रविवार, मई 03, 2015

मुरैना के सारे नीच कमीने और भ्रष्ट नेता और अफसर इसे पढ़ लें गौर सें और सुन लें ध्यान से

ऐ भ्रष्ट और महा कुत्ते चाहे बिजली काट के रख , चाहे हजार उपाय कर , श्री कृष्ण को रोकने के कंस ने हजार उपाय किये , मगर फिर भी हुआ वही जो होना था , बंदीगृह के द्वारा खुले और पहरेदार सोये, तेरा बाप भी उतर आये तो भी हमारे वर्ल्डवाइड ब्राडकास्ट और वर्ल्डवाइड रिलीज नहीं रूक सकतीं , ले देख समूचे विश्व में प्रसारित हो चुकीं हैं , ये हमारा करारा झन्नाटेदार तमाचा तेरे मुँह पर .....  याद रखना राजपूत का एक हाथ सात स्वर्ग , सात पाताल सब नपा देता है ....   और हम नपा देंगें
मुरैना की पूरी रात और पूरे दिन चल रही बिजली कटौती के नाम और म.प्र. के मुख्यमंत्री की सी.एम. हैल्प लाइन के सौ फीसदी फेल हो जाने के उपलक्ष्य में आज यूनाइटेड नेशन्स द्वारा घोषि‍त  '' विश्व प्रेस आजादी दिवस '' के शुभ अवसर पर धुआंधार अंधाधुंध ''अटल ज्योति की अटल कटौती'' के नाम चम्बल प्रेस क्लब की ओर से विश्वस्तरीय ब्राडकास्ट व रिलीज ( हकीकत यह है और इसके पीछे कौन है , कुछ नाम बता दिये हैं , कुछ नाम आगे बतायेंगें, हालांकि मामला लोकायुक्त, आर्थ‍िक अपराध अन्वेषण ब्यूरो सहित , आपराधि‍क प्रकरण दर्ज कराने की दहलीज पर पहुँच चुका है ) इसके साथ ही इसमें कार्यवाही न करने / प्रकरण / एफ.आई.आर. दर्ज न करने की सूरत में सी.आर.पी.सी. सेक्शन 482 भी एक्सरसाइज करने की तैयारी की जा चुकी है , उल्लेखनीय है कि मुरैना जिला के पूर्व जिला शि‍क्षा अधि‍कारी हरीदास शर्मा के मामले में धारा 482 एक्सरसाइज की गई थी , जिसमें हरीदास शर्मा सहित करीब 80 लोगों के विरूद्ध एक ही एफ.आई.आर. में 46 अपराध दर्ज हुये थे । प्रकरण अपराध संख्या 663/02 दिनांक 20 सितम्बर 2002 है , इसके उपरांत इसी धारा की एक्सरसाइज मुरैना जिला में दर्ज हुये मुरैना कलेक्टर राधेश्याम जुलानिया द्वारा ( तत्कालीन ) दर्ज कराये गये फर्जी छात्रवृत्त‍ि के 42 मामलों में किया गया था , और हाईकोर्ट ने सारे मामले दोषगत व अवैध दर्ज पाकर सील करवा दिये थे । ग्वालियर टाइम्स मुरैना जिला में हुये बहुत बड़े बड़े और संगीन अपराधों , सरकारी गबनों और भ्रष्टाचार पर पर्दा उठाने के लिये एक नयी पर्दाफाश सीरीज शुरू करने जा रहा है ।
 इस सीरीज में आप मय सबूत जानेंगें और देखेंगें कि कवल अकेले मुरैना जिला में ही अरबों खरबों रूपये का सरकारी गबन भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी और फर्जीवाड़ा हुआ है  जिसमें चंबल कमिश्नर से लेकर प्रमुख सचिव तक स्तर तक के अधि‍कारी ही नहीं मुरैना के सांसद और विधायकों से लेकर अनेक मंत्री और नेता लिप्त हैं , इसमें बिजली विभाग सहित सिंचाई विभाग के भी बहुत तगड़े घोटाले और फर्जीवाड़े शामिल रहेंगें, यह सीरीज अगले हफ्ते से ग्वालियर टाइम्स पर शुरू होगी , अवश्य पढि़ये , फिलवक्त हमारे साथ मुरैना जिला की चल रही बदस्तूर बिजली कटौती का आनन्द लीजिये और यह गीत सुनिये  www.gwaliortimes.in    ;   http://www.facebook.com/TomarRajvansh/

