शनिवार, जून 27, 2009

19 घण्टे तक चैलेन्ज के साथ ठोक के बिजली कटौती, पानी सप्लाई अपने आप ही बन्द

नर्रा रहे मीडिया का टेंटुआ ऐंठा, बिजली पानी पूरी तरह बन्द, ग्वालियर चम्बल में कोहराम

19 घण्टे तक चैलेन्ज के साथ ठोक के बिजली कटौती, पानी सप्लाई अपने आप ही बन्द

हम अमन चाहते हैं जुल्म के खिलाफ, फैसला गर जंग से होगा तो जंग ही सही !  

ग्वालियर/ भिण्ड/ मुरैना/ श्योपुर 16- 27 जून 09 , सरकार से पंगा यानि खुलेआम दंगा ! ग्वालियर चम्बल संभाग में पिछले 1 जून से की जा रही अंधाधुन्ध अघोषित कटौती पर जहाँ आम जनता और वकीलों ने सड़को पर उतर कर आन्दोलन तथा विरोध प्रदर्शन के जरिये भारी भभ्भर मचा रखा था वहीं मीडिया दनादन और धुऑंधार बिजली कटौती के खिलाफ खबरें लगाने में जुटा था !

अंतत: सरकार को जो करना था वह उसने कर डाला, भारत की दो कहावत बड़ी मशहूर हैं एक तो - काला बामन गोरा ..... इसका मतलब और अर्थ म.प्र. वासी इस समय भली भांति समझ रहे हैं दूसरी भैंस पूंछ उठायेगी तो का करेगी.....गोबर ! यानि जित्ती ज्यादा से ज्यादा बिगाड़ने की ताकत होगी बस उत्ता ही बिगाड़ेगी !

ग्वालियर चम्बल वाले इन दिनों इन कहावतों से रोजाना दो चार हो रहे हैं !

बदला बदला बदला, बदला लेना केवल चम्बल वालों का प्रायवेट हक ही नहीं बल्कि सरकार भी इस हक से परिपूर्ण है !

नर्रा रहे मीडिया और आन्दोलन कारीयों को आखिर सबक सिखाते हुये ग्वालियर चम्बल के समूचे जिले में शहरों और गॉवों में सोमवार 15 जून से सरकार ने खासी रणनीति के तहत विशेष कार्यवाही की ! हुआ ये कि चुन चुन कर कुछ चुनिन्दा क्षेत्र विशेषों में बिजली सप्लाई सुबह नियमित बिजली कटौती के साथ रात 1 बजे तक के लिये पूरी तरह बन्द कर दी ! बिजली सप्लाई बन्द होने से पीने का पानी अपने आप ही बन्द हो गया ! और सरकार के कहर से इन पीड़ित क्षेत्र विशेष में बिजली पानी के लिये त्राहि त्राहि मच गयी ! 23 जून से यह बिजली कटौती सबेरे 6 बजे से रात 3 बजे तक कर दी ।

मजे की बात ये रही कि बिजली घर पर जब इस सम्बन्ध में चर्चा की गयी तो बिजली घर वालों का रिरियाते हुये जवाब था कि का करें साब आप तो जानते ही हैं, हम मजबूर हैं ऊपर से जबरदस्ती बिजली काटने का आदेश दिया है, कारो बामन है, बमहनियाई तो दिखावेगा ! बिजलीघर के इस अप्रत्याशित जवाब को हमने रिकार्ड किया है !

कारो बामन तो स्टेट लेवल पर है लेकिन मुरैना मे तो बनियों की सरकार है, प्रभारी मंत्री, संभाग आयुक्त, कलेक्टर से लेकर एस.ई. जे.ई सब बनिये बैठे हैं, ये बनिये कब से बमहिनयाई करने लगे, हम गरजे, वह फिर रिरियाया ! का करें साब हम पर दया रखना, हम मजबूर हैं !

