18 जून 2006 । ग्‍वालियर टाइम्‍स समाचार सेवा । चम्‍बल पर पिछले तीन दिन कोहराम बन कर टूटे हैं, समूचे ग्रामीण अंचल सहित जिला एवं तहसील मुख्‍यालयों सहित संभागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना में विगत तीन दिनों से विद्युत सप्‍लाई एकदम ठप्‍प हो गयी है ।
भिण्‍ड, मुरैना जिलों की विद्युत सप्‍लाई एकदम बन्‍द होकर चम्‍बल अंचल में कहर का सा आलम छा कर हाहाकार मच गया है ।
शहर मुरैना संभागीय मुख्‍यालय होने के साथ जहॉं आयुक्‍त कार्यालय भी है , की दशा इतनी अधिक दयनीय हो गयी है कि शहर के आधे से ज्‍यादा भाग में विद्युत सप्‍लाई पिछले तीन दिनों से एकदम बन्‍द है । सारे दिन और रात मिला कर महज छ: घण्‍टे की बिजली के सहारे पिछले तीन दिनों से आधे से ज्‍यादा शहर की जनता भीषण गर्मी और मच्‍छरों से जूझ रही है ।
विद्युत वितरण कम्‍पनी के अधिकारी लाम्‍बा जी की इस लम्‍बी अघोषित अनियंत्रित,अन्‍धाधुन्‍ध कटौती के सम्‍बन्‍ध में चर्चा ग्‍वालियर टाइम्‍स से हुयी तो 17 तारीख को लाम्‍बा बोले परमिट है सो सुबह छ बजे की गुल हुयी बिजली शाम छ बजे आयी और शम साढे सात बजे फिर जो गयी तो रात बारह बजे आयी, 18 तारीख को विद्युत कम्‍पनी ने दैनिक भास्‍कर में विज्ञापन देकर कहती है कि आज से फलां फलां मोहल्‍ले में फलां फलां तारीख को सुबह छ बजे से चार बजे तक बिजली नहीं रहा करेगी ,गोया चार जुलाई तक सीजनल मेण्‍टीनेन्‍स होना है । अब भईया लाम्‍बा यार आज की तारीख में जिन मोहल्‍लों के नाम तुमने अखबार में नहीं छपवाये उनमें सुबह छ बजे गयी बिजली रात एक बजे वापस आई है हुजूर इसे घोषित मानें कि अघोषित । यार इतनी तो न पिया करो कि मोहल्‍ले ही भूल जाओ कि कहॉं काटनी है , अरे अपने विज्ञापन का पेपर ही उठा कर देख लेते , प्‍यारे अफसर बंटाढार, जहॉं काटने की बात थी वहीं काट लेते, आध्‍ो से ज्‍यादा शहर की क्‍यों तीन दिन से काट रखी है । और कटौती भी इतनी बुरी कि सुबह छ बजे से रात बारह और एक बजे तक । धन्‍य हो महाराज । हो गयी जय राम जी की । अरे भईया सारी चम्‍बल में बिजली का कोहराम मचा है , अब अखबार तुम्‍हारे खिलाफ लिख छाप रहे हैं तो उनका क्‍या कसूर, भईया जनता चिल्‍लाती है यार लाम्‍बा सो उन्‍हें लिखना पड.ता है । अब ये तुम्‍हारी बदकिस्‍मती है दोस्‍त कि हर गांव हर तहसील से आपके खिलाफ आवाज आ रही है । विज्ञापनों के लालच दो या मोबाइल सेट का जनता की आवाज कब तक कुचलवाई जा सकती है ।
अब हर जगह एक ही खबर है कि फलां जगह बिजली की आफत , तुम्‍हारी सरकार का ही वायदा था कि चुनाव जीत कर केवल तीन महीने में बिजली ही बिजली कर देंगें । अब तुम नहीं कर पाये तो इसमें जनता का या अखबारों का क्‍या दोष ।
बिजली काट कर जो संदेश आप पहुंचाना चाहते हैं , हमने पहुंचा दिया है । खुश रहो और काटो , काटो फिर पता नहीं मौका मिले न मिले । जय राम जी की ।
धन्‍य हैं प्रभु आप और आपकी सरकार । जनता करती हाहाकार ।।
और बढाओ अत्‍याचार, मार काट का रहे न पार ।।

 

