रविवार, फ़रवरी 17, 2008

बिजली कटौती की धूमधाम और परीक्षाओं की दस्‍तक

बिजली कटौती की धूमधाम और परीक्षाओं की दस्‍तक

संजय गुप्‍ता मांडिल- ब्‍यूरो चीफ मुरैना

मुरैना 17 फरवरी । जहॉं बिजली कटौती की अन्‍धाधुन्‍ध मार से त्रस्‍त होकर लोग अब इसे अपनी आदत में डाल चुके हैं वहीं इसका अघोषित कटौती समय निरन्‍तर बढ़ता जा रहा है । इधर जहॉं मार्च के शुरू होते ही छात्रों के इम्‍तहान चालू होने को हैं और वे अपनी तैयारीयों में सिर खपा रहे हैं वहीं बिजली कटौती की बढ़ी टाइमिंग्‍स ने उनका टेंशन और बढ़ा दिया है । जहॉं साल भर बिजली कटती रहने से पहले ही वे पढ़ाई लिखाई में औने पौने होकर बैठे हैं वहीं अब ऐन इम्‍तिहान के वक्‍त धुआंधार बिजली कटौती उनके लिये खासी चुनौती बन गयी है ।

उल्‍लेखनीय है कि इस वक्‍त सारे चम्‍बल अंचल में क्‍या शहर क्‍या गॉंव सब जगह रात और दिन की मस्‍त कटौती जारी है । यह मध्‍यप्रदेश में शायद पहली बार होगा जब वर्ष के पूरे 365/1/4 दिन बिजली कटौती चली हो । भले ही सरकार के मंत्री और मुख्‍यमंत्री दावे पर दावे ठोकने में जुटे हों कि बिजली की लाइन में हमने ये किया वो किया, ये कर देंगे वो कर देंगे, मगर जमीनी सच्‍चाई यह है कि पहले कम कटती थी या बाबू लाल गौर के टाइम में बिल्‍कुल नहीं कटती थी, पर अब बिजली आती ही नहीं है तो कटेगी कहॉं से ।

कई गॉंव और कई फीडर वर्षों गुजर गये बिजली के दर्शन को तरस रहे हैं, वे भूल ही गये कि बिजली कैसी होती है । कई गॉंवों में तो आजादी के 62 साल बाद आज तक बिजली के खम्‍भे तक नहीं गड़े हैं, उन्‍हें नहीं मालुम कि बिजली कैसी होती है, ऐन मुरैना शहर के नजदीक महज 1-2 किलोमीटर में बसे गॉंवों के यह हालात हैं । तो सुदूर अंचल की क्‍या कहिये ।

कभी भूले भटके आ भी जायेगा बिजली तो वोल्‍टेज सुभान अल्‍लाह होते हैं, एक फेज में बकाया दूसरे फेजों के भी वोल्‍टेज बिना बुलाये आ धमकते हैं तो अन्‍य फेजों में आ रही बिजली को देख दिये मोमबत्‍ती भी शरमा जाते हैं । काटो काटो, जम कर काटो, काटे जाओ, उनने भी काटी थी वे भी कट गये, तुम भी कटोगे । जय हिन्‍द ।           

शनिवार, फ़रवरी 16, 2008

बाबा पटिया वारे की जय के साथ पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने नूरावाद में एक करोड़ के विद्युत उप केन्द्र की आधार शिला रखी

बाबा पटिया वारे की जय के साथ पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने नूरावाद में एक करोड़ के विद्युत उप केन्द्र की आधार शिला रखी

केन्‍द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह की सराहना कर धन्‍यवाद ज्ञापित किया पंचायत मंत्री ने

अतर सिंह डण्‍डोतिया ( तहसील संवाददाता )

मुरैना 15 फरवरी 2008/ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने आज मुरैना जिले के नूरावाद में एक करोड़ 04 लाख 43 हजार रूपये के विद्युत उप केन्द्र की आधार शिला रखी । इस उपकेन्द्र के बन जाने पर क्षेत्र के 26 ग्राम और 65 मजरें टोलों को विद्युत समस्या से निजात मिलेगी । पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने शिला पट्टिका का अनावरण और भूमिपूजन कर विद्युत उप केन्द्र का शिलान्यास किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री अशोक अर्गल ने की ।

सर्वप्रथम पंचायत मंत्री एवं अन्‍य उपस्थित अतिथियों का माल्‍यार्पण कर स्‍वागत किया गया । उसके पश्‍चात पंचायत मंत्री ने बाबा पटिया वारे की जय के साथ उपस्थित जनसमूह से जयकारे लगवाये ।  

       पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने कहा कि सरकार ने सड़क, पानी और बिजली को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है । विद्युत की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नूरावाद सहित रिठौरा कलां, देवगढ़, मानपुर, थरा में 33 के.व्ही. क्षमता के विद्युत उप केन्द्र बनाये जा रहे हैं । मुरैना शहर की विद्युत व्यवस्था सुधारने पर 16 करोड़ रूपये व्यय किये जायेंगे । साढ़े ग्यारह करोड़ रूपये की लागत से सबलगढ़ में 220 के.व्ही. सब स्टेशन, और 6 करोड़ रूपये की लागत से पोरसा में 132 के.व्ही. क्षमता कासब स्टेशन बनाया जा रहा है । उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति के लिए एडीवी योजना के अन्तर्गत शिवपुरी से सबलगढ़ तक डीसीडीएफ लाइन डाली जा रही है, इस पर 38 करोड़ 45 लाख रूपये का व्यय आयेगा । लगभग 10 करोड़ रूपये के व्यय से मेहगांव- पोरसा डी सी एस. एस. लाइन पर भी कार्य जारी है ।

       ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने कहा कि प्रधान मंत्री ग्राम संड़क योजना में 174 करोड़ 61 लाख रूपये की लागत से स्वीकृत 276 सड़क निर्माण कार्यों में से 125 करोड़ 52 लाख रूपये के व्यय से 196 सड़कों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है । ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के लिए 162 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है । ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री ने केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री रघुवंश प्रसाद सिंह की सराहना करते हुये कहा कि वे सच्‍चे मायने में ग्रामीण विकास की समग्र सोच रखने वाले मंत्री हैं और आज उन्‍हींकी सहृदयता से हम जिले भर में अपने विकास कार्यो को अंजाम देंगे । उन्‍होंने पर्याप्‍त राशि मुहैया करायी है । श्री रधुवंश प्रसाद सिंह की मुक्‍त कण्‍ठ से प्रशंसा करते हुये उनके प्रति पंचायत मंत्री द्वारा हार्दिक धन्‍यवाद भी ज्ञापित किया ।  

       सांसद श्री अशोक अर्गल ने कहाकि पंचायत मंत्री के प्रयास से जिले मेंसड़क और बिजली की समस्या का स्थाई निराकरण संभव होगा । उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहत्तरी की दिशा में भी कारगर प्रयास किये जा रहे है । जिले के सिंचित रकवें में वृध्दि के लिए साढ़े पांच सौ करोड़ रूपये की लागत से चम्बल नहर प्रणाली का भी उन्नयन कराया जा रहा है ।

       प्रारंभ में कार्यपालन यंत्री विद्युत श्री आर.के.एस. राठौर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को श्री कालीचरण कुशवाह ने भी सम्बोधित किया । इस अवसर पर सरपंच श्री रामदेवी, सर्व श्री गंगाराम मावई, लक्ष्मी नारायण हर्षाना, दुलारे सिंह, रमेश शर्मा , मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभय वर्मा, कार्यपालन यंत्री विद्युत मंडल श्री एम.एस. गौर और श्री अमित श्रीवास्तव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन श्री देवेन्द्र तोमर ने किया । अंत में सभी की उपस्थिति के प्रति अधीक्षण यंत्री विद्युत मंडल श्री वी.पी.गर्ग ने आभार व्यक्त किया ।

 

बुधवार, जनवरी 30, 2008

कड़ाके की सर्दी में पूरे पूरे दिन बिजली गायब

कड़ाके की सर्दी में पूरे पूरे दिन बिजली गायब

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा .....ग्‍वालियर तरसा दो बूंद जिन्‍दगी की के लिये  

मुरैना /भिण्‍ड/ श्‍योपुर । 30 जनवरी । अंचल में पिछले कई दिनों से जहॉं भारी शीत लहर और सर्दी के चलते पारा गिरकर जहॉं शून्‍य से पीछे खिसक कर चल रहा है । वहीं दिन दिन भर बिजली गुल रहने से आम जन जीवन काफी संकटमय व कष्‍टमय हो गया है । स्थिति इतनी बदतर हो गयी है कि सुबह कटौती वाली बिजली जाने के बाद फिर एक मुश्‍त या यू कहिये कि थोकबन्‍द बिजली कटौती शाम चार पॉंच बजे तक रहती है ।