चलो खैर उस गरीब छोटे कर्मचारी से आगे बात करना बेकार था लेकिन यह अनुभव सारे विश्व के साथ शेयर करने लायक जरूर है !

खैर बिजली काटने से हमें नुकसान कम सरकार को नुकसान ज्यादा है , समाचार नहीं प्रकाशित होते तो साली सरकार के नहीं छपते, हमारा आलेख कभी रूकता नहीं, पूरी दम लगा लें तो भी रोक नही सकते !

खैर म.प्र. स्वर्णिम राज्य बनने जा रहा है, पूत के पाँव पालने में नजर आ रहे हैं, जब आप पूरे संभाग में पूरी प्रशासनिक सरकार केवल एक जाति विशेष की बैठा देते हैं तब ऐसा ही होता है, यह हमारा पुराना अनुभव है ! खैर मुरैना की सरकार तो सेठ जी के हाथों में है सो यहाँ जो भी अफसर रहेगा सेठ जी का आदमी ही रहेगा, कोई हैरत की बात नहीं ! पता नहीं कैसे पुलिस विभाग में अभी तक बनिये क्‍यों नहीं भेजे , मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी हमारी इल्‍तजा है कि मुरैना पुलिस जो अब तक ठीक ठाक चल रही है, कोई बनिया एस.पी. और सी.एस.पी. तलाश के मुरैना भिजवा दो, दूसरी जाति के अफसर शोभा नहीं दे रहे और ऐसे लग रहे हैं जैसे बगुलों के बीच में हँस घुस बैठे हों । बनिये कलेक्‍टर और कमिश्‍नर यहॉं पहले भी रहे हैं लेकिन सरकार की आजादी से लेकर ऐसी दुर्दशा हमने आज तक नहीं देखी । और हॉं लगे हाथ एकाध बनिये को जिला पंचायत और शिक्षा विभाग में भी भिजवा देना, जिससे बनिया प्रशासन की टेढ़ी नजर इन विभाग पर से हट जाये । बनिया प्रशासन अभी उन्‍हीं विभागों पर कहर ढा रहा है जहॉं बनिये अफसर नहीं हैं ।      

अभी प्रभारी मंत्री की पत्रकारवार्ता को गुजरे महज दो हफ्ते ही गुजरे हैं और बिजली कटौती पर प्रभारी मंत्री की पत्रकारों ने 70 फीसदी टाइम तक खिंचाई की ओर मंत्री को बिना जवाब दिये ही पत्रकार वार्ता खत्म करके बिलबिलाते हमने ऑखों से देखा था ! संयोग देखिये कि प्रभारी मंत्री भी बनिया है ! यानि ऊपर से नीचे तक तराजू तनी है !

अब का कहिये - अंजामे गुलिस्तां का होगा, हर जगह तराजू ठुकी हुयी ! तौल के मिलेगी पानी और बिजली, नर्राओगे तो टेंटुआ दाब के कटेगी बिजली और पानी !

बनिया प्रशासन के कारनामों पर हमने पूरी रिपोर्ट तैयार की है और हम जगत को बताने के भारी इच्‍छुक हैं कि कैसे चम्‍बल में इन दिनों हर चीज पर हर सरकारी काम पर सौदेबाजी होती है और भ्रष्‍टाचार का नंगा ताण्‍डव चम्‍बल में चल रहा है, केवल भ्रष्‍टाचार ही नहीं बल्कि कई नंगे सच इस रिपोर्ट में हैं । हमें नहीं लगता कि आपका बनिया प्रशासन इसे छपने देगा , हॉंलांकि इस रिपोर्ट का 70 फीसदी भाग चम्‍बल पर और 30 फीसदी भाग समूचे मध्‍यप्रदेश पर है , हम आपके स्‍वर्णिम मध्‍यप्रदेश के कुछ राज फाश करने के लिये बेताब हैं, कुछ मामले तो तत्‍काल कार्यवाही योग्‍य हैं । बिजली रही तो वायदा है जल्‍दी ही इसकी पूरी श्रंखला छापेंगें भी और कार्यवाही भी करवायेंगें । आप नहीं करोगे तो कोई और करेगा । विष वृक्षों को उखाड़ फेंकना अपना पुराना शौक है । हम इसे उखाड़ फेंकेंगे यह हमारा प्रण है । बिजली नहीं रहे ये दुआ करना, जब तक बिजली नहीं तभी तक टोपी सलामत मानना सेठजी ।    