अन्धाधुन्ध अघोषित विद्युत कटौती से चौपट हुये किसान,छात्र, और व्यवसायी

अन्धाधुन्ध अघोषित विद्युत कटौती से चौपट हुये किसान,छात्र, और व्यवसायी


असलम खान


मुरैना 4 जनवरी 2006 ! ग्वालियर टाइम्स समाचार सेवा, मुख्यमंत्री बदलने के साथ ही प्रदेश की विद्युत व्यवस्था कितनी बुरी तरह चरमरा गयी है, भयावह परिणाम सामने आने लगे हैं ! उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के पिछले मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के कार्यकाल में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था एकदम चकाचक हो गयी थी और एक मिनिट के लिये भी बिजली कहीं नहीं जाती थी ! गौर के कार्यकाल में विद्युत समस्या इतनी विकराल और विकट नहीं रही जितनी कि वर्तमान में हो चुकी है !
लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी विद्युत व्यवस्था का आलम यह है कि पूरी तरह से अघोषित रूप से की जा रही विद्युत कटौती ने जनता की कमर तोड़कर सबको चौपट करने की कगार पर खड़ा कर दिया है ! शहरों की बात छोड़िये जिला और सम्भागीय मुख्यालयों की हालत ये है कि कब किस समय कितनी देर के लिये बिजली गुल हो जाये, किसी को नहीं पता !
विद्युत की दुरावस्था के चलते जहां छात्र-छात्राओं की परीक्षायें सिर पर होने के बावजूद बिजली की अव्यवस्था के चलते उनकी पढ़ाई पूरी तरह संकट में आ चुकी है वहीं छोटे व्यवसायी जिनका समूचा व्यवसाय और रोजी रोटी बिजली पर ही आधारित है पूरी तरह चौपट होकर ठप होने के कगार पर आ पहुंचे हैं ! जहां छात्र इक्कीसवीं सदी में आकर आज दिया और लालटेन की रोशनी में परीक्षा की तैयारी करने पर मजबूर हैं वहीं कैरोसिन के अभाव में और कैरोसिन की ब्लैक मार्केटिंग के चलते उनकी लालटेन व चिमनियां भी संकट में ही हैं !        
ग्रामीण क्षेत्रों की हालत तो और भी बुरी है, गांवों का आलम ये है कि गरीब किसानों को रोजाना महज दो या तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है ! जहां खेतों में खड़ी फसलों में फिलवक्त पानी देने का समय है वहीं रामप्रसाद बिस्मिल की धरती और भारतीय सेना में जांबाजी के साथ जान पर  खेलते नौजवानों के परिवारों में पलते और बढ़ते छात्र-छात्राओं का अंधाधुंध विद्युत कटौती के चलते उनका क्या भविष्य होगा यह अंदाज आप खुद ही लगा सकते हैं !
जहां वर्तमान युग प्रतियोगिताओं का युग है वहीं साधनों और सुविधाओं के अभाव में भी संघर्ष से जूझ रहे ग्रामीण छात्रों पर अघोषित विद्युत कटौती की मार मानो कहर बनकर टूटी है ! अब आप न गांवों से न शहरों से किसी कल्पना चावला या सानिया मिर्जा, सी. बी. रमन और अटलबिहारी बाजपेयी बनने की उम्मीद न करिये ! चम्बल घाटी के सुनहरे दिन तो अब लद गये , और आगे जाते-जाते हम बहुत पीछे पहुंच गये !
जहां आज सूचना का अधिकार, ई-गवर्नेन्स, एम.पी. पोर्टल योजना जैसी तकनीकोें और मध्यप्रदेश को आई.टी.हब तथा हाईटेक शहरों की बात एक महीने से पहले करके जहां हम फूले नहीं समाते थे और तेजी से आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश पर सिंह द्ष्टि डालकर  खुद को गौरान्वित महसूस करते थे और भयभीत भ्रष्टों और रिश्वतखोरों की कसती लगामें और काले पड़ते चेहरों को देख हमारे चेहरे चमक गये थे, आज जुम्मा जुम्मा एक माह गुजरते ही न हाईटेक सिटी रही न आई.टी. हब रहा न एम.पी.पोर्टल योजना रही न ही ई-गवर्नेन्स, और सूचना का अधिकार तो मानो इतिहास की बात हो गयी न इसमें दिये आवेदनों का कोई अर्थ रहा और न इसका पालन ! कुल एक महीने के भीतर ही भ्रष्टाचार एकदम मानो कब्र से दहाड़कर उठ आया हो और अब भ्रष्टाचार के गर्त में आकंठ डूब चुके भ्रष्ट सरकारी अफसर खुलकर तांडव कर रहे हैं, मगर अफसोस न उनकी लगामें रहीं और न उन पर नजर रखने वाले या देखने, सुनने वाले! जनता की फरियादें मानो नक्कारखाने में तूती की आवाज !
कहां जाती है गायब बिजली , कौन हैं असली चोर ?
गोया जब हमने तहकीकात की कि अघोषित कटौती में रोजाना गुम हो रही बिजली आखिर जाती कहां है ? तो बढ़ी मजेदार बात सामने आयी बिजली कम्पनी के कई कारिन्दे लाखों की मोटी माहवारी खाकर करोड़ों की बिजली कई छोटी बढ़ी फैक्ट्रीओं और धन्नासेठों की मिलों में भेंट रूप में दी जाती है और जो नुकसान होता है उसकी भरपाई गरीब आम जनता की बिजली काटकर, बिना बिजली दिये ही जबरन बिल बसूलकर की जाती है ! करामात देखिये कि प्रत्येक माह बिजली का मासिक औसत बिल भरने वाले उपभोक्ता को हर हाल में बिजली मिले या न मिले बिल उतना ही भरना पड़ता है चाहे महीने के 720 घंटों में से कुल 30-40 घंटे ही बिजली मिले ! अब बताईये जनाब कि पिछले 6 साल से इस तरह मुफ्त का पैसा गरीब जनता से जबरन बसूल रहे लोग चोर हैं या वह जनता जो बिना बिजली मिले और कटौती की बिजली का भी बिल भरती आ रही है !
ब्‍यूरो चीफ- चम्‍बल संभाग  

 

बुधवार, अप्रैल 04, 2007

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