सोमवार, अक्टूबर 18, 2010
संभागीय मुख्यालय 62 दिन से अंधेरे में
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शुक्रवार, अक्टूबर 15, 2010
संभागीय मुख्यालय 59 दिन से अंधेरे में
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मंगलवार, अक्टूबर 12, 2010
हास्य- व्यंग्य : का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्यादा और ससुरा वोल्टेज कैसा डाउन है ...नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
हास्य- व्यंग्य
का बात है भौजी .. ई सरकार का .. लोड ज्यादा और ससुरा वोल्टेज कैसा डाउन है ...
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
अभी एक मित्र ने हमें मोबाइल से एक एडल्ट जोक भेजा .. लेकिन इस चुटकुले में कुछ ऐसी चुटकी ली गयी थी कि हम हँसे बिना न रह सके .. चुटकुला कुछ यूं था – हम इसे अपनी सदाबहार स्टाइल में आपको सुनाते हैं -
एक बिजली वाले अफसर रोज देर रात को आते घर ।
अद्धी पौआ औनी पौनी, संग में माल मत्ता जम कर।।
थके हारे नित दारू पीते, दारू पी कर दारा नियरे जाते।
न नैन से नैन मिल पाये और न लब की मदिरा पी पाते।।
पर फोन रात में भी बज जाता, सारा मजा किरकिरा होता।
टेंशन नित का देख के अफसर, एक रिकार्डिंग वह कर लेता।।
अपने फोन में वायस भरी, लोड है ज्यादा , वोल्टेज डाउन ।
बिजली नहीं मिल पायेगी, करा तुमने हमरा सिग्नल डाउन ।।
रोज रात को सुनते सुनते, बिजली भौजी ने रट लीं ये लाइन ।
हमारे सनम का प्रिय भाष है, लोड है ज्यादा वोल्टेज डाउन ।।
एक दिन सुबह बोली पड़ोसन, कुछ सुनो सहेली कुछ कहो जरा ।
कैसी रोज रात है कटती , पिया से कैसे मधुर मिलन है होता ।।
माथा ठोक ठोक के बिजली भौजी, करम दण्ड पर रख कर हाथ ।
तड़प झड़प कर बोली सखी से का बतलाऊं जीजी, जरा बड़ी है बात।।
रोज रात को बलम जी पी कर सोते, हाई वोल्टेज में करते बात ।
रात बखत जब हाई वोल्टेज चाहिये, तब फिर ना करते ये बात ।।
रोज रात को खुद नर्राते, सोते सोते से नित उठ कर चिल्लाते ।
लाइन शार्ट है, लाइन फाल्ट है, लोड है ज्यादा वोल्टेज डाउन ।।
किस्मत दुखिया हमरी कुछ ऐसी है , तुमसे कह दें दिल की बात ।
उनके भरे बदन में दिखता पूरा पावर हाउस, लगे कटाउट पूरे सात ।।
आते हैं सन्ना सन्ना सरकार, पर लोड है ज्यादा, है डाउन वोल्टेजवा ।
फूट फूट मैं फ्यूज हो कर बुझी ट्यूबलाइट सी बुझती हूं, जले करेजवा ।।
सुन कर सखी मुस्काई बोली, करो सस्पेण्ड डाउन ट्रान्सफार्मर, बिना यूज और बेमतलब का, फेंकों जो हैं बिन काज ।
नया हाई टेंशन हाई वोल्टेज, टा्रान्सफार्मर का करो प्रयोग, या फिर अपने खम्बे से डलवा दूं , बोलो क्या चाहो तुम आज।
अब जब बिजली ही क्या खुद सरकार का ही डाउन वोल्टेज और हैवी लोड चल रहा है, जनता उनका लोड झेल रही है, जिनमें वोल्टेज ही नहीं है, जो ऊपर चढ़े हैं जनता के, बिना वोल्टेज के जिन्दा मुर्दे । ऐसे सरकार को शत शत नमन ... मध्यप्रदेश की अन्धाधुन्ध बिजली कटौती को सादर समर्पित
शनिवार, मई 01, 2010