नजदीकी ग्‍वालियर शहर पर तो इन दिनों एक और विकट संकट टूट पड़ा है, जहॉं बिजली कटौती से ग्‍वालियर वासी पहले से तंग व त्रस्‍त हैं वहीं अब वहॉं कई कालोनी मोहल्‍लों में पीने का पानी आना बन्‍द हो गया है । लोग जहॉं कई किलोमीटर दूर से या अपने मित्रों रिश्‍तेदारों के यहॉं से पानी ढो ढो कर ला रहे हैं वही इन दिनों ग्‍वालियर ग्‍वालियर नहीं बल्कि अठारहवीं सदी के किसी छोटे से कस्‍बे में तब्‍दील हो जाता है । आप वहॉं जाकर ग्‍वायिर वालों को इस समय अंधेरे और पानी के बीच संघर्ष में झूलते देख सकते हैं । बिना टिकिट का यह मजेदार दृश्‍य इन दिनों ग्‍वालियर में आम है । शायद पर्यटन विकास के लिये ग्रामीण भारत की झलकीयां दिखाने के लिये कुछेक मोहल्‍लों को इस परिवेश में तब्‍दील किया गया है ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स से ग्‍वालियर वासीयों ने चर्चा करते हुये कहा कि, लगता है हम आदमयुग में आ पहुँचे है और हमें लगता ही नहीं कि हम 21वीं सदी के सायबर युग में है, न तो नगर निगम में हमारी सुनवायी है न प्रशासन में । हम बकाया शहर के लिये प्रदर्शनी जैसी बन गये हैं , हमें बोतलों, पाउचों और डिब्‍बों में पानी भर कर और ढो कर लाना पड़ रहा है, मित्रों और रिश्‍तेदारों से भी कब तक मांगेगे । अनुपम नगर (सिटी सेण्‍टर की एक कालोनी) निवासी एक और नागरिक ने बताया कि वह या तो कालोनी बदल लेगा या ग्‍वालियर से अपना तबादला कहीं और करवा लेगा । उसने कहा कि वह एक याचिका उच्‍च न्‍यायालय में लगेगा कि या पानी बिजली दो वरना तबादला करो । वह कहता है कि बिजली पानी के बगैर जहॉं वह पिडले तीन महीने से नहाया नहीं है वहीं उसके बच्‍चे भी पढ़ लिख नहीं पा रहे हैं, सो उनकी भी जिन्‍दगी बर्बाद हो रही है । केन्‍द्र सरकार के इस कर्मचारी ने एक मार्मिक पत्र एक केन्‍द्रीय मंत्री को अपनी दुखद व्‍यथा वर्णन करते हुये भेजा है ।

गुरुवार, जनवरी 17, 2008

बिजली कटौती : कोहराम जारी बुधवार को रात में भी कटी बिजली

बिजली कटौती : कोहराम जारी बुधवार को रात में भी कटी बिजली

मुरैना 17 जनवरी । बिजली कटौती का कोहराम बदस्‍तूर जारी है । चम्‍बल सम्‍भाग के शहर मुख्‍यालय मुरैना पर बुधवार 16 जनवरी को सुबह की जाने वाली नियमित कटौती के चलते सुबह 7 बजे से 10:15 बजे तक जहॉं नियमित बिजली कटौती हुयी वहीं रात को तीन बार बिजली कटने से पहले शाम 7:45 बजे से 8:15 बजे तक और फिर रात 9 बजे से 10 बजे तक फिर इसके बाद रात 10:20 बजे से 10:50 बजे तक सम्‍भागीय मुख्‍यालय के शहर में अंधेरा कायम रहा ।

भिण्‍ड की दशा और भी बुरी है वहॉं भिण्‍ड शहर में दिन और रात दोनों वक्‍त की अन्‍धाधुन्‍ध कटौती के चलते लोगों ने स्‍थायी तौर पर मोमबत्‍तीयों और लालटेनों के साये में जीवन को अपनी नियति मान लिया है ।

चम्‍बल अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पूर्ववत है यानि चार पांच दिनों तक बिजली मयस्‍सर नहीं है । उल्‍लेखनीय है कि जहॉं बिजली के अभाव में किसानों के खेतों की फसलें सूख गयीं हैं वहीं छात्रों की परीक्षायें भी प्रारंभ होने जा रहीं है , तथा बिजली पर आधारित लघु उद्यम व व्‍यवसाय तो पहले ही चौपट हो चुके हैं ।

 

मंगलवार, जनवरी 15, 2008

रविवार को 8 और सोमवार को साढ़े 6 घण्‍टे की बिजली कटौती रही

रविवार को 8 और सोमवार को साढ़े 6 घण्‍टे की बिजली कटौती रही

मुरैना । उधर चम्‍बल नहर में इस साल पानी नहीं आने से जहॉं खेतों खड़ी फसलें सूख गयीं हैं वही छात्रों की परीक्षायें भी अगले माह से प्रारंभ होंगीं इस दरम्‍यान बिजली कटौती का अघोषित व अन्‍धाधुन्‍ध शिडयूल जारी है ।