मंगलवार, अप्रैल 28, 2015

राजनीतिक कारणों से ध्वस्त हुई ( की गई) मुरैना जिला की विद्युत सप्लाई

राजनीतिक कारणों से ध्वस्त हुई ( की गई) मुरैना जिला की विद्युत सप्लाई ...... कल पूरे दिन और आज पूरी रात गुल रही मुरैना की बिजली ....... सुबह सवेरे अभी तक गुल है मुरैना जिला की विद्युत सप्लाई ...... गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लिखेगा पत्र , कई भ्रष्ट , नाकारा और शासकीय सेवा हेतु अयोग्य व अपात्र राजनीतिक दलों से संबद्ध आफिसर्स एवं कर्मचारीयों को मुरैना जिला से तुरंत व तत्काल हटाने की मांग करेगा .... नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' , अध्यक्ष , प्रेस क्लब , चम्बल संभाग एवं मुरैना जिला

सोमवार, अप्रैल 27, 2015

बेमौसम वारिशों का दौर फिजाओं की ऋतु में, कहर बिजली कटौती का तपती दोपहरी की भीषण गर्मी में जो देखि‍ये तो म.प्र. आईये, सुलझा आखि‍र राजपूताने के दखल से दिल्ली में किसान आत्महत्या का मसला , शहीद के दर्जे के साथ ताम्रपत्र भी