ये भारत का नया संविधान है, नया संस्करण है भईये जहाँ हर अफसर, मंत्री और मातहत बनिया होवेगा, तराजू साथ रखेगा, ठाला बैठा तौल बॉट करेगा, धरजा और मरजा का राग अलापेगा ! ऐसी की तैसी लोकतंत्र की करेगा ! जय श्री राम, जय हिन्द, जय भारत !

 

बुधवार, जून 10, 2009

समाचार अपडेशन- बिजली कटोती के कारण नहीं

समाचार अपडेशन- बिजली कटोती के कारण नहीं

खेद सूचना

हमें खेद है कि मुरैना म.प्र. में चल रही पिछले चार पाँच दिन से पूरे दिन और रात की बिजली कटोती के कारण समाचार अद्यतन नहीं हो पा रहा है । फेलुअर विद्युत व्यवस्था सही होने पर पूर्ववत अद्यतन किया जा सकेगा । अभी शहर मुरैना में हर दस मिनिट बाद घण्टे दो घण्टे के लिये बिजली कटोती की जा रही है ।

 

सोमवार, मई 11, 2009

विद्युत लाइनों के रख-रखाव का कार्यक्रम

विद्युत लाइनों के रख-रखाव का कार्यक्रम

मुरैना 11 मई 09/ 0प्र0 मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मुरैना शहर के अंतर्गत 33 के व्ही और 11 के.व्ही. विद्युत लाइनों पर पूर्व मानसून रख-रखाव का कार्य किया जाना है । इसके कारण संबंधित क्षेत्रों का विद्युत प्रदाय बन्द रहने से प्रात: 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रभावित रहेगा ।

       कार्यपालन यंत्री (संचारण/ संधारण) के अनुसार 12 मई को 33 के.व्ही. नम्बर 1 फीडर पर कार्य किया जायेगा इसके कारण गणेशपुरा, कलेक्टर कार्यालय, हनुमान चौराहा, रेल्वे स्टेशन, रूई की मंडी क्षेत्र प्रभावित रहेंगे । इसी प्रकार 14 मई को जडेरूआ फीडर पर कार्य चलने के कारण समस्त एच.टी.औद्योगिक क्षेत्र, जौरा रोड, आगरा रोड, ग्वालियर रोड पर विद्युत प्रदाय बंद रहेगा । कार्यक्रम के अनुसार 15 मई को 33 के.व्ही. औद्योगिक बामौर और शिकारपुर फीडर, 17 मई को 33 के.व्ही. बडोखर फीडर, 18 मई को 11 के.व्ही. नम्बर 1 और नम्बर 3 फीडर, 20 मई को 11के.व्ही. कमिश्नरी फीडर, 22 मई को 11 के.व्ही टी आर पुरम फीडर, 24 मई को 11 के.व्ही. औद्योगिक फीडर, 25 मई को 11 के.व्ही. एम.एस.फीडर और कोर्ट फीडर, 27 मई को 11 के.व्ही. नैनागढ फीडर, 28 मई को 11 के.व्ही. सिटी फीडर, 29 मई को 11 के.व्ही. अम्बाह फीडर, 31 मई को 11 के.व्ही. कोतवाली फीडर, 1 जून को 11 के.व्ही. काशीपुर और माता फीडर, 2 जून को 11 के.व्ही. फाटक फीडर और 4 जून को 11 के.व्ही. शिकारपुर फीडर पर पूर्व मानसून रख-रखाव का कार्य किया जायेगा । इसके कारण इन फीडरों से संबंधित क्षेत्र का विद्युत प्रदाय प्रात: 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रभावित रहेगा । 