रविवार 13 जनवरी को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक यानि 8 घण्‍टे और सोमवार को सुबह 7 बजे से 12:30 बजे तक फिर दोबारा सायं 5 बजे से 6 बजे तक यानि साढ़े 6 घण्‍टे अघोषित रूप से बिजली कटौती हुयी । यह कटौती चम्‍बल संभाग के शहर मुख्‍यालय मुरैना शहर में हुयी । ग्रामीण क्षेत्रों में तो चार चार दिन तक बिजली के दर्शन मयस्‍सर नहीं हैं । उल्‍लेखनीय है कि इस वर्ष चम्‍बल नहर में पानी नहीं आया है और चम्‍बल के गांव थोगापुरा पर ही चम्‍बल नहर ने दम तोड़ दिया था जिसके चलते तंवरघार क्षेत्र को इस साल पानी की बूंद नहीं मिली है और तोमरों तथा आगे भदौरियों व कुशवाहों के खेतों की फसलें लगभग सूख गयीं हैं । यह वह क्षेत्र है जहॉं हरियाली और बरकत के कभी न टूटने वाले असीम जल स्‍त्रोत कभी हुआ करते थे ।

ज्ञातव्‍य है कि चम्‍बल नहर का पानी दो भाजपा सरकारों की राजनीतिक मसखरी या नूराकुश्‍ती के बीच फंस कर रह गया है राजस्‍थान की वसुन्‍धरा सरकार और मध्‍यप्रदेश की शिवराज सरकार दोनों ही भाजपा की सरकारें हैं । बावजूद इसके इस साल किसानों को नहर का पानी नहीं मिल पाया है ।  

 

मंगलवार, दिसंबर 18, 2007

बिजली कित जाय रई है काऊ को नहीं पता

भारी बिजली कटौती से मची त्राहि त्राहि, किसान छात्र और व्‍यवसायी संकट में

बिजली कित जाय रई है काऊ को नहीं पता

मुरैना/ भिण्‍ड/ श्‍योपुर 17 दिसम्‍बर 2007 । चम्‍बल में इन दिनों जहॉं बिजली की भारी दरकार है, वहीं अन्‍धाधुन्‍ध अघोषित बिजली कटौती के चलते किसानों, छात्रों और व्‍यवसायीयों के हलक इस भरी सर्दी में सूखने लगे हैं ।

जहॉं किसान अभी तक खाद, पानी और बिजली की लड़ाई से जूझ रहे हैं वहीं इन दिनों छात्रों की छमाही परीक्षायें चल रही हैं , अनेक छात्र छात्रा तो बोर्ड की परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारीयां कर रहे हैं । वहीं छिटपुट कुटीर व्‍यवसायी जिनकी रोजी रोटी और कारोबार बिजली पर ही आश्रित है पूरी तरह चौपट होकर दिहाड़ी धन्‍धों से बेगार हो भुखमरी की नौबत तक आ पहुँचे हैं ।

हालांकि बिजली कटौती तो वर्ष भर चलती है और सदाबहार आलम दर्शाती रहती है लेकिन जब पानी सिर से ऊपर हो जाता है तो जनता नर्राती है, लेकिन इस देश का दुर्भग्‍य है कि यहॉं नेता और अफसर कान में तेल डाल कर बैठे रहते हैं, खैर अंधेरा कायम रहे महामहिम किल्विष ।

किसानों को जहॉं चम्‍बल नहर से पानी नहीं मिला , खाद नहीं मिली, बिजली नहीं मिली तो वे रो पड़े और कातर स्‍वरों तथा अविरल ऑंसूओं से धरा भिगोने लगे, उनकी यह दशा देख आसमान भी रो पड़ा और चन्‍द मावठी बून्‍दों से उसने भी धरती भिगो दी तो किसानों को जीवन के लिये चन्‍द सांसें और हासिल हो गयीं ।

अब उन बच्‍चों का क्‍या हो, जो इन दिनों छमाही परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं या सेमेस्‍टर परीक्षाओं में व्‍यस्‍त हैं, वे भी खून के ऑंसू रो रहे हैं, दिन भर बिजली नहीं तो रात में भी धुऑंधार कटौती, आखिर कब तक जलायें मोमबत्‍ती और दिये या लालटेन । रिजल्‍ट बिगड़ेगा तो भी डण्‍डा उन्‍हीं के सिर, और पढ़ें तो न दिन बिजली न रात बिजली । पढ़ लिये ठीक है, ज्‍यादा बच्‍चे फेल होंगें तो शिक्षित बेरोजगार कम होंगें, वाह क्‍या आइडिया है । खूब फेल करवाओ, न बेटा पढ़ पाओगे न शिक्षित बेरोजगार कहलाओगे ।