बेमौसम वारिशों का दौर फिजाओं की ऋतु में, कहर बिजली कटौती का तपती दोपहरी की भीषण गर्मी में जो देखि‍ये तो म.प्र. आईये, सुलझा आखि‍र राजपूताने के दखल से दिल्ली में किसान आत्महत्या का मसला , शहीद के दर्जे के साथ ताम्रपत्र भी
ना सुनवाई को हुकूमत है, न हाकिम फरियाद कोई करने को, जब जुल्मी ही हुकूमत और हाकिम है तो फरियाद किसे करिये, दिल्ली मसले सुलझाने में राजस्थान के राजपूताने के क्षत्रिय राजपूत रजवाड़े और चंबल का तोमर राजपरिवार भी सारे मामले में सक्रिय भूमिका में रहा , नरेन्द्र सिंह तोमर को ‘’आप’’ द्वारा ‘’ चंबल’’  से दिल्ली में महत्वपूर्ण भूमिका में ले जाने की तैयारी
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’
Gwalior Times
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( प्रथम भाग) किश्तबद्ध आलेख
जल्लाद ही जब हाकिम हो, तो फरियाद क्या करना, अपराधी ही जब हुकूमत हो तो सैयाद से क्या कहना ।
म.प्र. की हालत कोई आजकल से नहीं , पूरे 15 वर्ष से बदस्तूर बेहद खराब व खस्ता है, कम से कम बिजली कटौती के मामले में, बिजली कटौती के मामले में हर चुनाव पर ( सन 2003, सन 2008, सन 2013) म.प्र. की भाजपा सरकार द्वारा या भारतीय जनता पार्टी एक फर्जी व फेक मुहिम चलाती है, हर बार उसका एक अलग नामकरण कर देती है ।
सन 2013 के चुनावों के ऐन पहले ऐसी ही एक मुहिम चलाई गई और नाम दिया गया ‘’अटल ज्योति’’ योजना , इस योजना के बारे में प्रचार प्रसार , उद्घाटन समारोह आदि ( जो कि 90 फीसदी जगहों पर जनरेटर लगा कर किये गये ) पर करोड़ों अरबों रूपये म.प्र. की शि‍वराज सिंह सरकार ने महज बोतल पर लेबल चिपकाने और ढक्कनबाजी में फूंक दिये ।
मगर म.प्र. में बिजली फिर भी नहीं आई, अटल ज्योति फिर भी नहीं आई , अलबत्ता करीब सन 2005 के अंत से म.प्र. में चल रही अघोषि‍त बिजली कटौती का अंतराल काल बहुत बढ़ गया ।
म.प्र. में सन 2005 के पश्चात कभी घोषि‍त बिजली कटौती हुई हो, ऐसा पूरे 10 वर्ष के कालखंड में तो कभी हुआ नहीं ।
अलबत्ता अफसरशाही और नेतृत्व व राजनैतिक भ्रष्टाचार, लालफीताशाही म.प्र. पर इस कदर हावी हुई कि ना जनता की सुनने वाला कोई म.प्र. में हजारों किलोमीटर दूर तक बचा और ना कार्यवाही करने वाला ।
अंजाम ये हुआ कि 15 वर्ष से बिजली को तरस रहे इस म.प्र. में इतने समय खंड में आज तक वह दिन आया ही नहीं जब बिजली सप्लाई म.प्र. के एक भी शहर या गॉंव में कभी पूरे दिन या पूरी रात आई हो या रही हो, अपवाद स्वरूप यदि शहर भोपाल के चंद हिस्सों को छोड़ दें या इंदौर ग्वालियर या जबलपुर के चंद हिस्सों को छोड़ दें तो समूचे म.प्र. में ऐसा कोई स्थान नहीं मिलेगा , जहॉं से बिजली लापता न हो ।  .....       शेष अगले अंक में जारी
आखि‍र राजपूतों के दखल से सुलझ गया , दिल्ली की आप रैली में किसान गजेन्द्र सिंह की आत्महत्या का मामला