मुरैना : 20 घण्टे से अधिक बिजली बन्द रही 24 घण्टे के दरम्यां
मुरैना : 20 घण्टे से अधिक बिजली बन्द रही 24 घण्टे के दरम्यां
मुरैना 1 मई 10, मुरैना शहर और मुरैना जिला वासीयों के लिये अप्रेल माह का आखरी दिन कई मनहूसियतें ले कर आया । जहॉं 30 अप्रेल को ही ग्वालियर श्योपुर छोटी लाइन ट्रेन पलट गई वहीं 30 अप्रेल को सुबह 4 बजे हुयी बिजली कटौती के बाद सुबह 10:16 बजे बिजली वापस आयी यानि पूरे 6 घण्टे 16 मिनिट तक बिजली कटी, उसके बाद दोपहर 2 बजे कटी बिजली फिर वापस आयी ही नहीं और दूसरे दिन यानि 1 मई को सुबह 4 बजे ही वापस आयी अर्थात 24 घण्टे के दरम्यां कुल 20 घण्टे 16 मिनिट तक पावर शट डाउन रहा ।
हालांकि दोपहर 2 बजे से दूसरे दिन सुबह 4 बजे तक पावर शट डाउन के बारे में मध्यक्षेत्रीय विद्युत वितरण कम्पनी का कहना है कि हाई टेंशन ट्रान्समिशन लाइन टूट जाने से मेजर फाल्ट हो जाने से 14 घण्टे कन्टीनूअस पावर शट डाउन रहा ।
इस दरम्यां ट्रेन पलटने से घायल लोग मुरैना अस्पताल में पड़े कराहते रहे, अस्पताल में बिजली नहीं होने से वहॉं भी कराहें कोहराम और चीख पुकार मचा रहा ।
शनिवार, अप्रैल 17, 2010
मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प
मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प
मुरैना 17 अप्रेल , चम्बल में यू तो भ्रष्ट व बेईमान अधिकारीयों को पदस्थ कर जनता का लहू चूसना आम बात है, स्थानीय नेताओं के पालतू और कमाई अधिकारीयों का जुल्मो सितम इस हद तक पार कर गया है कि साल भर चलने वाली बिजली कटौती भारी भीषण गर्मी और घुआंधार मच्छरों के बीच बढ़ा कर दिन भर की बिजली क्औती के साथ पिछले दो दिनों से रात में भी शुरू कर दी गयी है ! उल्लेखनीय है स्थानीय भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारीयों और नाकारा हो चुकी नगर पालिका के सितमो आलम ये हैं कि भारी मच्छरों से त्रस्त शहर में पिछले तीन साल से मच्छरों के लिये न तो कोई दवा कभी छिड़कावायी गई और न फोगिंग ही करवाई गई ! जबकि नगरपालिका के पास फोगिंग मशीन उपलब्ध है !
ऐसे में पूरे दिन भर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक और फिर अब रात में भी इसी कदर की जाने वाली बिजली कटौती ने शहरवासीयों का जीना मुहाल कर दिया है ! जहाँ शहरवासी इस बिजली कटौती से न केवल सकते में हैं बल्कि उनमें भारी आक्रोश भी भड़क गया है ! जहाँ गर्मी की मौसमी बीमारीयों की चपेट में आकर लोगों में मजीलस,खुजली और चिकनगुनियां जैसे रोग फैल गये हैं वहीं बानमौर के एक सरकारी छात्रावास के 30 में से 29 बच्चों के एक साथ चपेट में आ जाने से सारे बच्चे छात्रावास से भगा दिये गये हैं और बिना कोई चिकित्सा कराये हरिजन दलित गरीब बच्चों से छात्रावास खाली करा लिया गया है ! अंचल में व्याप्त सरकारी लापरवाही के बदइंतजामी का शिकार होकर जहाँ बीमारीयों और मच्छरों से जनता त्रस्त हेै वहीं रात भर और दिन भर की बिजली कटौती से चारों ओर कोहराम मचा है व आक्रोश व्याप्त हो गया है !