कहॉं तक बयॉं करें हालात ए गुलिस्‍तां यहॉं हर शाख पे ..... छोटे मोटे काम धन्‍धे वाले बिजली पर ही दिहाड़ी कारोबार कर रहे हैं और इन दिनों रात और दिन की धुऑंधार कटौती पर दहाड़ें मार कर रो रहे हैं ।

हमें तो अब सारा जमाना ही रोता दिखता है तो हमने रोना छोड़ दिया । समझ गये, नहीं समझे, इन्‍तजार करो समझ जाओगे । जय हिन्‍द ।

 

भारी बिजली कटौती से मची त्राहि त्राहि, किसान छात्र और व्‍यवसायी संकट में

भारी बिजली कटौती से मची त्राहि त्राहि, किसान छात्र और व्‍यवसायी संकट में

बिजली कित जाय रई है काऊ को नहीं पता

मुरैना/ भिण्‍ड/ श्‍योपुर 17 दिसम्‍बर 2007 । चम्‍बल में इन दिनों जहॉं बिजली की भारी दरकार है, वहीं अन्‍धाधुन्‍ध अघोषित बिजली कटौती के चलते किसानों, छात्रों और व्‍यवसायीयों के हलक इस भरी सर्दी में सूखने लगे हैं ।

जहॉं किसान अभी तक खाद, पानी और बिजली की लड़ाई से जूझ रहे हैं वहीं इन दिनों छात्रों की छमाही परीक्षायें चल रही हैं , अनेक छात्र छात्रा तो बोर्ड की परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारीयां कर रहे हैं । वहीं छिटपुट कुटीर व्‍यवसायी जिनकी रोजी रोटी और कारोबार बिजली पर ही आश्रित है पूरी तरह चौपट होकर दिहाड़ी धन्‍धों से बेगार हो भुखमरी की नौबत तक आ पहुँचे हैं ।

हालांकि बिजली कटौती तो वर्ष भर चलती है और सदाबहार आलम दर्शाती रहती है लेकिन जब पानी सिर से ऊपर हो जाता है तो जनता नर्राती है, लेकिन इस देश का दुर्भग्‍य है कि यहॉं नेता और अफसर कान में तेल डाल कर बैठे रहते हैं, खैर अंधेरा कायम रहे महामहिम किल्विष ।

किसानों को जहॉं चम्‍बल नहर से पानी नहीं मिला , खाद नहीं मिली, बिजली नहीं मिली तो वे रो पड़े और कातर स्‍वरों तथा अविरल ऑंसूओं से धरा भिगोने लगे, उनकी यह दशा देख आसमान भी रो पड़ा और चन्‍द मावठी बून्‍दों से उसने भी धरती भिगो दी तो किसानों को जीवन के लिये चन्‍द सांसें और हासिल हो गयीं ।

अब उन बच्‍चों का क्‍या हो, जो इन दिनों छमाही परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं या सेमेस्‍टर परीक्षाओं में व्‍यस्‍त हैं, वे भी खून के ऑंसू रो रहे हैं, दिन भर बिजली नहीं तो रात में भी धुऑंधार कटौती, आखिर कब तक जलायें मोमबत्‍ती और दिये या लालटेन । रिजल्‍ट बिगड़ेगा तो भी डण्‍डा उन्‍हीं के सिर, और पढ़ें तो न दिन बिजली न रात बिजली । पढ़ लिये ठीक है, ज्‍यादा बच्‍चे फेल होंगें तो शिक्षित बेरोजगार कम होंगें, वाह क्‍या आइडिया है । खूब फेल करवाओ, न बेटा पढ़ पाओगे न शिक्षित बेरोजगार कहलाओगे ।

कहॉं तक बयॉं करें हालात ए गुलिस्‍तां यहॉं हर शाख पे ..... छोटे मोटे काम धन्‍धे वाले बिजली पर ही दिहाड़ी कारोबार कर रहे हैं और इन दिनों रात और दिन की धुऑंधार कटौती पर दहाड़ें मार कर रो रहे हैं ।

हमें तो अब सारा जमाना ही रोता दिखता है तो हमने रोना छोड़ दिया । समझ गये, नहीं समझे, इन्‍तजार करो समझ जाओगे । जय हिन्‍द ।