दिल्ली से बड़ी खबर है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की किसान रैली में राजस्थान के दौसा जिला के किसान गजेन्द्र सिंह द्वारा आत्महत्या का मामला तूल पकड़ जाने और समस्या बन जाने व समाधान से बाहर हो जाने पर जब कोई राह केजरीवाल सरकार के सामने नहीं रही तब केजरीवाल के काम राजपूताने के राजपूत ही आये, राजस्थान के राजपूताने के क्षत्रिय राजपूत रजवाड़ों से बेहतर संबंध रखना केजरीवाल के लिये वक्त पर मुफीद साबित हुआ, और वक्त जरूरत न केवल काम आ गया बल्क‍ि एक बहुत बड़े संकट से निजात दिलाकर , आने वाले वक्त में राजस्थान , म.प्र. और उ.प्र. हरियाणा, बिहार, पंजाब में आम आदमी पार्टी की जड़े पुख्ता करने का संकेत देक एक रास्ता बना गया ।
केजरीवाल सरकार के राजपूत नेता संजय सिंह , राजेन्द्र प्रताप सिंह , दिल्ली सरकार के एक राजपूत  मंत्री राजस्थान के दंबंग व हुकुमदार असल क्षत्रिय राजपूत नेताओं व रजवाड़े के सदस्यों के प्रतिनिधि‍ मंडल के साथ पीडि़त परिवार के घर पहुँचें व स्व. गजेन्द्र सिंह के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की, और पारस्परिक वार्ता व अपेक्ष‍ित घोषणाओं एवं सहायता देने के ताम्रपत्र दिये जाने की घोषणा के साथ मामले का पटाक्षेप हो गया ।
इस कार्यवाही या मुलाकात के लिये चम्बल से दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के वंशज नरेन्द्र सिंह तोमर को भी फोन लगा कर बुलाया गया, लेकिन नरेन्द्र सिंह तोमर की तत्समय बहुत अधि‍क व्यस्ततावश उन्होनें कहा कि ‘’ आप लोग चले जाईये , कोई दिक्कत हो या समस्या न सुलझे तो फोन से ही हमारी बात करा दें, इसके साथ ही नरेन्द्र सिंह तोमर ने पीडि़त परिवार को सहायता व मदद दिये जाने के संबंध में अपनी कुछ राय व मशविरे दिये’’  , जिसे आप नेताओं व राजस्थान के राजपूताने के क्षत्रिय राजपूत रजवाड़ों ने जस का तस शामिल व स्वीकार कर लिया , उल्लेखनीय है कि इंद्रप्रस्थ पति पांडव अर्जुन , दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के वंशज ‘’जिन्हें भारत’’ कहा पुकारा जाता है और उन्हीं के कारण इस देश का नाम भारत है , उनके आदिकाल से नियुक्त किये गये वंशावली लेखक ( जगा) राजस्थान के दौसा जिला में ही रहते हैं और तोमर राजपरिवार एवं पांडव वंश की सारी वंशावली दौसा जिला के राजपूताने में ही आदिकाल से नियुक्त किये गये वंशावली लेखक परिवार द्वारा ही आज दिनांक तक दर्ज की जाती रहीं हैं । और तोमर राजवंश को समस्त राजपूताने में मान्य पूज्य व चक्रवर्ती सम्राट के रूप में क्षत्रियों राजपूतों में भारत ( महाभारत स्वामी ) के रूप में दर्जा व मान्यता है , और उनकी बात या इच्छा या आदेश समस्त क्षत्रिय राजपूत बेहद खुशी से व स्वेच्छा से मानते व स्वीकारते हैं ।
केजरीवाल सरकार द्वारा अब किसान गजेन्द्र सिंह को किसान आत्महत्याओं के बारे में देश भर में अलख जगा कर सारे देश का ध्यान खींच कर क्रान्ति‍ जगाने वाला महान देशभक्त शहीद का दर्जा दिया जायेगा, इसके अतिरिक्त शहीद गजेन्द्र सिंह के परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने के साथ ही कई अनेक अन्य सहायताओं व घोषाणाओं का ताम्रपत्र शहीद गजेन्द्र सिंह के परिवार को दिया जायेगा । इस संबंध में बाकायदा दिल्ली सरकार की केबिनेट की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव विधि‍वत अनुमोदित किया जायेगा ।   
महिलाओं के लिये ''साध्वी शब्द '' अशास्त्रीय, अपरंपरागत एवं अमान्य है
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