 

बुधवार, मई 06, 2009

बिजली बचाना अब सभी की जिम्मेदारी, एनर्जी सेव्हर्स के इस्तेमाल की अपील

बिजली बचाना अब सभी की जिम्मेदारी, एनर्जी सेव्हर्स के इस्तेमाल की अपील

ग्वालियर 5 मई 09 । वक्त कीे अहम मांग यह भी है कि हर व्यक्ति अब उपलब्ध बिजली को बचाए। बिजली उत्पादन के जो भी मौजूदा स्त्रोत हैं उनमें से अधिकतर कुदरत की मेहरबानी पर निर्भर हैं। इसलिए ग्लोबल वार्मिंग, पानी और कोयले की कमी के मद्देनजर आने वाला वक्त इन संसाधनों को लेकर क्या होगा यह सटीक कयास लगाना किसी के भी लिए मुश्किल है। इन हालात में उपभोक्ताओं से अपनी मासिक खपत में कमी लाने और इसके चलते बिजली के भारी बिलों से निज़ात हासिल करने के लिए एजर्नी सेव्हर्स (सी.एफ.एल.) के इस्तेमाल की अपील की गई है। विद्युत मंडल और कंपनियों की मानें तो सात से 18 वॉट तक के ये एनर्जी सेव्हर्स बिजली बचाने की मुहिम में सहायक बन सकते हैं। यदि हम थोड़ी सी हिकमतअमली दिखाएं तो हर दिन 25 से 35 फीसदी बिजली को बचा सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय है कि 60 वॉट का एक बल्ब जहाँ 10 घंटे के इस्तेमाल में 18 यूनिट बिजली खा जाता है, वहीं 13 वॉट का सी.एफ.एल. इतने ही इस्तेमाल के लिए सिर्फ 3.9 यूनिट बिजली मांगता है। अब इस हिसाब से चार रूपये प्रति यूनिट की दर पर हर महीने 56 रुपए 40 पैसे भी बिजली के साथ ही बचाए जा सकते हैं। इसी तरह अगर 40 वॉट के बल्ब की बात करें तो 10 घंटे इस्तेमाल में इसकी दरकार 12 यूनिटों की है जबकि 11 वॉट का सी.एफ.एल. यह काम सिर्फ 3.3 यूनिटों में कर देगा और इससे हर महीने 34 रुपए 80 पैसों की बचत होगी। जहॉ तक 25 वॉट के बल्ब का सवाल है तो यह 10 घंटे में खायेगा 7.5 यूनिट बिजली लेगा जबकि इसकी जगह सात वॉट का सी.एफ.एल. सिर्फ 2.1 यूनिट से ही काम चला देगा। इस किफायत से भी हर महीने 21 रुपए 60 पैसों की बचत होगी।

विशेषज्ञ यह सलाह भी दे रहे हैं कि खाना बनाने के लिए बिजली के हीटरों की बजाय सोलर कुकर और पानी गर्म करने के लिए भी गीज़र की जगह सोलर वाटर हीटर का इस्तेमाल फायदेमंद होगा। उनका यह कहना है कि दफ्तरों को भी घर की तरह मानें और बिजली का इस्तेमाल किसी भी जगह सिर्फ जरुरत के वक्त ही करें।

 

सोमवार, मार्च 02, 2009

हायरसेकण्ड्री परीक्षायें शुरू, रात भर कटी बिजली

हायरसेकण्ड्री परीक्षायें शुरू, रात भर कटी बिजली

मुरैना 2 मार्च 09, आज से म.प्र माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हायर सेकण्ड्री परीक्षायें प्रारंभ हो गयी  हैं ! परीक्षाओं के दरम्‍यान भारत का भविष्‍य जहॉं कई जगह टाट पट्ट‍ियों पर तो कई जगह नंगी जमीन पर बैठ कर अपनी किस्‍मत को रोता रहा । उल्लेखनीय है कि इस बार दिन और रात लगातार बिजली कटौती के कारण छात्र अध्ययन नहीं कर पाये हैं और अपनी परीक्षाओं व तैयारी को लेकर भारी तनाव में हैं ! भारी बिजली कटौती के चलते छात्रों में घबराहट और फोबिया हो गया है जिसके कारण बच्चे एक तरफ जनरल प्रमोशन मांगते रहे वहीं दूसरी ओर परीक्षायें स्थगित किये जाने की भी माँग करते रहे !