शुक्रवार, जनवरी 29, 2010
कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी.......बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार.....
कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी.......बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार.....
Narendra Singh Tomar "Anand"
कबिरा बिजली देंख के, जब रह गये यूं दंग ।
देख तमाशा अजब सा, ठानी रच रस रंग ।।
ठानी रच रस रंग, पदबन्ध रचा ।
लिखा अपढ गँवार जो जन मन बीच बसा ।।
बिजली को तो जाना है, वक्त से पहले चली गयी ।
दिन भर पूरे गोल रह, देर रात को आयेगी ।।
टाँग पसार के दिन भर सोवो, करो रात में काम ।
चढ जा बेटा सूली पे, बली करेंगे राम ।।
भली करेंगे राम, जय श्री राम जय श्री राम ।
सदी 18 का मिले, फोकट ही आराम ।।
बच्चों के पेपर फिर आये, लेकिन बिजली कभी न आई ।
भर्ती सारे चोर कर लिये जिनने सूंत के करी कमाई ।।
चोर एक चोरी करे, फिर भी सीनाजोर ।
अपनी चोरी का दे दोष , कहता जनता चोर ।।
40 साल से चल रही व्यवस्था, तब नहीं थी जनता चोर ।
चोरों की सत्ता आते ही अब कहते जनता चोर ।।
पूरी बिजली लील गये, पर ना लई डकार ।
कानन में है रूई ठुसी, सोय रही सरकार ।।
करोड अरब के करे घुटाले, फर्जीवाडे खर्च में डाले ।
दारू बीवी और संग में 56 ऐब और हैं पाले ।।
खर्च वसूली लाली लिपिस्टक औ ऊपर की माँग ।
कैसे पूरति होवे इनकी रोज रचें नित इक स्वांग ।।
कछु लुगाई की फरमाइश कछु रखैलन संग ।
जेबें काट काट जनता की, करें प्रजा कों तंग ।।
भडिया बैठे बिजली घर में रोज करें भडियाई ।
जो कहुँ जनता करे शिकायत, जानो सिर पे आफत आई ।।
या चोरी का केस लगावै, या माँगें पनिहाई ।
जो जनता माई बाप कहावे, भई अब गरीब लुगाई ।।
लोड चेक के नाम पे, ठांसें रोज डकैत ।
सरकारी लैसन्स पे, लूटत फिरें भडैत ।।
इन भडियन के राज में, खूब मचा अंधेर ।
अंधकार कायम रहे, कोडवर्ड का ये शेर ।।
अब जनता दीखे चोर, कहें लीलै बिजली जनता ।
जब बिजली थी खूब यहाँ , काहे चोर बजी न जनता ।।
तब भी काँटे खूब डले थे. खूब जले थे हीटर ।
जम कर बिजली खूब जलाते और नहीं थे मीटर ।।
बिन बिजली के बिल मिल रहे अब अंधाधुंध अनंत ।
अब बढी गयी आबादी, बोलो सरकारी संत ।।
6 शहर भारत के ऐसे, आध करोड ऊपर आबादी ।
ना बिजली का पत्ता खडके, ना ऐसी बर्बादी ।।
काँटे कटिया वहाँ भी डलते, ए.सी. हीटर की भरमार ।
पहले झाँको गिरेबान में गुण्डा भडियन के सरदार ।।
हालत गुण्डा राज की , देख कें रहे कबीरा रोय ।
पब्लिक नर्राती फिरे, राजा रहो है सोय ।।
राजा रहो है सोय. कान में डारे नौ मन तेल ।
पाछें रजिल्ट से बुरो रहे, छात्रों यही करमन के खेल ।।
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
........क्रमश: जारी रहेगा अगले अंक में
शनिवार, जनवरी 09, 2010
बदलाव की लहर : स्वतंत्र बिजली निर्माताओं के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से प्रोत्साहन -प्रभावती आकाशी
बदलाव की लहर : स्वतंत्र बिजली निर्माताओं के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से प्रोत्साहन
-प्रभावती आकाशी
लेखिका निदेशक (एम एवं सी), पसूका (प्रेस इन्फारमेशन ब्यूरो, भारत सरकार ), दिल्ली हैं