शब्द ''साध्वी'' सनातन धर्म परंपरा में मान्य व स्वीकृत एवं प्रमाणित शब्द नहीं है, कुआरी स्त्र‍ियों, अविवाहित स्त्र‍ियों के लिये ''कुमारी पूजन '' व ''देवी स्वरूपा पूजन की परंपरा अवश्य मान्य है , किन्तु उनका सन्यास या विरक्त‍ि विधान या तप विधान शास्त्रीय एवं राजाज्ञा या शास्त्राज्ञा अनुकूल व वर्णि‍त , प्रमाणिक एवं मान्य यथोचित नहीं है । कुमारी, कुआरी, या अविवाहित नारी का तप व सन्यास '' शास्त्र द्वारा शिखंडी'' के नाम से व स्वरूप से वर्ण‍ित व मान्य परंपरागत है, इसके अतिरिक्त भारत का कोई भी प्राचीन शास्त्र शब्द साध्वी को स्वीकार व मान्य या उल्लेख नहीं करता, कुमारी देवीयों के रूप में जिनके यंत्र केवल मात्र अधोमुखी त्रिकोणों द्वारा लिखे व बनाये जाते हैं , वे साक्षात अवतार या देवी रूवरूप में विद्यमान मान्य व स्वीकृत हैं ।
इसी प्रकार विधवा महिलाओं या रजो व काम निवृत्त महिलाओं के लिये भी शब्द साध्वी प्रयुक्त व उपरोक्तानुसार ही प्रयोग्य नहीं है । पथरा जाना या पत्थर की हो जाना ( भले ही वह ईश्वर की साधना या तपस्यारत हो जाये) शब्द सनातन धर्म इस श्रेणी की महिलाओं के लिये प्रयोग करता है ।
पति विरक्त, परित्यक्त , गार्हस्थ्य विहीन या त्याज्य महिलाओं या स्वयं परित्याग करके आई हुई महिलाओं के लिये , जैसे कि गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या के लिये या माता शबरी के लिये भी साध्वी शब्द प्रयोग नहीं किया गया , साध्वी शब्द इस श्रेणी की महिलाओं के लिये भी प्रयोग नहीं किया जाता , इन्हें भी पथराई हुई या पत्थर में तब्दील नारी की श्रेणी में रखा गया है , देशी देहाती प्रचलित शब्द व भाषा में इनमें से कुछ के लिये परंपरागत शब्द ''काग बिड़ारनी'' प्रयोग किया जाता है ।
श्रीमद भगवदगीता में भी तथा अन्यान्य सनातन धर्म के ग्रंथों व शास्त्रों में '' शब्द साधु '' मान्य व स्वीकार है , जिसका तात्पर्यि‍क अर्थ .... सज्जन , निर्मल, निष्कपट, निश्छल , निष्काम, आसक्त‍ि हीन, मनुष्य के लिये गीता में वर्णि‍त धर्माचरण युक्त पुरूष के लिये किया गया व अन्य शास्त्रों ग्रंथों व राजाज्ञाओं के अनुसार मान्य व स्वीकृत है , जबकि शब्द साध्वी अप्रचलन व अमान्य व अस्वीकृत है , महिला के रूप कुल 84 होते हैं, जिसमें से उसे या तो 64 योगनीयों ( जो‍गिन ) के रूप में या दस महाविद्याओं के स्वरूप में या आदि शक्त‍ि या त्रिमहामाया ( एक ही रूप है ) के रूवरूप में, या नौ देवियों के रूप में स्वीकार व मान्य किया जाता है , इन 84 रूपों के अलावा महिलाओं को अन्य जिन रूपों में मान्य व स्वीकार किया  गया है उनमें देवी के विभि‍न्न अवतार, यक्षणी, जिन्न, गंधर्व- अप्सरा, किन्नरी, पिशाचणी, शंखणी, हस्तिनी , पद्म‍िनी, , वृषणी, अश्वणी, चन्द्रमा की सत्ताइस पत्न‍ियों आदि आदि सहित 108 अन्य स्वरूप भी स्वीकार किये गये हैं , स्त्री का धर्माचरण उसके पति से सहबद्ध होता है, बिना पति की नारी धर्म विहीन रहती है, पति चिन्तन और पति स्मरण ध्यान व वंदन समर्पण ही नारी का सर्वश्रेष्ठ धर्माचरण एवं उसके मोक्ष मार्ग का सर्वोच्च साधन है ( विशेष आलेख इस विषय पर जल्दी ही लायेंगें)    ...... जय श्री कृष्ण .... जय जय श्री राधे - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''