बच्चों की समस्याओं और परेशानी को दर किनार कर सरकार ने उनकी बात सुन कर भी अनसुनी कर दी और अपनी राजनीतिबाजी में लगी रही ! बच्चों को न कोयला काण्ड से मतलब है न मामा की राजनीति से ! बच्चों को पढृने के लिये बिजली चाहिये थी लेकिन मामा ने उन्हें सिर्फ अंधकार दिया और राजनीति की फर्जी नौटंकीबाजी ! बच्चे परीक्षा से पूर्व भारी दुखी और हताश नजर आ रहे थे ! कई बच्चों ने ग्वालियर टाइम्स से चर्चा करते हुये कहा कि अगर उनका रिजल्ट बिगड़ा तो या तो घर से भाग जायेंगें या फिर अप्रिय कदम ? उठायेंगे !

हद तो तब हुयी जब परीक्षा की रात भी शाम 7 बजे से 8 बजे की कटौती के बाद रात साढ़े दस बजे से राज साढ़े 11 बजे तक चम्बल संभाग के संभागीय मुख्यालय पर बिजली गुल रही इससे पहले सुबह पाँच बजे से दोपहर साढे 11 बजे तक फिर उसके बाद शाम 7 बजे से आठ बजे तक चम्बल संभाग के सम्भागीय मुख्यालय पर बिजली कटौती नियमित रूप से चल ही रही है ! जिला मुख्यालयों, तहसीलों और गाँवों की दशा तो और भी अधिक बदतर है ! वहाँ तो कतई बिजली है ही नहीं ! यह बताना समीचीन होगा कि अभी चन्द रोज पहले ही चार बच्चे बिजली कटौती के चलते रात में मोमबत्ती से पढ़ते वक्त जिन्दा जल कर मर गये लेकिन उनके तथाकथित मामा ने संवेदन शीलता से कोसों परे रहकर स्थिति और ज्यादा खराब कर हजारों बच्चों को मोमबत्ती से पढ़कर जिन्दा जलने के लिये राम भरोसे छोड़ दिया ! मामा ने साइकिल बंटाई के मंजीरे बहुत पीटे लेकिन बच्चों को इमरजेन्सी लाइट एक भी नहीं बांटी ! बच्चों की हितैषी बनने का स्वांग भरने वाली सरकार के पास लाड़ली लक्ष्मीयों को मोमबत्ती से जलने का उपहार देने के सिवा अब कुछ शेष नहीं है !

खैर बच्चों का तो जो होगा सो होगा, इतना तो तय ही है कि आडवाणी जी प्राइम मिनिस्टिर नहीं बनने वाले, न तो कोई कोयला वाली बात सुनने मानने को तैयार है और न ढपोरशंखी बतोलेबाजी !

 

 

मंगलवार, फ़रवरी 10, 2009

सपना 85 का, आस कम्‍प्‍यूटर की, कहर बिजली का, चैलेन्‍ज मामा का

हास्‍य/ व्‍यंग्‍य

सपना 85 का, आस कम्‍प्‍यूटर की, कहर बिजली का, चैलेन्‍ज मामा का

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

जगत मामू यानि जग मामा भनजों से बोले चलो बच्‍चो एक खेल खेलते हैं । जो जीतेगा वो एक क्‍म्‍प्‍यूटर पावेगा 500 रू. वाला इनाम में । हारा तो ठेंगा ।