दुनियाभर में पवन का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए सदियों से किया जा रहा है । भारत में भी, लाखों घरों और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए वायु से बिजली पैदा करने की असीम क्षमता है । पवन ऊर्जा तेजी से बढता अक्षय ऊर्जा स्रोत है जो कुल संस्थापित अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता के 70 प्रतिशत से अधिक है । अब तक करीब 11,000 मेगावाट की संचयी क्षमता स्थापित की जा चुकी है तथा 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए 14,000 मेगावाट में से अक्षय ऊर्जा के लिए 10,500 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।
प्रोत्साहन
मंत्रालय व्यावसायिक पवन बिजली परियोजनाओं को अनेक वित्तीय प्रोत्साहनों के जरिए 1993-94 से बढावा दे रहा है जिनमें त्वरित मूल्यह्रास शामिल है । पवन बिजली क्षेत्र के विकास के लिये मूल्य मुख्य प्रेरकबल और वास्तविक प्रोत्साहन 80 प्रतिशत त्वरित मूल्यह्रास का प्रावधान किया गया है तथा कई अन्य क्षेत्रों के लिए छूट या प्रोत्साहन भी उपलब्ध है । इस प्रावधान से लाभ कमाने वाली बड़ी कंपनियां, छोटे निवेशक और विमोहित उपयोक्ता क्षेत्र में भागीदारी करने में समर्थ हुए हैं। तथापि, स्वतंत्र बिजली निर्माता और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश त्वरित मुल्यह्रास प्रावधान का फायदा उठाने में समर्थ नहीं थे । निवेशक आधार बढाने के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने 62,00 लाख रूपए प्रति मेगावाट के विषयाधीन पवन बिजली परियोजनाओं से ग्रिड में 50 पैसे प्रति यूनिट बिजली के निर्माण आधारित प्रोत्साहन के लिए स्कीम की घोषणा की है ।
इस स्कीम का उद्देश्य पवन ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना और ग्रिड इंटरएक्टिव अक्षय ऊर्जा की मात्रा बढाना है ।
पवन बिजली परियोजनाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन नीति ढांचा
· परस्पर विशिष्ट ढंग में त्वरित मूल्यह्रास सहित मौजूदा वित्तीय प्रोत्साहन के समानान्तर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन लागू करना ।
· कंपनियां त्वरित मूल्यह्रास या उत्पादन आधारित प्रोत्साहन में से एक ही ले सकती हैं दोनों नहीं ।
· उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम 11वीं योजना की बाकी अवधि के दौरान 4000 मेगावाट की अधिकतम सीमा क्षमता के लिए लागू होगी ।
· उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के समानान्तर त्वरित मूल्यह्रास का प्रावधान 11वीं योजना अवधि तक या प्रत्यक्ष कर संहिता शुरू होने तक (जो भी पहले हो) जारी रहेगा ।
स्कीम की मुख्य विशेषताएं
· प्रोत्साहन ऋ रूपये 62 लाख प्रतिमेगावाट की सीमा के साथ रूपये 0.50 प्रति इकाई ।
· अवधि-4 वर्ष से कम नहीं और 10 वर्ष से अधिक नहीं ।
· मंत्रालय की ओर से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम की अधिसूचना के बाद पवन टरबाइन 31.03.1012 को या उससे पहले चालू ।
· अधिसूचना के बाद सभी पवन टरबाइनपरियोजनाएं पंजीकृत की जानी हैं ।
· प्रोत्साहन राज्य विद्युत विनियामक आयोग से अनुमोदित शुल्क के अतिरिक्त होता है।
· ग्रिड के लिए बिजली की उपलब्धता बढाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है तथा एसईआरसी के जरिए शुल्क निर्धारित करते समय इस पर विचार नहीं किया जाएगा ।