सोमवार, अक्टूबर 18, 2010

संभागीय मुख्यालय 62 दिन से अंधेरे में

मुरैना 18 अक्टूबर 2010 इससे पूर्व 15 अक्टूबर, 14 अक्टूबर, 1 अक्टूबर 23 सितम्बर , 20 सितम्बर एवं 8 एवं 6 सितम्बर (को प्रकाशित ) , 18 अगस्त से पॉवर शट डाउन से लगातार पल पल अंधकार में डूबा चम्बल संभाग का संभागीय मुख्यालय शहर मुरैना में 18 अगस्त सुबह 6 बजे से गुल बिजली आज 62 दिन बाद भी बिजली सप्लाई चालू नहीं हो सकी है । खबर लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्त तक समूचे शहर में पावर शट डाउन चल रहा है । बिजलीघर शिकायत का तथा अधिकारीयों के फोन इस दरम्यान बंद थे । जे.ई.सिद्दिकी का कहना था कि उसके यहाँ शिकायत दर्ज कराने की कोई व्यवस्था नहीं है तथा शिकायतें सुनना या उन्हें हल करना उसकी ड्यूटी में नहीं आता (यह वार्ता 6 सितम्बर को रात साढे बारह बजे के बाद की गयी ) । इसके अलावा सिद्दिकी का कहना था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड सकता वह सीधे मंत्री को पैसा देकर आता है ।
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शुक्रवार, अक्टूबर 15, 2010

संभागीय मुख्यालय 59 दिन से अंधेरे में

मुरैना 15 अक्टूबर 2010 इससे पूर्व 14 अक्टूबर, 1 अक्टूबर 23 सितम्बर , 20 सितम्बर एवं 8 एवं 6 सितम्बर (को प्रकाशित ) , 18 अगस्त से पॉवर शट डाउन से लगातार पल पल अंधकार में डूबा चम्बल संभाग का संभागीय मुख्यालय शहर मुरैना में 18 अगस्त सुबह 6 बजे से गुल बिजली आज 59 दिन बाद भी बिजली सप्लाई चालू नहीं हो सकी है । खबर लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्त तक समूचे शहर में पावर शट डाउन चल रहा है । बिजलीघर शिकायत का तथा अधिकारीयों के फोन इस दरम्यान बंद थे । जे.ई.सिद्दिकी का कहना था कि उसके यहाँ शिकायत दर्ज कराने की कोई व्यवस्था नहीं है तथा शिकायतें सुनना या उन्हें हल करना उसकी ड्यूटी में नहीं आता (यह वार्ता 6 सितम्बर को रात साढे बारह बजे के बाद की गयी ) । इसके अलावा सिद्दिकी का कहना था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड सकता वह सीधे मंत्री को पैसा देकर आता है ।
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मंगलवार, अक्टूबर 12, 2010

हास्‍य- व्‍यंग्‍य : का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्‍यादा और ससुरा वोल्‍टेज कैसा डाउन है ...नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

हास्‍य- व्‍यंग्‍य

का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्‍यादा और ससुरा वोल्‍टेज कैसा डाउन है ...

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

अभी एक मित्र ने हमें मोबाइल से एक एडल्‍ट जोक भेजा .. लेकिन इस चुटकुले में कुछ ऐसी चुटकी ली गयी थी कि हम हँसे बिना न रह सके .. चुटकुला कुछ यूं था – हम इसे अपनी सदाबहार स्‍टाइल में आपको सुनाते हैं - 