बच्‍चे बोले वाह मामू क्‍या धांसू आइडिया है, हर्र लगे न फिटकरी रंग चोख आ जायेगा, केन्‍द्र सरकार नये नये आइटम निकाले है, ओर मामू अपनी सील उसी पे ठोक के मेड इन मामूज फैक्‍ट्री ठोक देवे है । खैर अब दान की बछिया के दॉंत तो नहीं देखे जावें हैं । फोकट में मिले तो 500 वाला भी चलेगा । मामू कौन कम उस्‍ताद थे, अपने पावर की मेन चाबी नीचे डाली और उड़ा दी बिजली, ससुरी रात गोल पूरी दिन भर गोल देखें भानजे कैसे अब लाओगे 85 परसेण्‍ट, नहीं लाये तो ठेंगा ।

बच्‍चों को टेंशन, सारी रात टेंशन सारा दिन टेंशन । अब मामू ने इनाम भी रख दी बत्‍ती भी गोल कर दी । अब पचासी तो का पास होइवे के लाले पड़ रहे हैं । आखिर एक भानजा तैश में आ ही गया उसने टी.वी पर एडवर्टाइज देखा, अमिताभ बच्‍चन चाचू बोल कि टेंशन गया पेंशन लेने, भानजा चाचू के डायलॉग पे प्ररित हो गया । और एक अखबार में छपी खबर के मामू को चिठ्ठी लिखो तो मामू बुला लेता है सो लिख डाली फटाफट एक पत्री मामा के नाम । बच्‍चे ने जो लिखा

प्‍यारे मामू जान, तुम पर बिजली कुर्बान ।

बड़े दिनों से कोई नई इनामो इकराम नहीं आ रही थी न कोई पंचायत फंचायत नहीं हो रही थी सो लग ही नहीं रहा था कि मामू की सरकार लौट आयी है । न पत्‍थर गाड़ कर कब्रिस्‍तान बनाये जा रहे थे और न साइकिल से पेट्रोल बचाने मामू दफ्तर जा रहे थे, न कहीं भुक्‍खड़ सम्‍मेलन करा कर अनाज बांटे जा रहे थे, न कोई यात्रा फात्रा का टोटका हो रहा था । हमें लग रहा था मामू गद्दी पे जाके हमें भूल गये, बिसरा गये ।

पर मामू कमाल कर दिया अपने बिजी टैम में से थोड़ा बखत भानजों के लिये निकाल कर उन्‍हें 500 रू वाला ही सही कम्‍प्‍यूटर दे डालने का खेल खेलने का हम भानजों के साथ बढि़या फनी गेम शो चालू कर डाला और ठेले रिक्‍शे वालों को भी सरकारी हलवा का जलवा खिला दिया, हॉं अब कुछ कुछ यकीन हुआ कि मामू जान ही हैं, लौट कर सत्‍ता में आये हैं, जमूड़े बनाने और तमाशा दिखाना चालू कर दिये हैं । थैंक्‍यू मामा जी ।

मामा आपकी शर्त 85 परसेण्‍ट से ऊपर लाने की थी, पर मामू मैं और मेरे सारे दोस्‍त आपकी क्राइटिरिया एल.ओ.सी. से आउट हो गये हैं, अब हम 85 तो क्‍या पास ही हो लें तो आपकी दया से बहुत होगा । हमारे यहॉं सारी रात बिजली नहीं रहवे है, सारे दिन भी अँधेरा छाया है, मोमबत्तियां खरीद खरीद कर पागल हो गये हैं, मम्‍मी पापा की जेब भी जवाब दे गयी है, एक मोमबत्‍ती आधा पौन घण्‍टे संग देती है और बिजली सारी रात गुल रहती है, सारा दिन गुल रहती है, अबकी बार गणित में ऐसे ही सवाल पूछोगे तो शायद हम पास भी हो जायें जैसे एक मोमबत्‍ती 40 मिनिट तक जलती है जिसका दाम 2 रू है और बिजली 23 घण्‍टे गुल रहती है तो बताओ कि एक दिन में कितनी मोमबत्तियां लगेंगीं और एक दिन का खर्च कितना आयेगा । मामू जान ऐसे सवाल हमें अब खूब रट गये हैं, हम फटाक से सवाल का उत्‍तर दे देंगें, कोर्स के सवाल तो मामू अब पढ़ नही पाते सो मामू ऐसे सवाल पूछ कर ही हमारा बेड़ा पार करा देना नहीं तो मामू हम सारे के सारे ही फेल हो जायेंगें ।