स्कीम के कार्यान्वयन के लिए भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी
भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम को कायान्वित करेगी । प्रशुल्क वितरण के उद्देश्य से बिजली उत्पादन के डाटा संग्रह के लिए विभिन्न राज्य जनोपयोगी सुविधाओं में अपनाई जाने वाली मौजूदा प्रणाली को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के वितरण के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ पालन किया जाएगा । भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के साथ-साथ त्वरित मूल्यह्रास के लिए उपयोगी सभी पवन टरबाइनों का व्यापक डाटाबेस बनाएगी । सभी पवन टरबाइनों की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की जाएगी जो उक्त प्रोत्साहन के लिए दावा करने हेतु अनिवार्य जरूरत होगी । उत्पादन आधारित प्रोत्साहन और त्वरित मूल्यह्रास दोनों तरह की परियाजनाओं के लिए पंजीकरण जरूरी है जो परियोजना वार किया जाएगा । प्रत्येक मशीन के लिए विशिष्ट पहचान संख्या होगी ।
स्कीम के लिए कौन योग्य है ?
· ऐसे उत्पादक जो त्वरित मूल्यह्रास का लाभ नहीं लेते हैं ।
· एसईआरसी प्रशुल्क पर ग्रिड के लिए बिजली की बिक्री के लिए स्थापित पवन बिजली परियोजनाओं से जुड़ी ग्रिड ।
· विमोहित पवन बिजली परियोजनाएं ।
कौन योग्य नहीं है ?
· तीसरे पक्ष को बिजली बेचने वाली परियोजनाएं
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के लिए दावा छमाही आधार (अप्रैल-सितंबर और अक्तूबर-मार्च) पर जारी किया जा सकता है । आयकर विवरणी दाखिल करने के बाद पहला दावा अगस्त-सितम्बर, 2010 तक जारी होने की संभावना है ।
11वीं योजना के अंतिम वर्ष के दौरान स्कीम का मूल्यांकन किया जाएगा । अगर स्कीम को उम्मीद से अधिक समर्थन मिला तो इसकी सीमा बढाने पर विचार किया जाएगा ।
11वीं योजना की बाकी अवधि के दौरान उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के जरिए 4000 मेगावाट की क्षमता प्राप्त होने का अंदाजा है, इसलिए यह उम्मीद है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम देश में पवन बिजली विकास को नई बुलंदी तक ले जाएगी ।
केन्द्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री डा0 फारूख अब्दुल्ला ने ठीक ही अवलोकन किया है कि भारत में क्षमता, तकनीकी सहायता सुविधाएं, नीति ढांचा तथा विनियामक माहौल, निर्माण आधार में तेजी तथा निवेशकों के भरोसे संबंधी दशाएं विशेष रूप से पवन ऊर्जा क्षेत्र में, अक्षय ऊर्जा में त्वरित वृध्दि के अनुकूल हैं । डा0 अब्दुल्ला को यह उम्मीद भी है कि भारत की सामान्य वायु प्रणाली के लिए उपयुक्त बेहतरीन और प्रभावी पवन टरबाइनों की उपलब्धता और बिजली के लिए बुनियादी ढांचे में वृध्दि से देश की पवन ऊर्जा क्षमता वर्तमान अनुमान के अनुसार 45000 मेगावाट से अधिक हो जाएगी ।
अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढाने तथा अपने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश की बढती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद के लिए बिजली पैदा करने के वास्ते इस प्रचुर घरेलू संसाधन से फायदा उठाने का यह उपयुक्त समय है ।
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# निदेशक (एम एवं सी), पसूका, दिल्ली ।