एक बिजली वाले अफसर रोज देर रात को आते घर ।

अद्धी पौआ औनी पौनी, संग में माल मत्‍ता जम कर।।

थके हारे नित दारू पीते, दारू पी कर दारा नियरे जाते।

न नैन से नैन मिल पाये और न लब की मदिरा पी पाते।। 

पर फोन रात में भी बज जाता, सारा मजा किरकिरा होता।

टेंशन नित का देख के अफसर, एक रिकार्डिंग वह कर लेता।।

अपने फोन में वायस भरी, लोड है ज्‍यादा , वोल्‍टेज डाउन ।

बिजली नहीं मिल पायेगी, करा तुमने हमरा सिग्‍नल डाउन ।।

रोज रात को सुनते सुनते, बिजली भौजी ने रट लीं ये लाइन ।

हमारे सनम का प्रिय भाष है, लोड है ज्‍यादा वोल्‍टेज डाउन ।।

एक दिन सुबह बोली पड़ोसन, कुछ सुनो सहेली कुछ कहो जरा ।

कैसी रोज रात है कटती , पिया से कैसे मधुर मिलन है होता ।।

माथा ठोक ठोक के बिजली भौजी, करम दण्‍ड पर रख कर हाथ ।

तड़प झड़प कर बोली सखी से का बतलाऊं जीजी, जरा बड़ी है बात।।

रोज रात को बलम जी पी कर सोते, हाई वोल्‍टेज में करते बात ।

रात बखत जब हाई वोल्‍टेज चाहिये, तब फिर ना करते ये बात ।।

रोज रात को खुद नर्राते, सोते सोते से नित उठ कर चिल्‍लाते ।

लाइन शार्ट है, लाइन फाल्‍ट है, लोड है ज्‍यादा वोल्‍टेज डाउन ।।

किस्‍मत दुखिया हमरी कुछ ऐसी है ,  तुमसे कह दें दिल की बात ।

उनके भरे बदन में दिखता पूरा पावर हाउस, लगे कटाउट पूरे सात ।।  

आते हैं सन्ना सन्‍ना सरकार, पर लोड है ज्‍यादा, है डाउन वोल्‍टेजवा ।

फूट फूट मैं फ्यूज हो कर बुझी ट्यूबलाइट सी बुझती हूं, जले करेजवा ।।

सुन कर सखी मुस्‍काई बोली, करो सस्‍पेण्‍ड डाउन ट्रान्‍सफार्मर, बिना यूज और बेमतलब का, फेंकों जो हैं बिन काज ।

नया हाई टेंशन हाई वोल्‍टेज, टा्रान्‍सफार्मर का करो प्रयोग, या फिर अपने खम्‍बे से डलवा दूं , बोलो क्‍या चाहो तुम आज।

अब जब बिजली ही क्‍या खुद सरकार का ही डाउन वोल्‍टेज और हैवी लोड चल रहा है, जनता उनका लोड झेल रही है, जिनमें वोल्‍टेज ही नहीं है, जो ऊपर चढ़े हैं जनता के, बिना वोल्‍टेज के जिन्‍दा मुर्दे । ऐसे सरकार को शत शत नमन ...  मध्‍यप्रदेश की अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती को सादर समर्पित    

शनिवार, मई 01, 2010

मुरैना : 20 घण्‍टे से अधिक बिजली बन्‍द रही 24 घण्‍टे के दरम्‍यां

मुरैना : 20 घण्‍टे से अधिक बिजली बन्‍द रही 24 घण्‍टे के दरम्‍यां

मुरैना 1 मई 10, मुरैना शहर और मुरैना जिला वासीयों के लिये अप्रेल माह का आखरी दिन कई मनहूसियतें ले कर आया । जहॉं 30 अप्रेल को ही ग्‍वालियर श्‍योपुर छोटी लाइन ट्रेन पलट गई वहीं 30 अप्रेल को सुबह 4 बजे हुयी बिजली कटौती के बाद सुबह 10:16 बजे बिजली वापस आयी यानि पूरे 6 घण्‍टे 16 मिनिट तक बिजली कटी, उसके बाद दोपहर 2 बजे कटी बिजली फिर वापस आयी ही नहीं और दूसरे दिन यानि 1 मई को सुबह 4 बजे ही वापस आयी अर्थात 24 घण्‍टे के दरम्‍यां कुल 20 घण्‍टे 16 मिनिट तक पावर शट डाउन रहा ।

हालांकि दोपहर 2 बजे से दूसरे दिन सुबह 4 बजे तक पावर शट डाउन के बारे में मध्‍यक्षेत्रीय विद्युत वितरण कम्‍पनी का कहना है कि हाई टेंशन ट्रान्‍समिशन लाइन टूट जाने से मेजर फाल्‍ट हो जाने से 14 घण्‍टे कन्‍टीनूअस पावर शट डाउन रहा ।

इस दरम्‍यां ट्रेन पलटने से घायल लोग मुरैना अस्‍पताल में पड़े कराहते रहे, अस्‍पताल में बिजली नहीं होने से वहॉं भी कराहें कोहराम और चीख पुकार मचा रहा ।