मामू अब कम्‍प्‍यूटर तो हमारी पकड़ से निकल गया आपका चैलेन्‍ज कि बेटा बिना बिजली के लाओ 85 परसेण्‍ट और पाओ कम्‍प्‍यूटर, ये हमारे बूते का नहीं है । आपका चैलेन्‍ज हम वापस करते हैं, अब तो पास ही हो लें तो साल बच जायेगा वरना मामू आपका ये गेम शो हम गॉंव शहर के गरीब बच्‍चों की कूबत से बाहर है ।

मामू थोड़ा लिखा, बहुत समझना । आपका प्‍यारा भानजा अपने कई साथियों के साथ ।

मामू को चिठ्ठी मिली तो मामू ने भानजे को बुलवा भेजा और भानजे से कहा कि देखो बेटा, बिजली ने गरीब मोमबत्तियां बनाने वालों की रोजी रोटी छीन ली, हमने उन्‍हें रोजगार मुहैया कराया, गरीब इन्‍वर्टर और बैट्री वालों को धन्‍धा दिलाया । ऊर्जा की खपत और बचत पर अब तुम्‍हें निबन्‍ध नहीं रटने पड़ेंगें । भ्रष्‍टाचार खतम करने आ रहे कम्‍प्‍यूटर और आई.टी. तथा ई गवर्नेन्‍स हमने एक ही वार से बिजली काट कर मामला ही जड़ मेख से मिटा दिया ससुरी न बिजली न आई.टी. न कम्‍प्‍यूटर न पचासी परसेण्‍ट हमने एक झटके में सबके टेंशन दूर कर दिये । भ्रष्‍टाचार खतम हुआ तो देश में ग्‍लोबल मन्‍दी छा जायेगी, सरकार की और सरकारी कारिन्‍दों की कमाई ही ठप्‍प हो जायेगी । सब टेंशनों की जड़ ये बिजली थी । हमने बिजली काट दी सारे टेंशन खतम कर दिये । तुमने कहावत तो सुनी ही होगी कि न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी सो प्रिय भानजे न बिजली होगी न भ्रष्‍टाचार खतम होगा, न आई.टी. आवेगी न कम्‍प्‍यूटर, हमने भयमुक्‍त म.प्र. का वायदा किया था हमारे सरकारी कर्मचारी सबसे ज्‍यादा भयभीत पारदर्शिता लागू होने और भ्रष्‍टाचार के खात्‍में से थे हमने उन्‍हें बिजली काट कर भयमुक्‍त कर दिया । रहा बेटा तुम्‍हारे पास और फेल होने की बात । सो चुनाव परिणामों की तरह हमने परीक्षा परिणाम भी सैटल कर लिये हैं । कहॉं कौन पास होगा और कौन फेल, कौन पच्‍चासी लायेगा कौन ज्‍यादा लायेगा कौन कम्‍प्‍यूटर पावेगा कौन इस गेम शो में हारेगा और किसको ठेंगा मिलेगा सब कुछ सैटल्‍ड है बेटा जा अब घर जा और चद्दर तान कर टॉंग पसार कर सो तेरे 85 से ऊपर आ जायेंगें तू चिन्‍ता मत कर । तुझे कम्‍प्‍यूटर मिल जावेगा । अब ज्‍यादा भभ्‍भर मचा कर हमारी गेम शो की ऐसी तैसी मत कर ।

भनजा बोला कि पर क्‍या मामू ये गलत नहं होगा । मामू बाले कि बेटा देश में ये रोज ही हो रहा है । हर गेम शो में हो रहा था लो जमूड़े बन रहे हैं, मदारी जमूड़े बना रहे हैं, मैं तो केवल उनके चरण चिह्नों की धूलमात्र ही ले रहा हूँ ।

भानजा खुशी खुशी बिना पढ़े लिखे ही कम्‍प्‍यूटर मिलने के सपने लेकर अपने घर लौट आया ।

बुधवार, दिसंबर 31, 2008

जारी है सबेरे की बिजली कटौती

जारी है सबेरे की बिजली कटौती

मुरैना 27 दिसम्बर चंबल के शहर और गाँव इन दिनों बिजली कटौती की तगडी मार झेल रहे हैं ! कारण वही पुराना है चुनावी बदला ! उल्लेखनीय है कि ताजा विधानसभा चुनावों में म.प्र. में सत्ताधारी भाजपा का ग्वालियर चंबल में सूपडा साफ हो गया था !
आम जनता का मत है कि उसी का बदला लेने और सबक सिखाने के लिये पूरी रात और पूरे दिन अघोषित अँधाधुंध बिजली कटोती की जा रही है !
वैसे तो भाजपा शासन काल के बीते पाँच साल में एक भी दिन ऐसा नहीं आया जब बिजली कटौती नहीं हुयी हो !
स्थिति यहाँ तक बदतर हुयी कि हाल ही में संपन्न हुये विधानसभा निर्वाचन के दौरान ही आयोग के निर्देशों के बावजूद मतदान के दरम्याँ पाँच दफे आधा आधा घण्टे के लिये और मतगणना के वक्त तीन बार इसी तरह बिजली गुल हुयी और इसके साथ ही बुरी तरह हार रहे उम्मीदवार अचानक चुनाव जीतने लगे ! करीब 35 से 46 सीटों पर जिला कलेक्टरों द्वारा चुनाव परिणाम बदल दिये गये !
पहली बार म.प्र. के चुनाव परिणामों में हुयी खुली बेइमानी पर जनता खुल कर मुखर होकर बोली । और अंजाम यह है कि येन केन प्रकारेण सत्ता हासिल करने से शिवराज सरकार पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी की भाँति लोगों की नजर में गिर गये । अब प्रदेश में सत्ता भले ही शिवराज सिंह की हो लेकिन उसका जनभाव एक उपहासित व घ्रणास्पद शासन का ही है ।
ग्वालियर टाइम्स ने चुनाव से काफी पहले ही म.प्र. में निष्पक्ष चुनाव न होने के खतरे से आगाह कर दिया गया था और इस संबंध में विस्त्रत आलेख भी प्रकाशित किया था जिस पर भारत के निर्वाचन आयुक्त श्री नवीन चावला द्वारा तत्काल ग्वालिय़र चंबल का दौरा कर हालातों का जायजा भी लिया गया था, लेकिन आयोग की सभी निष्पक्ष निर्वाचन की अवधारणाओं को धता बताते हुये सारे मतगणना परिणाम बदल कर पूर्व से तयशुदा परिणामों में बदल दिये गये !
यद्यपि इस मसले पर उमा भारती पहले ही काफी बोल चुकीं हैं और अब काँग्रेस भी 30 दिसम्बर को धिक्कार सभा आयोजित कर रही है ! काँग्रेस द्वारा भी मतगणना परिणाम बदले जाने का आरोप लगाया है ! इस पर विस्तार से रिपोर्ट हम पृथक से आँखों देखी के रुप में प्रकाशित करेंगे !
फिलहाल बिजली कटोती का आलम यह है कि सबेरे 5 बजे गुल हुयी बिजली इस खबर के प्रकाशन तक यानि दोपहर 11 बज कर 17 मिनिट तक वापस नहीं आयी थी ! यह समाचार मोबाइल फोन के जरिये जारी किया गया !